शनि पीड़ा निवारक उपाय

शनि पीड़ा निवारक उपाय  

शनि पीड़ा निवारक उपाय शनि को वृद्धावस्था का स्वामी ग्रह माना जाता है। घर में वृद्ध माता-पिता शनि के रूप होते हैं। जिस घर में वृद्ध माता-पिता को प्रसन्न रखा जाता है उस पर शनि की कृपा दृष्टि रहती है। जहां वृद्ध माता-पिता को सताया जाता है, वहां शनि का प्रकोप पड़ता है। अतः शनि की पीड़ा दूर करने का सबसे अच्छा उपाय है वृद्ध व्यक्तियों को प्रसन्न रखना। अंगविहीन व्यक्तियों तथा भिखारियों की सेवा करने से भी शनि प्रसन्न होता है। भैरव की उपासना और शनैश्चरी अमावस्या के दिन गरीबों को अन्नदान करने से भी शनि की कृपा प्राप्त होती है। कोई भी व्यक्ति जो शनि के दुष्प्रभावों से पीड़ित हो या जिसकी कुंडली में शनि की स्थिति अनुकूल नहीं हो, वह निम्नलिखित में से कुछ उपाय करके लाभान्वित हो सकता है। शनि का छल्ला मध्यमा अंगुली में धारण करें। काले कुŸो को हर शनिवार रोटी पर तेल लगाकर खिलाएं। प्रति शनिवार गरीबों को भोजन दंे। भैरव मंदिर में हर शनिवार इमरती चढ़ाएं। शनि की वस्तुओं का दान करें, जैसे काला कपड़ा, लोहा, काला उड़द, काला तिल, काला कंबल, कोयला आदि। शनि के बीज मंत्र ऊँ शं शनैश्चराय नमः का प्रतिदिन कम से कम 27 बार जप करें। सातमुखी रुद्राक्ष अनिवार्य रूप से धारण करें। दूध से पारद शिवलिंग पर प्रतिदिन अभिषेक करें। घर में शनि यंत्र स्थापित कर प्रत्येक शनिवार को उसका तेल से अभिषेक करंे। शनि की नाल घर या दुकान पर लगाएं। पीपल की जड़ में प्रति दिन मीठा जल चढ़ाएं। नित्य हनुमान जी की पांच परिक्रमा करें। हनुमान चालीसा, संुदर कांड और शनि स्त्रोत का पाठ नियमित रूप से करें। शनिवार को सात प्रकार के अनाज दान करें। कांसे के पात्र में तेल भर कर उसमें अपना चेहरा देख कर पात्र का दान करें। महामृत्युंजय मंत्र का जप करें। काला उड़द सात दिन बहते जल में प्रवाहित करें। ास में एक बार हनुमानजी को पूरा चोला चढ़ाएं। कौओं को अनाज दें। शनिवार का वत्र रखं े आरै वत्र ताडे त़ े समय उड़द के व्यंजन जरूर खाएं। शनि के वृक्ष की जड़ काले कपड़े में लपेटकर बायीं भुजा में बांधंे। हमेशा नीला रूमाल अपने पास रखें। सिर से पैर तक की माप का काला धागा लंे। फिर उसे सिर से सात बार घुमा कर जला दंे। दूसरी बार नाप कर गले में या हाथ में धारण करें। लोहे या स्टील का कड़ा धारण करें। निर्धन, शूद्र, लंगड़े आदि को काले वस्त्र का दान करें। काली चींटियों को आटा दें। बुजुर्ग को काली छतरी का दान करें। मछलियों को चने खिलाएं। स्वयं शनिवार को कोई वस्तु दान में न लंे। लोहे की वस्तुओं का दान करें। मांस और मदिरा का सेवन न करें। बेईमानी करने व झूठ बोलने से बचें। शनि के कारण आर्थिक हानि रोकने के लिए सिद्ध एकाक्षी नारियल को लाल कपड़े में बांध कर तिजोरी में रखें। शनि की साढ़े साती के कुप्रभावों से पूरी तरह मुक्ति तो संभव नहीं है, किंतु निम्नलिखित उपायों से उन्हें कम किया जा सकता है। ध्यान रहे, ये उपाय लगातार तीन शनिवार करना चाहिए। प्रथम शनिवार- एक मटकी के चारों तरफ छेदकर लें। फिर उसमें सवा किलो पिसा हुआ बाजरा 200 ग्राम शक्कर और तीन चम्मच घी डाल दें और शनिवार को गोधूलि बेला में किसी पेड़ के नीचे मिट्टी के ढक्कन से ढककर गड्ढा खोदकर दबा दें। द्वितीय शनिवार- सवा किलो आटे में गुड़ मिलाकर गुलगुले बनाएं और उन्हें शाम को अपने घर की छत पर रख दंे। तृतीय शनिवार- सवा किलो आटे की मोटी रोटी बनाकर उस पर घी एवं गुड़ रखकर शनि के मंदिर में रख दें। फिर सरसों के तेल का दीपक जलाकर वापस आ जाएं। ध्यान रहे, वापस आते समय पीछे मुड़ कर नहीं देखें। शनि की शांति के अन्य उपाय- हनुमान जी को शनिवार अथवा मंगलवार को। सिंदूर और तेल चढ़ाएं। काले घोड़े की नाल का छल्ला या पुरानी नाल की अंगूठी मध्यमा में धारण करें। स शनिवार को मंदिर के बाहर गरीबों को तेल में बनी हुई सब्जी एवं रोटी का दान करें। दशरथकृत स्तोत्र का पाठ करें। पीपल के पेड़ लगातार सात शनिवार तक शाम को सरसों के तेल का दीपक जलाएं। तेल, तिल, काले वस्त्र, लोहे, काले फूल, काले जूते, कस्तूरी आदि का दान करें। राम-रक्षा स्तोत्र’ का जप करें। हनुमान चालीसा का पाठ करें। नित्य हनुमान जी का दर्शन करें। शिव उपासना करें एवं शिवलिंग पर जल चढ़ाएं, क्योंकि शिव शनि के गुरु हंै। शनिवार को उर्द की दाल में तिल का तेल डालकर लड्डू बनाकर जिस जमीन पर हल न चला हो उसमें दबाएं। कीकर का दातून करें तथा उर्द की दाल, बादाम और नारियल बहते पानी में बहाएं। लोहे का तवा, चिमटा, अंगीठी किसी साधू को दान दें। व्यवसाय में घाटे से मुक्ति के लिए कौओं को 43 दिनों तक रोटी डालें। शनिवार का व्रत और शनि की लौह निर्मित प्रतिमा को पंचामृत से स्नान कराकर, काले रंग, गंध, पुष्प, धूप, आदि से पूजा करें। साथ ही शनि के निम्न दस नामों का श्रद्धा पूर्वक उच्चारण करें- ऊँ श्री कोणास्थ नमः ऊँ श्री पिंगलो नमः ऊँ श्री वभ्रु नमः ऊँ श्री कृष्णवर्णानाय नमः ऊँ श्री रौद्रोतको नमः ऊँ श्री यमराजाय नमः ऊँ श्री सौरि नमः ऊँ श्री मन्दाय नमः ऊँ श्री पिप्पलाय नमः ऊँ श्री शनैश्चर नमः शनिवार के सूर्योदय से पहले या सूर्यास्त के पश्चात पीपल के पेड़ को सात धागों से लपेट कर सात परिक्रमा करते हुए पूजन करें। काले तिल, जौ, उड़द, गुड़, लोहे, तेल व काले वस्त्र का यथासंभव दान करें। शनि के प्रकोप से अगर कन्या के विवाह में बाधा आ रही हो तो काला सुरमा जमीन में दबाएं या जल में प्रवाहित करें। बीमारी से छुटकारा पाने के लिए बरगद के पेड़ की जड़ में दूध डालकर उसकी तीन परिक्रमा करने बाद गीली मिट्टी का तिलक करें। मकान बनाने में अगर बार-बार अड़चनें आती हों तो काला कुŸाा पालें और उसकी सेवा करें। घर में कलह से मुक्ति के लिए 7 बादाम गिरी व नारियल बहते पानी में बहाएं। शनि के अनिष्ट से बचने के लिए सात शनिवार को आक के पौधे की जड़ में सरसों के तेल में अपना मुंह देखकर तेल डालें। नीले-काले रंग के वस्त्र, पर्दे अथवा चादर का उपयोग नहीं करें। घर की दीवारों पर नीला रंग नहीं करें। सात शनिवार को कीड़े-मकोड़ों को काले तिल डालें। शराब, सिगरेट, मछली, मांस का सेवन बिल्कुल नहीं करें। शनिवार को उड़द की दाल की गोलियां बना कर मछलियों को डालें। घर में काला कुŸाा या भैंस नहीं पालें। शनि से पीड़ित जातक शनिवार को श्मशान घाट में अपने भार के बराबर लकड़ी दान करे। शनि औषधि से स्नान करने के बाद शिवलिंग पर जल और हनुमान मंदिर में सिंदूर चढ़ाना चाहिए। उक्त सभी उपाय करने से शनि के दुष्प्रभावों से बचा जा सकता है और शनि दुष्प्रभाव न देकर शुभ फल प्रदान करता है। शिवलिंग, हनुमान मंदिर, पीपल के पेड़ अथवा वटवृक्ष के पास शनि की आरती करनी चाहिए। इस तरह उपर्युक्त उपाय करके कोई भी व्यक्ति शनि के दुष्प्रभावों से बच सकता है। काली गाय को प्रतिदिन रोटी खिलाएं तथा शुभ फल की प्राप्ति के लिए शनि से प्रार्थना करें। गुड़, तिल, उड़द, काला कपड़ा, तेल और लोहे के बत्र्तन किसी भी शनिवार को किसी गरीब वृद्ध को दान करें। उड़द की दाल के बडे़ सरसों के तेल में तलकर कौओं को खिलाएं। प्रत्येक शनिवार को सूर्योदय से पूर्व पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं। शनि को प्रसन्न करने के लिए सफेद वस्त्र में काले तिल बांधकर बहते पानी में प्रवाहित करें। बहते पानी में जटायुक्त नारियल प्रवाहित करें। श्रवण नक्षत्र में शमी के पेड़ की जड़ काले कपड़े में बांधकर दायीं भुजा में बांधें। प्रत्येक शनिवार को कटोरी में सरसांे या तिल के तेल में अपना मुंह देखकर तेल का दान करें। शनि को प्रसन्न करने के लिए काली गाय की सेवा करें। उसके सींगों पर मौली व खुरों पर रोली लगाकर उसे बूंदी के लड्डू खिलाएं। शनिवार को अपने हाथ की नाप से 19 गुणा लंबे काले धागे की माला बनाकर गले में पहनें। किसी नाव की कील अथवा काले घोड़े के नाल की अंगूठी मध्यमा में धारण करें। किसी शीशी (बोतल) में सरसों का तेल भरकर उसे पानी से भरें तालाब के तल में जमीन के नीचे दबा दें। अंगविहीन व्यक्तियों तथा भिखारियों की सेवा करने से भी शनि प्रसन्न होता है। भैरव की उपासना और शनैश्चरी अमावस्या के दिन गरीबों को अन्नदान करने से भी शनि की कृपा प्राप्त होती है।



शनि विशेषांक  जुलाई 2008

शनि का खगोलीय, ज्योतिषीय एवं पौराणिक स्वरूप, शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या एवं दशा के प्रभाव, शनि के दुष्प्रभावों से बचने एवं उनकी कृपा प्राप्ति हेतु उपाय, शनि प्रधान जातकों के गुण एवं दोष, शनि शत्रु नहीं मित्र भी, एक संदर्भ में विवेचना

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