पंच पक्षी की क्रियाविधि

पंच पक्षी की क्रियाविधि  

प्रत्येक मनुष्य का जन्म या तो दिन अथवा रात्रि, कृष्ण पक्ष अथवा शुक्ल पक्ष एवं सप्ताह के किसी एक वार को होता है। जैसा कि पहले आलेख के द्वारा बताया गया कि पंच पक्षी पांच तात्त्विक स्पंदन के आधार पर पांच तरीके से शुक्ल पक्ष एवं कृष्ण पक्ष में चंद्र के बढ़ते एवं घटते कलाओं के प्रभाव के अनुरूप कार्य करते हैं। इन पांचों तत्वों का स्पंदन 5 स्तरों में एक निश्चित समयावधि के लिए क्रियाशील रहता है। पक्षियों की क्रियाविधि एवं क्रियाशीलता में पक्ष, तिथि एवं दिवस के आधार पर परिवर्तन आता रहता है। यदि इनमें से कोई एक अपनी उच्च अवस्था में होता है तो दूसरे चार अन्य भिन्न अवस्थाओं में घटते हुए क्रम में होते हैं। हममें से प्रत्येक किसी एक पक्षी के प्रभाव में रहते हैं। पाठकों की सुविधा के लिए हम पांचों पक्षियों एवं उनकी क्रियाविधि को पुनः सारणीबद्ध कर रहे हैं। पक्षी पक्षियों के विभिन्न कृत्य गिद्ध मरना मुर्गा सोना कौआ घूमना उल्लू खाना मोर शासन करना पांचों में से प्रत्येक पक्षी उपर्युक्त कृत्य एक निश्चित क्रम से संपादित करते हैं। एक पक्षी जिस प्रकार का कार्य एक खास समय में कर रहा होता है उस समय कोई दूसरा पक्षी उस कार्य में संलग्न नहीं होगा बल्कि अन्य चार पक्षी उस समय एक दूसरे से भिन्न चार अन्य कार्यों में लगे होंगे। कार्यों की प्राथमिकता का क्रम सप्ताह के हर दिवस एवं दिन/ रात्रि आदि में अलग-अलग होता है। पांचों पक्षियों के कृत्य ऊपर सारणी में वर्णित क्रम से क्रमशः शक्तिशाली होते जाते हैं। जैसे: खाना और शासन करना क्रम में सबसे ऊपर के स्तर में आते हैं जिसमें शासन करना सर्वाधिक शक्तिशाली कृत्य का द्योतक है। उच्च कृत्य में क्रियाशील पक्षी सदैव अपने से निम्न कृत्य में क्रियाशील पक्षियों के ऊपर विजय श्री हासिल करता है। इस प्रकार शासन करने के कृत्य में क्रियाशील पक्षी सदैव बाकि चार कृत्यों में खाना, घूमना, सोना, मरना आदि गतिविधियों में क्रियाशील पक्षियों से शक्तिशाली साबित होगा तथा उसे विजय मिलेगी। इसी प्रकार खाने की गतिविधि में क्रियाशील पक्षी को शासन करने वाले पक्षी से तो पराजय मिलेगी किंतु यह पक्षी घूमना, सोना तथा मरना आदि गतिविधियों में संलग्न तीनों पक्षियों से शक्तिशाली साबित होगा तथा उसे उनपर विजय मिलेगी। इसे निम्नांकित रूप में सारणीबद्ध कर आसानी से समझा जा सकता है। विजेता पक्षी पराजित पक्षी 1. शासन करना Û खाना Û घूमना Û सोना Û मरना 2. खाना Û घूमना Û सोना Û मरना 3. घूमना Û सोना Û मरना 4. सोना Û मरना इस प्रकार मरने की गतिविधि संपादित करने वाला पक्षी अन्य सभी गतिविधियों में संलग्न पक्षी से सदैव पराजित होगा। अतः उपर्युक्त क्रम से ही दैनिक गतिविधियों में हमारे कार्य की सफलता-असफलता निर्भर करती है। इसे नीचे वर्णित आधार पर अधिक स्पष्टता से समझा जा सकता है। 1. यदि किसी व्यक्ति का जन्म पक्षी सर्वोच्च शक्तिशाली गतिविधि में संलग्न है जैसे शासन करना, तो वह व्यक्ति उस दिन उस अवधि में



हस्तलेख एवं हस्ताक्षर विशेषांक  फ़रवरी 2014

फ्यूचर समाचार पत्रिका के हस्तलेख एवं हस्ताक्षर विशेषांक में हस्तलेख से व्यक्तित्व विश्लेषण, लिखावट द्वारा रोगों की पहचान एवं उपचार, हस्ताक्षर के प्रकार एवं विशेषताएं, भिन्न मानसिकता की भिन्न लिखावट, हस्ताक्षर एवं ग्रह आपके हस्ताक्षर क्या कहते हैं, लिखावट से जानें व्यक्ति विशेष को तथा हस्तलिपि एवं उपयोग, कैसे लें हस्ताक्षर द्वारा स्वास्थ्य व धन लाभ आदि गूढ़ एवं महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा के अतिरिक्त फिल्मों में करियर, एस्ट्रो पामिस्ट्री, महाशिवरात्रि व्रत का अध्यात्मिक महत्व, पंचपक्षी की क्रियाविधि, सफलता में दिशाओं का महत्व तथा आदि शक्ति जीवनदायिनी मंगलरूपा मां तारिणी के तीर्थस्थल पर रोचक आलेख सम्मिलित हैं।

सब्सक्राइब

अपने विचार व्यक्त करें

blog comments powered by Disqus
.