मंगल के दान पदार्थ एवं मंत्र

मंगल के दान पदार्थ एवं मंत्र  

मंगल के दान पदार्थ एवं मंत्र मंगल ग्रह के दान पदार्थ: यदि गोचर में मंगल अनिष्ट फल दे रहा हो, तो उसके शमन के लिए मंगलवार को नीचे दी गई वस्तुओं का योग्य ब्राह्मण को दान करना चाहिए। दान पदार्थ: लाल फूल, लाल फल, लाल चंदन, लाल कपड़ा, लाल गुड़, लाल मसूर दाल, गेहूं, तांबा, सोना, केशर, कस्तूरी, रक्त प्रवाल (लाल मूंगा) लाल बैल और लाल मिट्टी वाली जमीन। दान का समय: सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच कभी भी। मंगल के मंत्रों की जप संख्या: दस हजार । मंगल ग्रह के मंत्र: वैदिक मंत्र: ¬ अग्निर्मूर्धादिवः ककुत्पतिः पृथिव्याअयम्। अपा रेता सिजिन्वति।। मनोरथ सिद्धि मंत्र: ¬ ऐं ह्रौं श्रीं प्रां कं ग्रहाधिपतये भौमाय स्वाहा। बीज मंत्र: ¬ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः। तांत्रिक मंत्र: ¬ अं अंगारकाय नमः। उपासना मंत्र: ¬ हुं श्रीं मंगलाय नमः। मंगल गायत्री मंत्र: ¬ अंगारकाय विद्महे शक्तिहस्ताय धीमहि तन्नो भौमः प्रचोदयात्। मालाएं: अनिष्टप्रद मंगल को अनुकूल बनाने हेतु उसके किसी भी मंत्र या मंगल गायत्री के जप के लिए हैदराबादी रुद्राक्ष के छोटे दानों की माला, मूंगे या इटालियन मूंगे की माला अथवा रक्त चंदन की माला का प्रयोग करना चाहिए। जप साधना काल में अपने समक्ष पटे पर लाल रेशमी वस्त्र बिछाकर मंगल यंत्र की पूजा करनी चाहिए। मंगल की शांति के लिए मंगलवार का व्रत, चामुंडा, प्रत्यंगिरा या पीतांबरा की आराधना, हनुमान मंदिर में दीपदान, बजरंग बाण का पाठ, सुंदरकांड का पाठ अथवा हनुमत लांगूल स्तोत्र का पाठ एवं ग्यारह प्रदोष के दिन रुद्राभिषेक करना चाहिए। मंगल और रुद्राक्ष: मंगल ग्रह जनित गर्भ दोष, गर्भ संबंधी पीड़ा एवं रोगों से मुक्ति के लिए अठारहमुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए।



मंगल विशेषांक   आगस्त 2007

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