राष्ट्रपति चुनाव : गद्दी किसके हाथ

राष्ट्रपति चुनाव : गद्दी किसके हाथ  

व्यूस : 4846 | आगस्त 2007
राष्ट्रपति चुनाव: गद्दी किसके हाथ आचार्य किशोर दश के सर्वोच्च पद के चुनाव का समय नजदीक आता जा रहा है। अटकलों का बाजार गर्म है। चुनाव मैदान में दो सशक्त उम्मीदवार हैं श्रीमती प्रतिभा पाटिल तथा वर्तमान उपराष्ट्रपति श्री भैरों सिंह शेखावत। 19 जुलाई को होने वाले इस चुनाव में विजयश्री किसे मिलेगी प्रस्तुत है इस विषय पर एक विस्तृत ज्योतिषीय विश्लेषण। श्रीमती प्रतिभा पाटिल वर्तमान परिस्थिति में दूसरों के भाग्य से अधिक बलवान हैं क्योंकि यू. पी. ए. सरकार की तरफ से राष्ट्रपति का चुनाव लड़ रही हैं। 19 जुलाई 2007 को उनकी बुध की महादशा, मंगल की अंतर्दशा, गुरु की प्रत्यंतरदशा और बुध की सूक्ष्म दशा आरंभ होगी। उस दिन गोचर में चंद्र लग्न से सप्तम में गुरु और बुध लग्न में मंगल लग्न से एकादश स्थान में शुभ स्थिति में चलन करेंगे। मिथुन लग्न के लिए शुक्र व बुध योगकारक ग्रह हैं। उस दिन के गोचर की स्थिति के अलावा लग्न कुंडली में भी ग्रह अच्छी स्थिति में हैं और परिस्थिति के मुताबिक उनके पक्ष में बहुमत भी है। यदि बहुमत को छोड़ दिया जाए, तो शेखावत जी की कुंडली इनसे अधिक बलवान है। इसलिए दोनों में कड़ा संघर्ष होगा। किसके पक्ष में कौन है, कहना कठिन है। फिर भी प्रतिभा की जीत की संभावना अधिक है। भारत की जन्म कुंडली में वर्तमान समय में शुक्र की महादशा चल रही है जो उनके लिए शुभ है। सोनिया गांधी का समर्थन भी उन्हें प्राप्त है। उनकी कुंडली में भाग्येश शनि भाग्य स्थान में दशमेश गुरु की दृष्टि में है और चंद्र से गुरु छठे में, बुध सप्तम में, शुक्र अष्टम में चंद्र लग्नाधि राजयोग बना रहे हैं। चंद्र लग्न से भाग्य एवं कर्मेश शनि पर गुरु की तथा उच्च राशि में चंद्र पर लग्नेश बुध की दृष्टि के फलस्वरूप भी राजयोग बन रहा है। बुध की महादशा चल रही है जो 14.10.2015 तक चलेगी। गोचर में शनि लग्न से पराक्रम स्थान में चलन करेगा और भाग्य स्थान को देखेगा। इन सब प्रभावों के कारण प्रतिभा भारत के सर्वोच्च पद तक पहुंच सकती हंै। दूसरी तरफ माननीय उपराष्ट्रपति श्री शेखावत जी की वर्तमान समय में बुध की महादशा, चंद्र की अंतर्दशा, शनि की प्रत्यंतर दशा और राहु की सूक्ष्म दशा 17.7.2007 से 19.7.2007 तक चलेगी। बुध की महादशा, चंद्र की अंतर्दशा और शनि की प्रत्यंतर दशा उनके लिए शुभ रहेगी परंतु चुनाव के दिन अर्थात 19 जुलाई 2007 को राहु की सूक्ष्म दशा शुभ फल नहीं दे सकती क्योंकि जन्म कुंडली में राहु द्वितीय भाव में है। नवांश में भी सही स्थान में है परंतु गोचर में राहु लग्न से अष्टम भाव में शनि की दृष्टि में रहेगा, किसी शुभ ग्रह की दृष्टि में नहीं। इसलिए उन्हें विजय मिलने में क.ि ठनाई आ सकती है। परंतु गोचर में कुंडली का योगकारक ग्रह मंगल लग्न से दशम भाव में और लग्नेश चंद्र लग्न से तीसरे भाव में होगा। सूर्य लग्न में होगा और शनि, शुक्र व केतु सिंह राशि में होंगे। राहु पर शनि, शुक्र व केतु की दृष्टि रहेगी किंतु गुरु की दृष्टि न राहु पर पड़ेगी न दशम भाव पर। पापी ग्रह का प्रभाव कुंडली पर रहेगा। इसलिए 19 जुलाई 2007 का दिन उन्हें शुभ फल देने में असमर्थ रहेगा। इस पद के लिए नवमेश व दशमेश का संबंध 19 जुलाई के दिन होना चाहिए। दशमेश मंगल उस दिन भाग्येश गुरु को और गुरु भाग्य स्थान को भाग्येश होकर देख रहा है किंतु कर्मेश मंगल पर भाग्येश की दृष्टि नहीं है। इसलिए उन्हंे बलवान करने के लिए यदि यज्ञ अनुष्ठान करवाया जाए, तो विजय संभव है अन्यथा मुश्किल। भारत की जन्मपत्री में शुक्र की महादशा चल रही है, जो एक स्त्री ाचंग्रह है, इसलिए भारत के सर्वोच्च पद के लिए एक स्त्री को सफलता मिलना स्वाभाविक है। देखा जाए तो सत्ता की बागडोर श्रीमती सोनिया गांधी के हाथों में है। इससे स्पष्ट है कि श्रीमती प्रतिभा पाटिल, सोनिया गांधी के समर्थन से लड़ रही हैं। फिर भी शख्े ाावत जी का े हराना इतना आसान नहीं होगा क्योंकि उनकी दशमांश कुंडली में ग्रह स्थिति बहुत बलवान है। मंगल, चंद्र और बुध केंद्र में और एकादश स्थान में हैं। शुक्र उच्च का द्वादश स्थान में विराजमान है। केवल राहु को छोड़कर बाकी ग्रह उन्हें भारत के सर्वोच्च पद पर ले जा सकते हैं। परंतु राजनीतिक दृष्टि से श्रीमती प्रतिभा पाटिल की स्थिति मजबूत है। सोनिया गांधी का प्रभुत्व एवं उनकी मजबूत गठबंधन सरकार का बहुमत उनके पक्ष में है। इस तरह ज्योतिषीय विश्लेषण के अनुसार प्रतिभा पाटिल का पक्ष भारी पड़ रहा है।

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