सम्मोहन उपचार

सम्मोहन उपचार  

सम्मोहन उपचार जे. पी. मलिक गत महीने अनेकों पाठकों ने सम्मोहन की उपयोगिता के बारे में काफी जानकारी मांगी है। आशा है, इस अंक में दी गई जानकारी आपके लिए उपयोगी रहेगी। प्रश्न: सम्मोहन उपचार की पद्धति क्या होती है? उत्तर: हम सभी के मन में प्रकृति द्वारा दी गई एक अनूठी शक्ति निहित है जिसका प्रयोग हम अपने व्यवहार में बदलाव लाने के लिये कर सकते हैं। सम्मोहन का प्रयोग उन सभी पहलुओं के लिए किया जाता है जो कि परोक्ष रूप से हमारी चेतना द्वारा नियंत्रित नहीं किये जाते हैं अर्थात् हमारे व्यवहार के वे सभी पहलू जो अवचेतन मन द्वारा संचालित किये जाते हैं। अतः सर्वप्रथम सम्मोहन के माध्यम से अवचेतन मन को जागृत किया जाता है। फिर उपचार हेतु मन को प्रोग्राम किया जाता है जिसमें सुझाव और कल्पनाओं का प्रयोग होता है। इसे अवचेतन मन एक नई वास्तविकता के रूप में स्वीकार कर लेता है। जो क्रियायें चेतन मन के कार्य क्षेत्र में आती है उन पर अवचेतन मन ही कार्यप्रभावी रहता है। उदाहरण के लिये पीड़ा या दर्द अवचेतन मन द्वारा नियंत्रित किया जाता है। अगर हम पूर्ण चेतना में दर्द नियंत्रण करना चाहें तो बहुत कठिन होता है जबकि सम्मोहित अवस्था में दर्द को बड़ी आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। इसी प्रकार अन्य उपचार हेतु भी सम्मोहन अवस्था प्रभावकारी रहती है। प्रश्न: सम्मोहन का वैज्ञानिक आधार क्या है? उत्तर: सम्मोहन अवस्था का वैज्ञानिक आधार पर आकलन किया जा सकता है। हमारे मस्तिष्क में हमेशा ब्रेनवेव चलती रहती है। इन ब्रेनवेव के आधार पर अर्थात इनकी गति के आधार पर यह पता लगाया जा सकता है कि व्यक्ति जागृत, सम्मोहित या नींद की अवस्था में है। जागृत अवस्था में बीटा, नींद की अवस्था में डेल्टा और सम्मोहन की अवस्था में अल्फा या बीटा ब्रेनवेव होती है। इनके जानने के लिए वैज्ञानिक उपकरण मौजूद हैं। सम्मोहन की अवस्था प्राप्त होते ही ब्रेनवेब के साथ-साथ और भी कई शारीरिक परिवर्तन होते हैं जैसे शरीर के तापमान में बदलाव, नाड़ी के चलने की गति में बदलाव, सांस लेने की गति और त्वचा पर पसीने की मात्रा में भी बदलाव होता है। इन सभी के साथ-साथ शरीर में परोक्ष रूप से दिखने वाले अनेक परिवर्तन आते हैं। इन सभी ने वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर बड़ी आसानी से सम्मोहन की अवस्था का पता लगाया जा सकता है। प्रश्न: क्या सम्मोहन से पूर्ण व पक्का इलाज हो जाता है? उत्तर: इंसानी व्यवहार में यह काफी प्रचलित है कि जिस बात की गारंटी दी जाये, वह आसानी से मान ली जाती है। लेकिन हमारा व्यवहार एक परिस्थिति या एक वातावरण में होता है। सम्मोहन व्यक्ति के मन के साथ कार्य करता है न कि वातावरण के साथ। वातावरण की कुछ ही बातें हंै जिन्हें हम नियंत्रित कर सकते हैं। पूरा वातावरण आमतौर पर हमारे हाथ में नहीं होता है। सम्मोहन के प्रयोग से अपना व्यवहार सुधारा जा सकता है तथा वातावरण के प्रति अपनी अवधारणा सुधारी जा सकती है। वातावरण का बदलना हमेशा संभव नहीं होता है। इस बात को समझने के लिये जैसे बरसात के समय हम छाते का प्रयोग करते हैं। छाता प्रयोग करने से बरसात खत्म नहीं हो जाती बल्कि हमारा शरीर बरसात के प्रभाव से बच जाता है। कुछ इसी तरह से सम्मोहन व निर्देशन भी कार्य करते हैं। अगर हम किसी दूसरी पद्धति से उपचार करवा रहे हैं तो भी साथ-साथ सम्मोहन का भी प्रयोग किया जा सकता है। सम्मोहन के प्रयोग से वह उपचार भी अधिक प्रभावी हो जाता है। प्रश्न: क्या सम्मोहन का प्रयोग किसी और उपचार पद्धति में भी होता है? उत्तर: सम्मोहन का प्रयोग अनेकों उपचार पद्धतियों में किया जाता है। उनमें से कुछ इस प्रकार हैं। इस जीवन के गुजारे हुये दिनों से जोड़कर उपचार पद्धति, प्राचीन जीवन संबंधित उपचार पद्धति, दो जीवन कालों के बीच के समय से संबंधित उपचार पद्धति अवांछित ऊर्जा अथवा भूतप्रेत से निजाम पाना, आध्यात्मिक उपचार, बाल जन्म संबंधित उपचार, दर्द नियंत्रण, सम्मोहन निर्देश इत्यादि अनेकों उपचार पद्धतियां हैं जिनमें सम्मोहन का प्रयोग किया जाता है। प्रश्न: सम्मोहन से क्या-क्या उपचार संभव हैं? उत्तर: वो सभी बातें या आदतें जहां पर मन का प्रभाव होता है वहां पर सम्मोहन भी प्रभावशाली रहता है। हमारा मन बहुत कुछ बनाया करता है और संवारता रहता है। सम्मोहन का प्रयोग दुनिया भर में प्राचीन काल से चला आ रहा है और अब इसका प्रचलन बढ़ रहा है। सम्मोहन का प्रयोग हमारे मूल्य विकास के लिये, मनोरंजन के लिये, आदत सुधारने के लिये व उपचार के लिये किया जाता है। आदत-सुधार जैसे पढ़ाई की आदत, मुंह से नाखून काटना, अंगूठा चूसना, बिस्तर गीला करना, धुम्रपान व मदिरापान करना इत्यादि। मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य जैसे वजन नियंत्रण करना, मानसिक स्वास्थ्य, गुस्सा आना आदि। कार्यक्षमता बढ़ाना जैसे ढोल, स्टेज, पढ़ाई, बिक्री इत्यादि। चिंता घटाना, आत्मविश्वास बढ़ाना, उत्प्रेरणा देना, बाहरी ऊर्जा (भूत-प्रेत) निवारण, शादी से जुड़ी समस्याएं जैसे नपुंसकता, आपसी सहयोग की कमी इत्यादि। डर लगना, भयभीत रहना, भुलक्कड़ स्वभाव, नींद न आना इत्यादि अनेक उपचारों में सम्मोहन का प्रयोग किया जा सकता है। प्रश्न: क्या सम्मोहन उपचार की मात्र एक ही विधि होती है? उत्तर: सम्मोहन से उपचार करने के लिये कई विधियों का उपयोग किया जाता है। किसी भी विधि का निर्धारण कई बातों पर निर्भर करता है जैसे समस्या का प्रकार, व्यक्ति का स्वभाव व व्यवहार इत्यादि। अलग-अलग व्यक्तियों के साथ अलग-अलग विधियों का प्रयोग किया जा सकता है। यहां तक कि एक ही व्यक्ति के साथ उपचार की भिन्न-भिन्न अवस्थाओं में भिन्न-भिन्न विधियों का प्रयोग संभव है। सम्मोहित करने की विधियां भी व्यक्ति के स्वभाव व व्यवहार के अनुसार चुनी जाती है। अतः यह अत्यंत आवश्यक है कि आप उपचार के लिए एक उचित प्रशिक्षित सम्मोहन निर्देशक के पास ही जायें। प्रश्न: क्या मैस्मेरिजम और हिप्नोटिज्म का कोई संबंध है? उत्तर: डाॅ. मैस्मर वियाना के रहने वाले थे। वह उपचार ध्यान की अवस्था में ले जाकर करते थे। उन्होंने इस विद्या का नाम अपने नाम के आधार पर मैस्मेरिज्म रखा था। शायद वे इस प्रकार ध्यान या सम्मोहन का प्रयोग करने वाले पहले डाक्टर थे। उनकी मान्यता थी कि चुंबक इस कार्य में लाभदायक होते हैं। अतः उन्होंने पहले इसका नाम एनिमल मैगनेटिज्म रखा था। बाद में उन्हें एहसास हुआ कि व्यक्ति के मन का इस कार्य में प्रमुख योगदान है। उस वक्त तक हिप्नोनिटिज्म नाम नहीं रखा गया था अतः उन्होंने इसे मैस्मेरिज्म नाम दे दिया। हो सकता है, आधुनिक विकास के आधार पर सम्मोहन की विधियां अलग हो गई हों लेकिन यह तय है कि सम्मोहन व मैस्मेरिज्म दोनों ही, एक ही प्रकार की मन की अवस्था के उपचार हेतु प्रयोग में लाई जाती है। प्रश्न: क्या सम्मोहन त्राटक है? उत्तर: त्राटक मन की दशा बदलने की एक विधि है जो कि ध्यान एकाग्र करने, विचार कम करने और ध्यान की अवस्था को प्राप्त करने के लिये प्रयोग की जाती है। यह केवल अनेक विधियों में से एक विधि है। यह सम्मोहन तो कतई नहीं है। प्रश्न: हम आपसे कैसे संपर्क कर सकते हैं? उत्तर: नीचे दिये गये फोन व पते पर तीन कारणों हेतु संपर्क किया जा सकता है। 1. अधिक जानकारी लेने के लिये 2. उपचार के लिये 3. सम्मोहन सीखने के लिये। हर व्यक्ति जो भाषा समझ सकता है और सुझावों का पालन कर सकता है, सम्मोहन की दशा प्राप्त कर सकता है। कोई भी व्यक्ति जो सामान्य बुद्धि रखता है, वह सम्मोहन आसानी से सीख सकता है। सम्मोहन से उपचार करने के लिये कई विधियों का उपयोग किया जाता है। किसी भी विधि का निर्धारण कई बातों पर निर्भर करता है जैसे समस्या का प्रकार, व्यक्ति का स्वभाव व व्यवहार इत्यादि। अलग-अलग व्यक्तियों के साथ अलग-अलग विधियों का प्रयोग किया जा सकता है। यहां तक कि एक ही व्यक्ति के साथ उपचार की भिन्न-भिन्न अवस्थाओं में भिन्न-भिन्न विधियों का प्रयोग संभव है।



रत्न विशेषांक  मई 2012

फ्यूचर समाचार पत्रिका के रत्न विशेषांक में रत्न चयन व धारण विधि, रत्न: सकारात्मक ऊर्जा स्रोत, नवरत्न, उपरत्न, रत्नों की विविधता, वैज्ञानिक विश्लेषण एवं चिकित्सीय उपादेयता, लग्नानुसार रत्न चयन, ज्योतिषीय योगों से तय करें रत्न चयन, रत्नों की कार्य शौली का उपयोग, बुध रत्न पन्ना, चिकित्सा में रत्नों का योगदान, कई व्याधियों की औषधि है करंज तथा अन्य अनेकानेक ज्ञानवर्द्धक आलेख शामिल किये गए हैं जैसे भविष्यकथन की पद्धतियां, फलित विचार, वास्तु परामर्श, वास्तु प्रश्नोतरी, विवादित वास्तु, यंत्र समीक्षा/मंत्र ज्ञान, हेल्थ कैप्सुल, लाल किताब, ज्योतिष सामग्री, सम्मोहन, सत्यकथा, स्वास्थ्य, पावन स्थल, क्या आप जानते हैं? आदि विषयों को भी शामिल किया गया है।

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