एक थी आरुषि - भाग - 2

एक थी आरुषि - भाग - 2  

फ्यूचर समाचार के जुलाई 2008 अंक में ‘एक थी आरुषि’ नाम से आरुषि हत्या कांड से जुड़ी सभी जन्मकुंडलियों का विस्तृत विश्लेषण किया गया था। उक्त विश्लेषण के क्रम में अब इस भाग दो में इस मामले में आगे की संभावनाओं का ज्योतिषीय विश्लेषण किया गया है। आरूषि हत्याकांड से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जन्मकुंडलियों के विस्तृत विश्लेषण में हमने पाया था कि आरुषि और उसके माता, पिता की कुंडलियों में लग्नेश व शुभ ग्रह केंद्र में नहीं थे। पाप ग्रह केंद्र स्थानों में बैठे थे और शुभ ग्रह षष्ठ, अष्टम तथा द्वादश भावों में स्थित थे। गुरु और चंद्र की स्थिति विशेषकर तीनों कुंडलियों में अत्यंत कमजोर थी। दोनों ग्रह मन और बुद्धि के कारक हैं तथा व्यक्ति की मानसिक व आत्मिक स्थिति का अवलोकन कराते हैं। दो वर्ष पहले तलवार दंपति पुलिस के शक के दायरे में थे और राजेश तलवार को कई मास जेल में रखने के पश्चात उन्हें छोड़ दिया गया और केस सी. बी. आई को सौंप दिया गया। सी. बी. आई. की विशेष अदालत ने पूरी तहकीकात के बाद तलवार दंपति को एक बार फिर मुख्य आरोपी ठहराया है और उन्हें अभियुक्त मानते हुए अब उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल होगी। अदालत के अनुसार तलवार दंपति के खिलाफ जो भी परिस्थितिजन्य साक्ष्य हैं वे उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने के लिए पर्याप्त हैं। तलवार दंपति के खिलाफ शक के कई कारण है। जैसे 1. कत्ल की रात इंटरनेट का सुबह 3ः 34 तक सक्रिय रहना। 2. आरूषि के कमरे को जल्दबाजी में साफ कराना तथा तथ्यों को मिटाने की कोशिश करना। 3. आरूषि के कमरे की चाभी का ठीक जगह पर न मिलना। 4. आरूषि के शव का सिलवट वाली चादर से ढका होना आदि। 5. छत के दरवाजे पर खून के धब्बों का मिलना। वैसे तो ये सभी साक्ष्य काफी कमजोर हैं और इन साक्ष्यों के आधार पर तलवार दंपति को कातिल नहीं ठहराया जा सकता, पर तलवार दंपति पर फिर से कातिल होने का कलंक क्यों लगा और उन पर यह गाज क्यों गिरी, यह हम ज्योतिष के आइने से देखेंगे। आरुषि के पिता राजेश की कुंडली का विश्लेषण: राजेश की कुंडली के अनुसार उसकी गुरु में केतु की अंतरदशा व गुरु की प्रत्यंतरदशा चल रही है। गुरु पंचमेश और मारकेश होकर षष्ठ भाव में बैठे हैं और शनि और केतु की पूर्ण दृष्टि में है। 9 फरवरी 2011 को कोर्ट ने तलवार दंपति को अपनी बेटी की हत्या का आरोपी करार दिया। उस दिन गोचर में गुरु चंद्र से तीसरे भाव में तथा जन्मस्थ गुरु से व्यय भाव अर्थात् द्वादश में स्थित थे तथा केतु लग्न से अष्टम भाव में राहु और शुक्र पर गोचर कर रहे थे। और गोचरस्थ शनि की दशम दृष्टि में भी थे। अर्थात् गोचर में दोनों ही ग्रह प्रतिकूल स्थिति में हैं और आने वाले समय में भी मई 2011 के बाद केतु चंद्र से पंचम तथा लग्न से सप्तम मारक भाव में सूर्य के ऊपर गोचर करेंगे। अतः स्थिति में सुधार होने में संदेह ही नजर आता है। राजेश की कुंडली में पूर्ण कालसर्प दोष भी है। इसीलिए जन्मस्थ राहु और केतु पर गोचर के केतु और राहु ने प्रतिकूल प्रभाव दिखाया और एक बार फिर वह अपनी ही बेटी की हत्या के शक के घेरे में आ गये। जुलाई 2011 के पश्चात गुरु में शुक्र की अंतरदशा आएगी। शुक्र गुरु के शत्रु होते हुए लग्न से अष्टम भाव में राहु के साथ बैठ कर दूषित हो रहे हैं और वैसे भी कुंडली में सप्तमेश व द्वादशेश होकर अकारक हो गये हैं। इसलिए शुक्र की अंतर्दशा में भी अनुकूल परिणाम मिलने की उम्मीद कम नजर आती है। अभी कोर्ट की कार्यवाही में समय लग सकता है और दोषी भी साबित हो सकते हैं। परंतु चूंकि राजेश की कुंडली में विपरीत राज योग है अर्थात षष्ठाधिपति मंगल छठे भाव में, अष्टमाधिपति बुध छठे में तथा द्वादशेश शुक्र आठवे में है इसलिए भविष्य में आने वाली सूर्य, चंद्र और मंगल की अंतरदशाएं इनके लिए अनुकूल साबित होगी और यदि वे सुप्रीम कोर्ट तक जाते हैं तो फैसला उनके हक में हो सकता है क्योंकि इन्हंे लग्नाधिपति राज योग भी मिल रहा है। राजेश की कुंडली में प्राकृतिक शुभ ग्रह गुरु, शुक्र और बुध लग्न से छठे व आठवें भाव में स्थित हैं चूकि प्राकृतिक पाप ग्रह मंगल और राहु भी साथ है इसलिए कोर्ट के चक्कर में पड़ना पड़ा। आरूषि की मां नूपुर की कुंडली का विश्लेषण नुपूर की कुंडली के अनुसार इनकी शनि में केतु की अंतरदशा चल रही है शनि नुपूर की कुंडली में स्टेशनरी अर्थात् स्तंभित है। इसलिए भाग्येश होकर भी शनि ने अच्छे परिणाम नहीं दिए हैं। वर्तमान समय में शनि अष्टमेश व नवमेश होकर सुख स्थान में स्थित मंगल के ऊपर गोचर कर रहे हैं और केतु लग्न भाव मे सूर्य के ऊपर तथा चंद्र से द्वितीय भाव में गोचरस्थ है और शनि की दशम दृष्टि में भी है। गोचरस्थ राहु भी चंद्र से अष्टम भाव में स्थित है जो प्रतिकूल रूप से नूपूर के जीवन को प्रभावित कर रहे हैं और नुपूर की घर गृहस्थी को पूर्णरूप से तितर-बितर कर दिया है। इसके अतिरिक्त सुख भाव के स्वामी बुध भी अत्यंत कमजोर अवस्था में 0 अंश के हो कर मारक स्थान में बैठे हैं। स्त्री जातक में यदि सुख भाव का स्वामी दुर्बल हो और सुख भाव में पाप ग्रह हो तो सुख का नाश कर देता है। यही नुपूर के साथ हो रहा है। दिसंबर 2011 के पश्चात नुपूर की शनि में शुक्र की अंतरदशा प्रारंभ हो जाएगी जो नुपूर के लिए अनुकूल सिद्ध हो सकती है क्योंकि शुक्र और शनि दोनों ही बलहीन हैं। कालिदास द्वारा रचित उत्तर कालामृत में उन्होंने लिखा है कि यदि शुक्र और शनि की दशा अंतरदशा में दोनों बली हों तो निष्कृष्ट फल तथा बलहीन हो तो उत्कृष्ट फल मिलता है। इसलिए नुपूर को 2011 के पश्चात उच्चतम न्यायालय से राहत मिल सकती है।


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