भगवान श्री राम के अनेकानेक नाम

भगवान श्री राम के अनेकानेक नाम  

व्यूस : 21034 | अप्रैल 2008
भगवान श्री राम के अनेकानेक नाम डा. भगवान सहाय श्रीवास्तव श्री राम - जिनमें योगीजन रमण करते हैं। रामचन्द्र - चंद्र के समान आनन्दमय एवं मनोहर राम। रामभद्र - कल्याणमय राम। शाश्वत - सनातन भगवान। राजीवलोचन - कमल के समान नेत्रों वाले। श्रीमान् राजेन्द्र - श्री सम्पन्न राजाओं के भी राजा (चक्रवर्ती सम्राट) । रघुपुंगव - रघुकुल में सर्वश्रेष्ठ। जानकी वल्लभ - जनक किशोरी सीता के प्रियतम। जैत्र - विजयशील जितामित्र - शत्रुओं को जीतने वाले। जनार्दन - सभी मनुष्यों द्वारा याचना करने योग्य। विश्वामित्र प्रिय - विश्वामित्र जी के प्रिय। दान्त - जितेन्द्रिय। शरण्यत्राण तत्पर -- शरणागतों के रक्षक। बालि प्रमथन - बालि नामक वानर को मारने वाले। वाग्मी - अच्छे वक्ता । सत्यवाक् - सत्यवादी। सत्यविक्रम - सत्यपराक्रमी। सत्यव्रत - सत्य का दृढ़तापूर्वक पालन करने वाले। व्रतफल - सभी व्रतों के प्राप्त होने योग्य फल स्वरूप। सदाहनुमद्राश्रय -- हनुमान जी के आश्रय अथवा हनुमान जी के हृदय कमल में सदा निवास करने वाले। कौशलेय - कौशल्या जी के पुत्र। खरध्वंसी - खर नामक राक्षस का नाश करने वाले। विराधवध पंडित - विराध नामक दैत्य का वध करने में कुशल। विभीषण परित्राता - विभीषण के रक्षक। दशग्रीव शिरोहर - दशशीश रावण के मस्तक काटने वाले। हरकोदण्ड खण्डन - जनकपुर में शिवजी के धनुष को तोड़ने वाले। जामदग्न्य महादर्पदलन - परशुराम जी के महा अभिमान को चूर्ण करने वाले। ताडकान्तकृत - ताड़का नामक राक्षसी का वध करने वाले। वेदान्तर - वेदांत के पारंगत विद्वान अथवा वेदांत से भी अतीत वेदात्मा - वेदस्वरूप। भवबन्धैक भेषज - संसार बंधन से मुक्त करने के एक मात्र औषधरूप। दूषण त्रिशिरोडरि - दूषण और त्रिशिरा नामक राक्षसों के शत्रु। त्रिमूर्ति - ब्रह्मा, विष्णु और महेश - तीन रूप धारण करने वाले। त्रिगुण - त्रिगुण स्वरूप अथवा तीनों गुणों के आश्रय। त्रयी - तीन वेदस्वरूप त्रिविक्रम - वामन अवतार में तीन पगों से समस्त त्रिलोकी नाप लेने वाले। त्रिलोकात्मा - तीनों लोकों की आत्मा। पुण्यचारित्र कीर्तन - जिनकी लीलाओं का कीर्तन परम पवित्र है। त्रिलोकरक्षक - तीनों लोकों की रक्षा करने वाले। धन्वी - धनुष धारण करने वाले। दंडकारण्य वासकृत - दंडकारण्य में निवास करने वाले। अहल्या पावन - अहल्या को पवित्र करने वाले। जितेन्द्रिय - इन्द्रियों को काबू में स डा. भगवान सहाय श्रीवास्तव, इलाहाबाद श्री राम - जिनमें योगीजन रमण करते हैं। रामचन्द्र - चंद्र के समान आनन्दमय एवं मनोहर राम। रामभद्र - कल्याणमय राम। शाश्वत - सनातन भगवान। राजीवलोचन - कमल के समान नेत्रों वाले। श्रीमान् राजेन्द्र - श्री सम्पन्न राजाओं के भी राजा (चक्रवर्ती सम्राट) । रघुपुंगव - रघुकुल में सर्वश्रेष्ठ। जानकी वल्लभ - जनक किशोरी सीता के प्रियतम। जैत्र - विजयशील जितामित्र - शत्रुओं को जीतने वाले। जनार्दन - सभी मनुष्यों द्वारा याचना करने योग्य। विश्वामित्र प्रिय - विश्वामित्र जी के प्रिय। दान्त - जितेन्द्रिय। शरण्यत्राण तत्पर -- शरणागतों के रक्षक। बालि प्रमथन - बालि नामक वानर को मारने वाले। वाग्मी - अच्छे वक्ता । सत्यवाक् - सत्यवादी। सत्यविक्रम - सत्यपराक्रमी। सत्यव्रत - सत्य का दृढ़तापूर्वक पालन करने वाले। व्रतफल - सभी व्रतों के प्राप्त होने योग्य फल स्वरूप। सदाहनुमद्राश्रय -- हनुमान जी के आश्रय अथवा हनुमान जी के हृदय कमल में सदा निवास करने वाले। कौशलेय - कौशल्या जी के पुत्र। खरध्वंसी - खर नामक राक्षस का नाश करने वाले। विराधवध पंडित - विराध नामक दैत्य का वध करने में कुशल। विभीषण परित्राता - विभीषण के रक्षक। दशग्रीव शिरोहर - दशशीश रावण के मस्तक काटने वाले। हरकोदण्ड खण्डन - जनकपुर में शिवजी के धनुष को तोड़ने वाले। जामदग्न्य महादर्पदलन - परशुराम जी के महा अभिमान को चूर्ण करने वाले। ताडकान्तकृत - ताड़का नामक राक्षसी का वध करने वाले। वेदान्तर - वेदांत के पारंगत विद्वान अथवा वेदांत से भी अतीत वेदात्मा - वेदस्वरूप। भवबन्धैक भेषज - संसार बंधन से मुक्त करने के एक मात्र औषधरूप। दूषण त्रिशिरोडरि - दूषण और त्रिशिरा नामक राक्षसों के शत्रु। त्रिमूर्ति - ब्रह्मा, विष्णु और महेश - तीन रूप धारण करने वाले। त्रिगुण - त्रिगुण स्वरूप अथवा तीनों गुणों के आश्रय। त्रयी - तीन वेदस्वरूप त्रिविक्रम - वामन अवतार में तीन पगों से समस्त त्रिलोकी नाप लेने वाले। त्रिलोकात्मा - तीनों लोकों की आत्मा। पुण्यचारित्र कीर्तन - जिनकी लीलाओं का कीर्तन परम पवित्र है। त्रिलोकरक्षक - तीनों लोकों की रक्षा करने वाले। धन्वी - धनुष धारण करने वाले। दंडकारण्य वासकृत - दंडकारण्य में निवास करने वाले। अहल्या पावन - अहल्या को पवित्र करने वाले। जितेन्द्रिय - इन्द्रियों को काबू में रखने वाले। जितक्रोध - क्रोध को जीतने वाले। जीतलोभ - लोभ-लालच की वृŸिा को समाप्त करने वाले। जगद्गुरु - समस्त मानव जाति के गुरु। ऋक्षवानर संघाती - वानर और भालुओं की सेना का संगठन करने वाले। चित्रकूट समाश्रय - वनवास के समय चित्रकूट पर्वत पर निवास करने वाले। जयन्तत्राणवरद - जयन्त के प्राणों की रक्षा करके उसे वर देने वाले। सुमित्रापुत्र सेवित - सुमित्रानंदन लक्ष्मण के द्वारा सेवित। सर्वदेवाधि देव - सभी देवताओं के अधिदेवता। मृतवानर जीवन - मरे हुए वानरों को जीवित करने वाले। मायामारीचहंता - मायामय मृग रूपी मारीच नामक राक्षस का वध करने वाले। महाभाग - महान सौभाग्यशाली। महाभुज - बड़ी-बड़ी भुजाओं वाले। सर्वदेवस्तुत - देवतागण जिनकी स्तुति करते हैं। सौम्य - शांत स्वभाव। ब्रह्मण्य - ब्राह्मणों के हितैषी। मुनिसत्तम् - मुनियों में श्रेष्ठ। महायोगी - सभी योगों के अनुष्ठायी होने के कारण महान योगी। महोदार -- परम उदार। सुग्रीव स्थिर राज्यद - सुग्रीव को स्थिर राज्य प्रदान करने वाले। सर्वपुण्याधिकफल - समस्त पुण्यों के उत्कृष्ट फलरूप। स्मृत सब विनाशन - स्मरण करने मात्र से ही सम्पूर्ण पापों का नाश करने वाले। आदिपुरुष - ब्रह्माजी को भी उत्पन्न करने के कारण सबके आदिभूत अंतर्यामी परमात्मा। महापुरुष - समस्त पुरुषों में महान। परम पुरुष - सर्वोत्कृष्ट पुरुष। पुण्योदय - पुण्य को प्रकट करने वाले। महासार - सर्वश्रेष्ठ सारभूत परमात्मा। पुराण पुरुषोŸाम - पुराण प्रसिद्ध क्षर अक्षर पुरुषों में श्रेष्ठ लीला पुरुषोŸाम स्मितवक्त्र - जिनके मुख पर सदा मुस्कान की छटा छायी रहती है। मितभाषी - कम बोलने वाले। पूर्वभाषी - पूर्व वक्ता। राघव - रघुकुल में अवतीर्ण। अनन्त गुण गम्भीर - अनन्त कल्याण मय गुणों से युक्त एवं गम्भीर। धीरोदात्त गुणोŸार - धीरोदात्त नायक के लोकोŸार गुणों से युक्त। माया मानुष चरित्र - अपनी माया का आश्रय लेकर मनुष्यों जैसी लीलाएं करने वाले। महादेवाभि पूजित - भगवान शंकर के द्वारा पूजित। सेतुकृत - समुद्र पर पुल बांधने वाले। जितवारीश - समुद्र को जोतने वाले। सर्वतार्थमय - सर्वतीर्थ स्वरूप। हरि - पाप ताप को हरने वाले। श्यामांग - श्याम विग्रह वाले। सुंदर - परम मनोहर। शूर - अनुपम शौर्य से संपन्न वीर। पीतवासा - पीतांबरधारी। धनुर्धर -- धनुष धारण करने वाले। सर्वयज्ञाधिप - संपूर्ण यज्ञों के स्वामी यज्ञ - यज्ञस्वरूप जरामरण वर्जित - बुढ़ापा और मृत्यु से रहित। शिवलिंग प्रतिष्ठाता - रामेश्वर नामक ज्योतिर्लिंग की स्थापना करने वाले। सर्वाधगण वर्जित - समस्त पाप राशि से रहित। परमात्मा - परमश्रेष्ठ, नित्य शुद्ध, बुद्ध मुक्तस्वभाव। परब्रह्म - सर्वोत्कृष्ट, सर्वव्यापी एवं सर्वाधिष्ठान परमेश्वर। सच्चिदानन्द विग्रह - सत चित और आनन्द ही जिनके स्वरूप का निर्देश कराने वाला है, ऐसे परमात्मा अथवा सच्चिदानन्दमय दिव्य विग्रह। परम ज्योति - परम प्रकाशमय, परम ज्ञानमय। परम धाम - सर्वोत्कृष्ट तेज अथवा साकेत धाम स्वरूप। पराकाश - त्रिपाद विभूति में स्थित परव्योम नामक बैकुण्ठधाम रूप, महाकाशस्वरूप ब्रह्म। परात्पर - पर-इन्द्रिय, मन, बुद्धि आदि से भी परे परमेश्वर। परेश - सर्वोत्कृष्ट शासक। पारग - सबको पार लगाने वाले अथवा मायामय जगत् की सीमा से बाहर रहने वाले। पार - सबसे परे विद्यमान अथवा भवसागर से पार जाने की इच्छा रखने वाले प्राणियों के प्राप्तव्य परमात्मा। सर्वभूतात्मक - सर्वभूतस्वरूप। शिव - परम कल्याणमय।

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श्री राम विशेषांक  अप्रैल 2008

श्री राम की जन्म तिथि, समय एवं स्थान तथा अस्तित्व से संबंधित कथा एवं साक्ष्य, श्री रामसेतु एवं श्री राम का संबंध, श्री राम द्वारा कृत –कृत्यों का विवेचन, श्री राम की जन्म पत्री का उनके जीवन से तुलनात्मक विवेचन, श्री राम की वन यात्रा स्थलों का विस्तृत वर्णन

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