पुरुषोतम श्रीराम की कुंडली का विवेचन

पुरुषोतम श्रीराम की कुंडली का विवेचन  

श्रीराम का जन्मकाल डाॅण् गीता शर्माए कांकेर लिए यह समझना भी आवश्यक है कि ब्रह्माजी की आयु कितनी हैघ् मानव के 360 दिनों का एक साल होता है और यह एक साल देवताओं का एक दिव्य दिन होता है। ऐसे 360 दिव्य दिनों का एक वर्ष होता है। सतयुगए त्रेताए द्वापर और कलियुग की सम्मिलित अवधि 12000 ;बारह हजारद्ध दिव्य वर्षों की होती है अर्थात् 12000ग360त्र43 लाख 20 हजार। और प्रत्येक युग जितने हजार दिव्य वर्षों की अवधि का होता है उससे दोगुना सौ दिव्य वर्षों का संधिकाल भी होता है। इस गणना को इस प्रकार समझा जा सकता है। जब चारों युग 1000 ;एक हजारद्ध बार बीत जाते हैं तब ब्रह्माजी का एक दिन होता है। यह ब्रह्माजी का एक दिन ही एक कल्प कहलाता है। 43 लाख 20 हजार ग 1000 त्र 4 अरब 32 करोड़ मानवीय वर्षों का ब्रह्माजी का एक दिन होता है और इस अवधि को 14 मत्वंतरों में बांटा गया है। 6 मत्वंतर बीत चुके हैंए 7 वें मत्वंतर में आगे 27 बार चारों युग बीत गए हैं। अब 28 वें कलियुग के 5107 वें वर्ष में हम सब हैं। अतः हम कह सकते हैं कि 52 वीं शताब्दी में हैं। इस तरह भारत शेष विश्व से 31 वीं शताब्दी आगे चल रहा है। उक्त गणनाओं के आधार पर श्रीराम का जन्म 24 वें त्रेता युग में हुआ था। इसके बाद 25ए 26ए 27 युगाब्द बीते एवं 28 वें युगाब्द के कलियुग के प्रथम चरण के 5107 वर्ष बीत चुके हैं। अतः विक्रम संवत् 2062 तक श्रीराम के जन्म के 1 करोड़ 81 लाख 49 हजार 107 वर्ष पूरे हो चुके थे। 24 वें त्रेता में ;द्वापरएकलियुगद्ध. 2960010 वर्ष 25ए 26ए 27 वें युगाब्द ;चतुर्युगद्ध में.12960000 वर्ष 28 वें कलियुग में 5107 वर्ष श्री राम जन्म 1ए81ए49ए107 वर्ष वर्तमान विक्रम संवत 2065 ;अप्रैलद्ध में चैत्र राम नवमी को उनके जन्म के 1ए81ए49ए110 वर्ष हो जाएंगे। युग युगावधि संधिकाल पूर्ण युगावधि सतयुग 4000 वर्ष 800 वर्ष 4800 वर्ष त्रेता 3000 वर्ष 600 वर्ष 3600 वर्ष द्वापर 2000 वर्ष 400 वर्ष 2400 वर्ष कलि 1000 वर्ष 200 वर्ष 1200 वर्ष 10ए000 वर्ष 2000 वर्ष 12000 दिव्य वर्ष



श्री राम विशेषांक  अप्रैल 2008

श्री राम की जन्म तिथि, समय एवं स्थान तथा अस्तित्व से संबंधित कथा एवं साक्ष्य, श्री रामसेतु एवं श्री राम का संबंध, श्री राम द्वारा कृत –कृत्यों का विवेचन, श्री राम की जन्म पत्री का उनके जीवन से तुलनात्मक विवेचन, श्री राम की वन यात्रा स्थलों का विस्तृत वर्णन

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