भूखंड वास्तु

भूखंड वास्तु  

व्यूस : 3618 | आगस्त 2013
प्रश्न- वास्तु में बढ़े हुए भूखंड को कैसे ठीक किया जाता है? उत्तर -किसी भी आवासीय,व्यावसायिक या औद्योगिक भूखंड का उत्तर-पूर्व दिशा को छोड़कर किसी भी दिशा में बढ़ा हुआ होना अच्छा नहीं होता। खासकर South-West मं बढ़ा होना महापातकी, दरिद्रता, कर्ज एवं दुर्घटना आदि का कारक होता है। इस प्रकार के दोष के निराकरण के लिए पिरामिड की दीवार बना कर भूखंड के नीचे लगाना चाहिए ताकि भूखंड आयताकार या वर्गाकार बन जाए। इन पिरामिडों की एक से दूसरे की दूरी अधिक से अधिक तीन फुट रखनी चाहिए प्रश्न- ब्रह्म स्थान को पिरामिड के द्वारा किस प्रकार ठीक किया जाता है? उत्तर-किसी भी व्यावसायिक एवं औद्योगिक परिसर के ब्रह्म स्थान को ठीक रखना आवश्यक है क्योंकि वास्तु में ब्रह्म स्थल को हृदय माना जाता है। व्यावसायिक एवं औद्योगिक परिसर के ठीक बीचोंबीच खम्भा, पीलर या किसी भी प्रकार का वजन रखना अच्छा नहीं होता। ऐसा करने से व्यावसायिक एवं औद्योगिक विकास में गतिरोध होता है। इस स्थान पर दोष रहने पर लाख प्रयत्न के बावजूद विकास नहीं हो पाता। उद्योग-धंधे ठीक ढंग से कार्य नहीं कर पाते जिसके फलस्वरूप बंदी के कगार पर चले जाते हैं। उस स्थान पर सुख-समृद्धि एवं शांति खत्म हो जाती है, दिवालियापन की स्थिति बन जाती है, भाग्य सो जाता है तथा सारा परिश्रम व्यर्थ हो जाता है। अतः इस स्थल को ऊर्जामय बनाए रखने के लिए नौ मल्टीयर पिरामिड को ब्रह्म स्थान पर लगाना लाभप्रद होता है।बह्म स्थान पर खम्भा या पीलर रहने पर इसके लिए खंभे के चारों ओर आठ पिरामिड लगाएं जिससे यह स्थान दोषरहित होकर उद्योग धंधे को प्रगति के पथ पर ले जाता है। सफलताएं कदम चूमने लगती हैं तथा लोकप्रियता बढ़ती है। प्रश्न- जमीन के सतह के ढाल का सुधार किस प्रकार करना चाहिए? उत्तर-वास्तु में जमीन की ढाल उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व की ओर होनी चाहिए। इससे जीवन में सुख समृद्धि बनी रहती है तथा लक्ष्मी का स्थिर वास होता है। दक्षिण-पश्चिम में सतह के ढाल रहने पर कार्यों में गतिरोध एवं परेशानियां बनी रहती हं। व्यावसायिक या औद्योगिक विकास ऐसी जगहों पर पूर्ण रूप से नहीं हो पाता है। यह ढाल दोषपूर्ण हो अर्थात दक्षिण-पश्चिम में नीचा एवं उत्तर-पूर्व में उंचा रहे तो इस दोष को दूर करने के लिए चित्रानुसार पिरामिड लगाएं प्रश्न-ईशान क्षेत्र में बनी हुई सीढ़ी को किस प्रकार दोष रहित बनाया जाता है? उत्तर-ईशान कोण मं सीढी़ आर्थिक तंगी, मानसिक अशांति एवं अन्य विभिन्न प्रकार के कष्टां का कारक होता है। यदि इस स्थान पर हो तो वहां से हटा कर र्नैत्य कोण की ओर ले जाएं। यदि ऐसा संभव नहीं हो तो सीढ़ी के नीचे 9 ग 9 का मैक्स पिरामिड लगाएं। साथ ही तीन पिरामिड प्रथम तीन स्टेप तक लगाएं ताकि ईशान कोण में सीढी़ के वजन से ऊर्जा में आने वाली कमी की पूर्ति की जा सके।

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संकटमोचक हनुमान विशेषांक  आगस्त 2013

फ्यूचर समाचार पत्रिका के संकटमोचक हनुमान विशेषांक में राम भक्त हनुमान के प्राकट्य की कथा, उपदेश, पूजन विधि, ऐश्वर्यदायी साधना के विभिन्न सूत्र, उनके विभिन्न स्वरूप, विभिन्न रूपों की पूजा से दुःख निवारण, प्रमुख तीर्थ स्थलों का परिचय, पूजा साधना के प्रभाव, चक्र आदि ज्ञानवर्धक आलेख सम्मिलित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त उत्तराखंड की त्रासदी, कृष्ण जन्माष्टमी व्रत, श्रावण में क्यों बढ़ जाता है शिव पूजा का महत्व, अंक ज्योतिष के रहस्य, सत्यकथा, पुरूषोत्तम श्री कृष्ण की अमृतवाणी, त्रिक भावों में ग्रहों का फल एवं उपाय, भुखंड वास्तु व सम्मोहन उपचार तथा धार्मिक क्रिया कलाप का वैज्ञानिक महत्व और ऊर्जा क्षेत्र बढाने के साधन व विवादित वास्तु इत्यादि रोचक आलेख भी पत्रिका की शोभा बढ़ाते हैं।

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