व्यवसाय का चुनाव हस्त रेखाओं व् ग्रहों के आधार पर

व्यवसाय का चुनाव हस्त रेखाओं व् ग्रहों के आधार पर  

च नाव शब्द आते ही लगता है जैसे परीक्षा की घड़ी आ गई हो यह चुनाव चाहे व्यवसाय का हो, शादी का हो या फिर किसी अन्य चीज का । जीवन यापन के लिए कैरियर या व्यवसाय का सही चयन एक महत्वपूर्ण विषय है। इस दिशा में उठाया गया सही कदम व्यक्ति को सफलता की बुलंदियों पर ले जा सकता है। अक्सर लोग अपनी रुचि को प्राथमिकता देते हैं। कैरियर का निर्धारण करते समय यदि आप रुचि के साथ-साथ हस्त रेखाओं व ग्रहों की मदद भी लें तो यह आपको सफल बनाने की दृष्टि से काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। हाथ की किन रेखाओं व ग्रहों की स्थिति व्यक्ति को किस व्यवसाय में सफलता दिलाएगी इसका एक विशद विश्लेषण यहां प्रस्तुत है। स मस्तिष्क रेखा दोषमुक्त हो और मंगल ग्रह पर जाती हो, बुध व शनि की स्थिति अच्छी हो और हाथ भारी हो (सख्त या मुलायम हो), तो व्यक्ति को कानून या विज्ञान की शिक्षा लेनी चाहिए। इसके अतिरिक्त यदि बुध की उंगली का नाखून चैरस हो तो व्यक्ति को उक्त विषय से जुड़े व्यवसाय का चयन करना चाहिए। स बुध ग्रह पर तीन या तीन से अधिक खड़ी रेखाएं हों या भाग्य रेखा पहले मोटी और बाद में पतली हो, मस्तिष्क व जीवन रेखाओं का जोड़ लंबा हो, और बुध, चंद्र व मंगल ग्रह उन्नत हों तो व्यक्ति आयुर्वेद या मेडिकल की शिक्षा लेता है। और इससे जुड़े व्यवसाय का चयन करता है। स मस्तिष्क रेखा चंद्र पर जाती हो, 1. गुरु ग्रह व गुरु ग्रह की उंगली 2. शनि ग्रह व शनि की उंगली 3. सूर्य ग्रह व सूर्य की उंगली 4. बुध ग्रह व बुध की उंगली 5. मगंल ग्रह 6. शुक्र ग्रह 7. चंद्र ग्रह 8. हृदय रेखा 9. मस्तिष्क रेखा 10. भाग्य रेखा 11. जीवन रेखा 12. सूर्य रेखा या उसका झुकाव चंद्र की ओर हो, भाग्य रेखा उत्तम और जीवन रेखा गोल हो तथा चंद्र, बुध, गुरु व सूर्य उन्नत हों तो साहित्य या लेखा (एकाउंटस्) की शिक्षा लेना लाभदायक होती है। उक्त रेखाओं व ग्रहों की इस स्थिति वाले लोग साहित्यकार होते हंै। स उंगलियां लंबी हो, मस्तिष्क रेखा विभाजित हो और उसकी एक शाखा या फिर पूरी की पूरी मस्तिष्क रेखा चंद्र पर जाती हो, सूर्य व शनि उŸाम हों, भाग्य रेखा मणिबंध से निकलकर शनि ग्रह तक जाती हो, जीवन रेखा गोल या अधूरी हो और मस्तिष्क रेखा उन्न्ात हो तो व्यक्ति को संगीत पशु पालन या बागवानी को जीवन-यापन आधार बनाना चाहिए। स गुरु प्रधान हो, सूर्य उŸाम हो, जीवन रेखा गोल हो, भाग्य रेखा जीवन रेखा से दूर हो, मस्तिष्क रेखा दोषमुक्त या दोहरी हो तो व्यक्ति आई.ए.एस., पी.सी.एस. जैसी प्रतियोगिता परीक्षाओं में भाग लेता है। हाथ में नौकरी के लक्षण होने पर वह नौकरी भी करता है। स मस्तिष्क रेखा मगंल या उसकी शाखा मंगल पर हो, हाथ भारी हो उंगलियों के आधार बराबर हों और मंगल, चंद्र व बुध उन्न्ात हों तो व्यक्ति कंप्यूटर की शिक्षा लेता है और यदि अन्य कोई दोष न हो तो उसमें सफल होता है। स मस्तिष्क रेखा लंबी हो और चंद्र पर जाती हो, चंद्र उन्न्ात हो, हृदय रेखा का अंत गुरु पर्वत पर हो, भाग्य रेखा नाव शब्द आते ही लगता है जैसे परीक्षा की घड़ी आ गई हो यह चुनाव चाहे व्यवसाय का हो, शादी का हो या फिर किसी अन्य चीज का । जीवन यापन के लिए कैरियर या व्यवसाय का सही चयन एक महत्वपूर्ण विषय है। इस दिशा में उठाया गया सही कदम व्यक्ति को सफलता की बुलंदियों पर ले जा सकता है। अक्सर लोग अपनी रुचि को प्राथमिकता देते हैं। कैरियर का निर्धारण करते समय यदि आप रुचि के साथ-साथ हस्त रेखाओं व ग्रहों की मदद भी लें तो यह आपको सफल बनाने की दृष्टि से काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। हाथ की किन रेखाओं व ग्रहों की स्थिति व्यक्ति को किस व्यवसाय में सफलता दिलाएगी इसका एक विशद विश्लेषण यहां प्रस्तुत है। स मस्तिष्क रेखा दोषमुक्त हो और मंगल ग्रह पर जाती हो, बुध व शनि की स्थिति अच्छी हो और हाथ भारी हो (सख्त या मुलायम हो), तो व्यक्ति को कानून या विज्ञान की शिक्षा लेनी चाहिए। इसके अतिरिक्त यदि बुध की उंगली का नाखून चैरस हो तो व्यक्ति को उक्त विषय से जुड़े व्यवसाय का चयन करना चाहिए। स बुध ग्रह पर तीन या तीन से अधिक खड़ी रेखाएं हों या भाग्य रेखा पहले मोटी और बाद में पतली हो, मस्तिष्क व जीवन रेखाओं का जोड़ लंबा हो, मोटी से पतली हो, बुध की उंगली थोड़ी टेढ़ी व सूर्य की उंगली के ऊपर वाले पर्वत से बड़ी हो, तो व्यक्ति को पत्रकारिता की शिक्षा लेनी चाहिए और उसी को आजीविका का आधार बनाना चाहिए। स शनि की उंगली के बीच का पोर लंबा हो, उंगलियांे के आधार बराबर हों, भाग्य रेखा मोटी से पतली हो या उसका अंत शनि पर्वत पर हो, हृदय रेखा में उंगुलियों के नीचे त्रिकोण हो तो व्यक्ति को ज्योतिष की शिक्षा लेनी चाहिए। स सुंदर, सुडौल, दोषमुक्त और लंबी मस्तिष्क रेखा वाले व्यक्ति का बुध उन्न्ात हो, और उस पर 4 से 5 रेखाएं हों, तो व्यक्ति औषधि के नए-नए आविष्कार करता है। स कठोर हाथ में दोहरी मस्तिष्क रेखा होने पर व्यक्ति उच्च कोटि का ‘दस्तकार’ हो सकता है। हाथ कोमल व मस्तिष्क रेखा दोहरी होने पर व्यक्ति लेखक, राजनीतिज्ञ, जौहरी या वैज्ञानिक हो सकता है। हाथो में कोई उŸाम लक्षण हो, जैसे भाग्य रेखा पतली भावुकता अधिक होती है वह संगीत को भी आजीविका का आधार बना सकता है। स हृदय व मस्तिष्क रेखाएं दोषमुक्त हों, हृदय रेखा पर त्रिकोण हो और हाथ उŸाम हो, तो व्यक्ति के लिए वास्तु कला की शिक्षा लाभदायक होती है। हाथ उŸाम होने पर वह अपनी सम्पŸिा का निर्माण करता है। स सूर्य उŸाम हो उस पर, सूर्य पर एक से अधिक रेखाएं हों और उसकी उंगली सीधी हो, बुध की उंगली टेढ़ी तथा चंद्र व गुरु उŸाम हों तो व्यक्ति के लिए फैशन डिजाइनिंग, टेलरिंग आदि की शिक्षा लाभदायक होती है। स हृदय व मस्तिष्क रेखाओं में अंतर अधिक हो, मस्तिष्क रेखा या उसकी एक शाखा चंद्र पर्वत पर जाती हो, उंगलियां पतली हों, शनि की उंगली सीधी हो, शुक पर अधिक रेखाएं हों और वह अधिक उठा हुआ न हो, भाग्य रेखा जीवन रेखा से दूर हो, अंगूठे व अंगुलियां लचीली हों तो व्यक्तिं फिल्म क्षेत्र में कार्य करता है। इनके अतिरिक्त कई अन्य लक्षण हैं जिनके विश्लेषण से किसी व्यक्ति के व्यवसाय का पता चलता है। त न हो और मस्तिष्क रेखा दोहरी हो तो भाग्यशाली होता है। किंतु यह स्पष्ट कर देना आवश्यक है कि हाथ पतला, टेढ़ा मेढ़ा व दोषपूर्ण हो, तो दोहरी मस्तिष्क रेखा विपरीत फल देती है। स जीवन रेखा गोल, दोषमुक्त हो, भाग्य रेखा मोटी से पतली हो व मस्तिष्क रेखा दोनांे ओर से द्विभाजित या शाखायुक्त हो, तो व्यक्ति विभिन्न भाषाओं की शिक्षा प्राप्त करता है। वह गाइड या अनुवादक का कार्य करता है। स मस्तिष्क रेखा दोनों ओर से द्विभाजित हो और अंत के द्विभाजन की एक शाखा चंद्रमा की ओर जाती हो तथा नीचे की शाखा ऊपर की ओर जाने वाली शाखा से कुछ लंबी हो और गुरु व शुक्र उत्तम हों, तो व्यक्ति कवि, साहित्यकार, व वाकपटु होता है। इसके अतिरिक्त यदि शनि की उंगली लंबी हो, तो वह धार्मिक साहित्य की रचना भी कर सकता है।



विद्यादायिनी सरस्वती विशेषांक   फ़रवरी 2008

विद्या प्राप्ति हेतु मां सरस्वती की उपासना विधि एवं महिमा, कुंडली में विद्या प्राप्ति के योग, विद्या प्राप्ति के अनुभूत उपाय, विद्या प्राप्ति हेतु तंत्र-मंत्र एवं यंत्र का उपयोग, विद्या प्राप्ति हेतु वास्तु एवं वास्तु एवं फेंग शुई वस्तुओं का प्रयोग किस प्रकार लाभ देता है. इस अंक से जाना जा सकता है.

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