कैसा हो विद्यार्थियों का अध्ययन कक्ष शिक्षा वास्तु

कैसा हो विद्यार्थियों का अध्ययन कक्ष शिक्षा वास्तु  

कैसा हो विद्यार्थियों का अध्ययन कक्ष कुलदीप सलूजा पढ़ाई में अच्छी सफलता प्राप्त करने के लिए विद्यार्थियों को चाहिए कि वे अपने अध्ययन के लिए घर में वास्तु के अनुकूल स्थान का चयन कर उसे वास्तु के अनुकूल ही सजाएं। वास्तुषास्त्र के अनुसार दो दिशाएं एवं एक कोण ज्ञान प्राप्ति के लिए शुभ हैं पूर्व दिशा, जिसका प्रतिनिधि ग्रह सूर्य है ईशान कोण जिसका प्रतिनिधि ग्रह गुरु है और उत्तर दिशा, जिसका प्रतिनिधि ग्रह बुध है। अध्ययन कक्ष का दरवाजा पूर्व ईशान, दक्षिण आग्नेय, पश्चिम वायव्य व उत्तर ईशान में होना चाहिए। इनमें से किसी में भी दरवाजा रखने से कमरे में साज सज्जा ज्यादा व्यवस्थित होगी। विद्यार्थियों को दरवाजे की तरफ पीठ करके कभी भी अध्ययन नहीं करना चाहिए। यदि सूर्य की सुबह की किरणें अध्ययन कक्ष में आती हों तो खिड़की दरवाजे सुबह के वक्त खोलकर रखने चाहिए ताकि सुबह के सूर्य की सकारात्मक ऊर्जा का लाभ मिल सके। यदि सूर्य की शाम की किरणें आती हों तो बिल्कुल न खोलें ताकि दोपहर व उसके बाद की नकारात्मक ऊर्जा से बच सकें। घर की पश्चिम दिशा में बच्चों को पूर्व दिशा की ओर मुंह करके पढ़ना-लिखना चाहिए। इस स्थिति में वे अपने विषय को बड़ी जल्दी समझ पाते हैं और कम समय में याद कर परीक्षा में अच्छे नंबर प्राप्त करते हैं। यदि घर की पश्चिम दिशा में पढ़ने का स्थान न हो तो घर के ईशान कोण स्थित कमरे में पूर्व मुखी बैठकर पढ़ना चाहए। यदि पूर्वमुखी बैठकर पढ़ने की व्यवस्था न हो तो ऐसी स्थिति में ईशान कोण या उत्तर दिशा की ओर मुंह करके पढ़ना भी शुभ होता है। यदि विद्यार्थी कंप्यूटर का प्रयोग करते हों तो कंप्यूटर आग्नेय से दक्षिण व पश्चिम के मध्य कहीं भी रख सकते हैं। ध्यान रहे ईशान कोण में कंप्यूटर कभी न रखें। ईशान कोण में रखा कंप्यूटर बहुत ही कम उपयोग में आता है। विद्यार्थियों को सदैव दक्षिण या पश्चिम की ओर सिर करके सोना चाहिए। दक्षिण में सिर करके सोने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है, और पश्चिम में सिर करके सोने से पढ़ने की ललक बनी रहती है। विद्यार्थियों को किसी बीम या दुछत्ती के नीचे बैठकर पढ़ना या सोना नहीं चाहिए अन्यथा मानसिक तनाव उत्पन्न होता है और पढ़ाई में मन नहीं लगता। अध्ययन कक्ष के ईशान कोण में आराध्य देव व पीने के पानी की व्यवस्था भी रखनी चाहिए। अध्ययन कक्ष की अन्य दीवारों पर महापुरुषों और अपने चहेते सफल व्यक्तियों के चित्र लगाने चाहिए। अध्ययन कक्ष की दीवार व पर्दे का रंग हल्का पीला, हल्का हरा, हल्का आसमानी या हल्का बादामी हो तो बेहतर है। सफेद रंग हो, तो विद्यार्थियों पर सुस्ती छाई रहती है। यदि अध्ययन कक्ष में एक से अधिक बच्चे पढ़ते हों तो उनके हंसते मुस्काते हुए सामूहिक फोटो कक्ष में अवश्य लगाएं, इससे उनमें मिल जुलकर रहने की भावना विकसित होगी। अध्ययन कक्ष में खाने की वस्तुएं जैसे बिस्किट, चना, मूंगफली, स्नैक्स, इत्यादि रखनी चाहिए, इससे ज्ञान बढ़ता है तथा पढ़ाई में नाम रोशन होता है। किताबों की आलमारी या रैक दक्षिण, पश्चिम में रखे जा सकते हैं। उन्हें वायव्य कोण में नहीं रखना चाहिए, क्योंकि यहां से किताबें गायब होने का भय रहता है। कोशिश करनी चाहिए कि किताबें अध्ययन कक्ष में खुली आलमारी या रैक में न रखें। अध्ययन कक्ष के साथ यदि टाॅयलेट हो, तो उसका दरवाजा हमेशा बंद रखें। टाॅयलेट को ज्यादा न सजाएं किंतु साफ सफाई का पूरा ध्यान रखें। यदि आप अच्छा कैरियर बनाना चाहते हैं तो अध्ययन कक्ष में अनावश्यक पुरानी किताबें व कपड़े न रखें अर्थात किसी भी प्रकार का कबाड़ा कमरे में नहीं होना चाहिए। कमरे में डस्टबिन अवश्य रखना चाहिए। यदि घर के सामने वाले भाग के दोनों तरफ की खिड़कियां टूटी-फूटी और पुरानी हों तो इसका बच्चों की पढ़ाई लिखाई पर बुरा असर पड़ता है। जिस घर में उत्तर दिशा में पूजाघर होता है उस घर की सबसे छोटी बहन या भाई उच्च शिक्षा प्राप्त करता है। जिस घर में जगह की कमी हो उस घर में हाॅल के अंदर ही देवी-देवताओं की तस्वीर लगाई जाती है, उनकी पूजा की जाती है उस घर के सभी सदस्य बुद्धिमान होते हैं।



विद्यादायिनी सरस्वती विशेषांक   फ़रवरी 2008

विद्या प्राप्ति हेतु मां सरस्वती की उपासना विधि एवं महिमा, कुंडली में विद्या प्राप्ति के योग, विद्या प्राप्ति के अनुभूत उपाय, विद्या प्राप्ति हेतु तंत्र-मंत्र एवं यंत्र का उपयोग, विद्या प्राप्ति हेतु वास्तु एवं वास्तु एवं फेंग शुई वस्तुओं का प्रयोग किस प्रकार लाभ देता है. इस अंक से जाना जा सकता है.

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