अक्सर देखने में आता है कि माता-पिता अपने बच्चों के विवाह के समय अपनी जात-पांत, अपने खानदान, रहन-सहन के स्तर आदि पर बहुत जोर देते हैं और उनकी कोशिश यही होती है कि उनका दामाद या उनकी बहू अपनी ही जाति से हो ताकि उनके रीति रिवाज, खान-पान, रहन-सहन आदि में समानता हो और किसी प्रकार की परेशानी न हो, लेकिन आज के इस तकनीकी युग में जब पूरा विश्व इतना सिमट चुका है, तो जात-पांत की ये दूरियां बेमानी सी लगती हैं। आज का युवा वर्ग तो बस मन के मेल की बात करता है। उन्हें समाज के दायरे या अपने परिवार के दृष्टिकोण काफी संकुचित लगते हैं। उनके विचार में आपसी प्यार और आपसी सामंजस्य के सामने जात-पांत की दीवार बहुत खोखली है। आजकल इंटरनेट से अनेक संबंध इसी तरह बन रहे हैं। अब यह जरूरी नहीं कि सारे संबंध अच्छे ही साबित हो रहे हों या फिर सारे बिगड़ ही रहे हों। अपवाद हर जगह होता है। मृणाल आज बहुत खुश थी। अभी-अभी अमेरिका से उसकी बहू जेनी का फोन आया था और वह उससे शिव रात्रि के व्रत के बारे में पूछ रही थी। मृणाल ने उसे विस्तार से शिवजी की कथा सुनाई और बताया कि वह किस तरह से फलाहार लेकर व्रत रख सकती है। जेनी तो शायद निर्जल व्रत रखने की तैयारी कर रही थी। मृणाल के चेहरे पर खुशी व संतोष की लहर दौड़ गई थी। यह वही जेनी है, जिसे उसके विदेशी होने के कारण कुणाल के परिवार के अन्य सदस्य बहू मानने से इंकार कर रहे थे। कुणाल और जेनी के विवाह का सभी ने विरोध किया था। यह तो जेनी का प्यार व उसकी सबके प्रति आत्मीयता ही थी जिसने मृणाल का दिल जीत लिया था। जेनी ने सदा ही उन्हें अपने मम्मी पापा से ज्यादा आदर और प्यार दिया, उनकी जरूरतों का बिना कहे ही इतना ख्याल रखा जितना कि शायद ही कोई भारतीय लड़की रख पाती। कुणाल एम. बी. ए. करने के पश्चात एक अमेरिकी कंपनी में उंचे पद पर काम कर रहा था, जहां पर उसकी दोस्ती अपनी ही बाॅस जेनी से हो गई। जेनी उसे बहुत पसंद करती थी। उसके जन्मदिन पर उसके लिए वह खुद बड़ा-सा केक बना कर लाई। कुणाल भी खुद को उसकी तरफ खिंचा-सा महसूस करने लगा था। पर चूंकि वह एक रूढ़िवादी ब्राह्मण परिवार से था, इसलिए कोई भी पहल नहीं करना चाहता था। लेकिन धीरे-धीरे जेनी हिंदू रीति रिवाजों में दिलचस्पी लेने लगी और जिद करके कुणाल के घर आकर उसके परिवार वालों से भी मिली। उसने सबकी पसंद-नापसंद के बारे में जाना और पूरी कोशिश की कि वह परिवार के सभी सदस्यों से अच्छी तरह घुलमिल जाए और उनके दिल में अपनी जगह बना सके। कुणाल के माता-पिता व बहन को जेनी उसकी दोस्त के रूप में तो अच्छी लगी पर जब कुणाल ने विवाह का प्रस्ताव रखा, तो वे एकदम से तैयार नहीं हुए। एक विदेशी बहू को स्वीकार करना इतना आसान नहीं था। कुणाल के माता-पिता इस बात को लेकर ज्यादा फिक्रमंद थे कि समाज और उनके रिश्तेदार क्या कहेंगे। ब्राह्मण परिवार में मांस मच्छी खाने वाली विदेशी बहू! बहुत जगहंसाई होगी। लेकिन दोनों के प्यार के आगे उनकी एक न चली। जेनी ने कुछ दिन उनके घर पर रह कर हिंदी सीखी, उनके प्रिय व्यंजन बनाने सीखे और खुद अपने हाथों से बना कर उन्हें खिलाया। इस तरह उनके दिल जीत कर उन्हें अपना बना लिया और उन्होंने जेनी और कुणाल की सगाई के लिए हां कर दी। और फिर दोनों अमेरिका चले गए। विदेश पहुंच कर जेनी और कुणाल ने रजिस्ट्री विवाह किया और फिर जेनी के परिवार वालों ने कुणाल को खुले दिल से अपना लिया। जेनी कुणाल की खुशी की खातिर शाकाहारी बन गई और उसने भारतीय व्यंजन बनाना सीखा तथा सारे रीति-रिवाज व त्यौहार भी भारतीय तौर-तरीके से मनाने लगी। भारत में अपने सास-ससुर व ननद के साथ घंटों बात करने, कुणाल की पसंद-नापसंद जानने में उसे बहुत मजा आता। ससुराल से दूर रहकर भी जेनी अपने दायित्वों को बखूबी निभा रही है और अब कुणाल के माता-पिता ने भी उसे दिल से अपनी बहू स्वीकार कर लिया है, क्योंकि मन के रिश्ते ज्यादा ही मजबूत और खूबसूरत होेते हैं और दुनियादारी व समाज की दीवारें उनके आगे बहुत छोटी पड़ जाती हैं। आइए, करें कुणाल और जेनी की कुंडलियों का विवेचन। कुणाल और जेनी की कुंडलियों का मिलान करें, तो कुणाल की जन्म राशि तुला और जेनी की राशि कुंभ दोनों वायुतत्व हैं। दोनों की राशियों के वायु तत्व होने के कारण दोनों के स्वभाव में विशेषताएं सामान हैं और दोनों के संबंध भी मधुर हैं। दोनों के राशि स्वामियों में मित्रता होने के कारण भी दोनों एक दूसरे के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित हैं तथा सतत एक दूसरे के सुख दुख में पूर्ण सहयोग देने के लिए तत्पर रहते हैं। जेनी का लग्नेश गुरु पंचम भाव में अपनी उच्च राशि में त्रिकोण भाव में स्थित है जिसके कारण वह कुशाग्र बुद्धि, यशस्वी तथा सरल हृदय वाली लड़की है। वह दूसरों के प्रति समर्पित और उन्हें पूर्ण आदर देने वाली है। द्वादश भाव में केतु, मंगल, बुध, सूर्य व चंद्र की स्थिति उसके विदेश से गहरे संबंधों को भी दर्शा रही है। पंचमेश चंद्र, सप्तमेश बुध तथा भाग्येश और नवमेश मंगल की द्वादश भाव में युति अंतर्राष्ट्रीय प्रेम विवाह की सूचक है। कुणाल की जन्मकुंडली में भी पंचमेश भाग्येश लग्न के साथ अष्टम स्थान में, सप्तमेश पंचम में और शनि सप्तम में स्थित है। ये सारे योग किसी विदेशी महिला से प्रेम संबंध तथा विदेश गमन के सूचक हैं। कुणाल के द्वितीय भाव पर लग्नेश गुरु, भाग्येश मंगल और पंचमेश चंद्र की पूर्ण दृष्टि है, जिससे आर्थिक रूप से उसकी स्थिति हमेशा सुदृढ़ ही रहेगी और वह अपने परिवार की आर्थिक सहायता के लिए भी तत्पर रहेगा। जेनी और कुणाल का जन्म लग्न मीन है जिस कारण दोनों के आचार-विचार व व्यवहार में अनेक समानाताएं हैं। कुणाल की जन्मपत्री में लग्नेश, पंचमेश तथा भाग्येश की युति उसके उत्तम आचरण, उच्च विचार तथा भक्ति भाव से भरे होने का संकेत दे रहे हैं। पंचम भाव से ईश्वर भक्ति, लग्न से आत्मा तथा नवम भाव से परमात्मा का विचार किया जाता है। शायद इन्हीं श्रेष्ठ गुणों के कारण जेनी कुणाल की तरफ आकर्षित हुई, क्योंकि जेनी की जन्मपत्री में भी ईश्वर भक्ति का पंचम भाव उच्च राशि के गुरु से युक्त व मित्र राशिस्थ शुक्र से दृष्ट है। पंचम भाव पर किसी भी पाप का प्रभाव नहीं है। पंचम भाव प्रेम में सफलता का प्रतीक है और जेनी के पंचम भाव में गुरु और शुक्र का प्रभाव न केवल प्रेम में सफलता की गारंटी दे रहा है अपितु यह भी बताता है कि उसका प्रेम संबंध एक अत्यंत कुलीन परिवार व श्रेष्ठ ब्राह्मण जाति के सभ्य, सुशील, सुशिक्षित व सुसंस्कृत व्यक्ति से है। इन दोनों को सदा सफलता के नए सोपान हासिल होते रहें और इनका प्रेम अंतर्राष्ट्रीय विवाह के लिए एक मिसाल बने यही हमारी प्रभु से प्रार्थना है।


नजर व बंधन दोष मुक्ति विशेषांक  मार्च 2010

नजरदोष के लक्षण, बचाव व उतारने के उपाय, ऊपरी बाधा की पहचान, कारण व निवारण, नजरदोष का वैज्ञानिक आधार तथा नजर दोष निवारक मंत्र व यंत्र आदि विषयों की जानकारी प्राप्त करने हेतु यह विशेषांक अत्यंत उपयोगी है। इस विशेषांक में महान आध्यात्मिक नेता आचार्य रजनीश की जन्मकुंडली का विश्लेषण भी किया गया है। इसके विविधा नामक स्तंभ में ÷हस्ताक्षर विज्ञान द्वारा रोगों का उपचार' नामक लेख उल्लेखनीय है।

सब्सक्राइब

अपने विचार व्यक्त करें

blog comments powered by Disqus
.