वास्तुसम्मत कार्यालय कुछ महत्वपूर्ण उपाय

वास्तुसम्मत कार्यालय कुछ महत्वपूर्ण उपाय  

शाम ढींगरा किसी व्यवसाय, पेशे या उद्योग की सफलता में उसका कार्यालय का अपना विशेष महत्व होता है। यदि कार्यालय का निर्माण और आंतरिक साज सज्जा वास्तु के अनुरूप हो, तो उद्योग या व्यवसाय दिन-व-दिन उन्नति की सीढ़ियां चढ़ता चला जाता है। व्यावसायिक स्थल में कार्यालय के लिए दक्षिण-पश्चिम दिशा (र्नैत्य कोण) को अति उŸाम माना गया है। कार्यालय के अंदर उद्योगपति की कुर्सी दक्षिण-पश्चिम दिशा में इस प्रकार रखी जाए कि बैठते समय उसका मुख उŸार-पूर्व दिशा की ओर रहे। इसका सैद्धांतिक कारण यह है कि र्नैत्य कोण पृथ्वी तत्व का क्षेत्र है। अतः इस स्थान पर बैठने से व्यक्ति की विवेकशक्ति तथा निर्णयक्षमता सुदृढ़ होती है। कुर्सी के पीछे ठोस दीवार हेानी चाहिए, किंतु कोई खिड़की या झरोखा नहीं हो। यदि हो, तो उसे स्थायी तौर पर बंद कर देना चाहिए। कुर्सी की पुश्त ऊंची हो ताकि बैठने वाले को ठोस सहारा मिल सके। कुर्सी में हैंडल होना बहुत जरूरी है ताकि काम करने में असुविधा न हो। दीवार पर पर्वत का चित्र लगाना चाहिए, किंतु चित्र में पर्वत का आकार नुकीला न हो बल्कि कछुए की पीठ की भांति ढलवां हो। अगंतुकों के बैठने की व्यवस्था पूर्व या उत्तर दिशा में करनी चाहिए, जहां छत कोई बीम नहीं हो। अन्यथा व्यक्ति के मानसिक तनाव से ग्रस्त तथा उसकी निर्णयक्षमता के प्रभावित होने का भय रहता है। अगर बीम हटाना संभव न हो तो एक फाॅल्स सीलिंग लगाना चाहिए। इससे बीम के दुष्प्रभाव कम हो जाते हैं। कैश बाॅक्स या कीमती सामान की अलमारी दक्षिण की दीवार के साथ इस प्रकार रखी चाहिए कि उसका मुंह उŸार दिशा की ओर ख्ुाले। इससे आय में वृद्धि होती है। टेलीफोन और फैक्स उपकरण पूर्व दक्षिण भाग (आग्नेय कोण) या उŸार-पश्चिम भाग (वायव्य कोण) में रखना चाहिए। जल से संबंधित वस्तुएं जैसे पानी का गिलास, चाय का कप आदि टेलीफोन या फैक्स के पास न रखें। कंप्यूटर को मेज पर हमेशा दायीं ओर रखें। दीवार घड़ी को उŸार-पूर्व दिशा की तरफ दीवार पर लगा सकते हैं। इसके पीछे धारणा यह है कि ग्रहों के राजा सूर्य का उदय इसी दिशा में होता है। भविष्य की परियोजनाओं का विवरण भी इसी दीवार पर लगाना चाहिए ताकि उद्योगपति को उसका उद्देश्य सदा स्मरण रहे। टेबल के ऊपर पूर्व दिशा में ताजे फूलों का गुलदस्ता रखें। टेबल के ऊपर दक्षिण-पूर्व में छोटा सा हरा-भरा और स्वस्थ पौधा रखें, इससे व्यक्तित्व का विकास होता है और उन्नति के नए मार्ग खुलते हैं। र्नैत्य कोण (दक्षिण-पश्चिम) में क्रिस्टल बाॅल रखना चाहिए, इससे कर्मचारियों से संबंध मधुर बने रहते हैं। अगर कार्यालय में फिश एक्वेरियम रखना चाहें, तो पूर्व, उŸार या उŸार-पूर्व दिशा में रखें। दरबाजे के खुलने या बंद होने के समय चरमराहट की आवाज नहीं होनी चाहिए। इससे अशुभ ऊर्जा उत्पन्न होती है तथा शक्ति क्षीण होती है। दीवारों पर अधिक गहरे रंगों का प्रयोग नहीं करना चाहिए, अन्यथा उŸोजना और तामसिक विचारों के उत्पन्न होने का भय रहता है। कुर्सी के पीछे की दीवार पर व्यवसाय के संस्थापक या पे्ररणास्रोत का चित्र लगाना चाहिए। इस तरह ऊपरवर्णित उपाय अत्यंत प्रभावशाली हैं। इनके अनुरूप किसी उद्योग या व्यवसाय के कार्यालय को वास्तुसम्मत बनाने से उसकी वांछित उन्नति की प्रबल संभावना रहती है।



वास्तु विशेषांक  दिसम्बर 2009

वास्तु का मौलिक रूप एवं मानव जीवन पर इसका प्रभाव एवं महत्व, स्कूल / कालेज, अस्पताल, मंदिर, उद्दोग एवं कार्यालय हेतु वास्तु नियम, ज्योतिषीय उपायों द्वारा वास्तु ज्योतिष निवारण, बिना तोड़-फोड किए वास्तु उपाय दी गए है.

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