दुर्लभ रत्न माहेमरियम

दुर्लभ रत्न माहेमरियम  

फ्यूचर समाचार के सितंबर अंक के साथ पाठकों के लिए माहेमरियम (दुर्लभ रत्न) दिया जा रहा है। जो सभी के लिए विशेष उपयोगी है। माहेमरियम एक बहुत ही दुर्लभ रत्न है। यह एक जीवाश्म है जो हिमालय की उत्पत्ति के साथ ही अस्तित्व में आया। इसे ‘‘कैलिग्राफी’’ पत्थर भी कहते हैं क्योंकि इसे देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो एक कलाकार ने काली पृष्ठभूमि पर चित्रकारी की हो। माहेमरियम रत्न के अनेक उपयोग हैं जैसे- तनाव की स्थिति में भी शांति प्रदान करना, नकारात्मक परिस्थतियों को अनुकूल व सकारात्मक बनाना, आध्यात्मिक उन्नति, नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा, सृजनात्मकता और सुंदरता को बढ़ाकर आत्म विश्वास की वृद्धि करना आदि। जब तनाव के कारण निर्णय क्षमता क्षीण होती प्रतीत हो, ऐसी स्थिति में इस रत्न को समीप रखना लाभदायक होता है। इस रत्न को धारण करने से बवासीर रोग में लाभ व ग्रह शांति मिलती है। जिनकी कुंडली में कालसर्प योग हो, उनके लिए यह विशेष लाभदायक है। यदि पेट खराब रहता हो, इलाज कराने पर भी ठीक न होता हो तो माहेमरियम धारण करें, लाभ होगा। कोर्ट कचहरी के मामलों में आने वाली अड़चनों को दूर करने के लिए भी यह रत्न धारण करने से लाभ होगा। शत्रुओं का शमन उनके द्वारा उत्पन्न बाधाओं से मुक्ति और विजय प्राप्त होती है। जिन लोगों की राहु केतु की दशा चल रही हो वह भी यह रत्न किसी विशेषज्ञ से परामर्श लेकर धारण कर सकते हैं। धारण विधि: इस रत्न को गंगाजल से धोकर अपने पूजा स्थान पर रखें। इष्ट देव का नाम लेकर धूप दीप करके उसे अंगूठी या लाॅकेट में जड़वाकर सोमवार या बुधवार के दिन धारण करें। नव ग्रह की शांति में अद्भुत लाभ मिलता है।


ग्रह शांति एवं उपाय विशेषांक  सितम्बर 2010

ज्योतिष में विभिन्न उपायों का फल, लाल किताब के उपाय, व्यवहारिक उपाय, उपायों का उद्देश्य, औषधि स्नान व रत्नों का प्रयोग इत्यादि सभी विषयों की सांगोपांग जानकारी देने वाला यह विशेषांक प्रत्येक घर की आवश्यकता है। उपायों में मंत्र व उपासना के महत्व के अतिरिक्त यंत्र धारण/पूजन द्वारा ग्रह दोष निवारण की विधि भी स्पष्ट की गई है। ज्योतिष द्वारा भविष्यकथन में सहायता मिलती है परंतु इसका मूल उद्देश्य समस्याओं के सटीक समाधान जुटाना है। इस उद्देश्य की प्रतिपूर्ति करने के उद्देश्य को पूरा करने के लिए यह अंक विशेष उपयोगी है।

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