अविश्वास की दीवार

अविश्वास की दीवार  

सुखी दाम्पत्य जीवन की नींव आपसी विश्वास, प्यार, समर्पण और त्याग पर टिकी होती है। एक दूसरे के प्रति पूर्ण समर्पण और विश्वास जितना गहरा होगा, उतनी ही मधुरता जीवन मंे घुल जायेगी। इसके विपरीत यदि दोनों को एक-दूसरे पर विश्वास ही नहीं है या फिर उनका जीवन झूठ और फरेब की नींव पर टिका है तो ऐसे वैवाहिक जीवन का भविष्य कभी भी सुखद नहीं हो सकता। ययह घटना अत्यंत होनहार नवयुवक के जीवन की है। अनंत का जन्म तो भारत में हुआ था, परंतु माता-पिता उसे बचपन में ही लंदन ले गये और वहीं बस गये थे। बचपन से ही अत्यंत परिश्रमी और पढ़ाई में निपुण था। उसके माता-पिता ने उसे पूर्णरूप से भारतीय संस्कृति की छाया में ही पाला था। रामायण, महाभारत सभी का उसे ज्ञान था और दिल-दिमाग दोनों से ही वह अत्यंत ईमानदार था। उसने वहां डाक्टरी की पढ़ाई की और एक सफल डाक्टर बनकर वहां के बड़े अस्पताल में कार्यरत हो गया। इसी दौरान उसकी मुलाकाल वैशाली से हुई। वैशाली बोलने में अत्यंत चुस्त थी। चंूकि अनंत काफी अंतरमुखी था इसलिए वह पार्टियों में भी काफी चुप-चुप और सबसे अलग-अलग ही रहता था लेकिन वैशाली बार-बार उसके पास आकर उससे बात करती और उसे सबसे मिलवाती। धीरे-धीरे अनंत को वैशाली अच्छी लगने लगी और उसे लगा, शायद उसके अकेलेपन को दूर करने के लिए वैशाली अच्छी दोस्त साबित होगी। वैशाली ने खुद को डाक्टर बताया। उसकी उम्र भी अनंत से काफी ज्यादा थी, पर उसके रहन-सहन से वह काफी आकर्षक नजर आती थी। धीरे-धीरे अनंत और वैशाली की मुलाकातें बढ़ने लगी और अनंत को वैशाली अच्छी लगने लगी क्योंकि आजतक उसकी महिला दोस्त थी ही नहीं। न ही उसने कभी किसी से इस तरह बात करने की कोशिश की। वैशाली के माता-पिता भी उसे बचपन में ही लंदन ले आए थे, पर वह पश्चिमी रंग में पूरी तरह से ढली हुई थी। कुछ समय बीतने पर वैशाली अनंत पर विवाह का दवाब बनाने लगी। अनंत ने इस विषय पर अभी सोचा ही नहीं था और न ही अपने परिवार वालों को इस बारे में कुछ बताया था। वैशाली के दवाब में जब उसने घर में इस बारे में बताया तो मानो भूचाल आ गया। उसके माता-पिता इस रिश्ते से बिल्कुल भी खुश नहीं थे और उन्होंने इसका विरोध किया। लड़के से बड़ी लड़की उन्हें बिल्कुल नहीं भा रही थी। लेकिन कहते हैं न, होनी के आगे किसी का बस नहीं चलता। सबका विरोध होते हुए भी अनंत ने वैशाली से विवाह कर ही लिया और वह अपनेे इस निर्णय से बहुत खुश भी था। विवाह केे पश्चात् अनंत नेे देखा कि वैशाली अपने आॅफिस नहीं जा रही है कुछ दिन तो उसने सोचा कि शायद नई गृहस्थी बसाने के लिए छुट्टी ली है और वैशाली ने भी यही बताया लेकिन कुछ दिन बाद भी जब वह हमेशा घर में ही दिखाई देती तो उसने सही कारण पूछा तो पता चला कि वास्तव में उसके पास नौकरी है ही नहीं। सुनकर अनंत को काफी आश्चर्य हुुआ कि वैशाली ने उससे झूठ क्यों बोला। अनंत ने अपने अस्पताल में उसके लिए नौकरी ढूंढी और जब उससे उसके डाक्टरी की डिग्री के सर्टिफिकेट मांगे तो भी वैशाली टालम-टोल करने लगी और बोली कि उसके सारे सर्टीफिकेट खो गये हैं। यह सुनकर अनंत का माथा ठनका। उसने यूनीवर्सिटी से डुप्लीकेट सर्टीफिकेट निकलवाने के पता किया तो मालूम हुआ कि वैशाली ने तो कभी डाक्टरी की पढ़ाई की ही नहीं। उसने एडमिशन जरूर लिया था पर उसने फसर््ट ईयर में ही पढ़ाई छोड़ दी थी। अनंत के विश्वास को यह गहरी चोट थी। वैशाली से पूछने पर उसने कोई जवाब नहीं दिया। कुछ दिन बाद अनंत ने देखा कि वैशाली हमेशा सोई-सोई सी रहती, घर का कोई काम नहीं करती। खाना हमेशा होटल से आता है तो उसने उसके कमरे व अलमारी को खोलकर देखा तो वहां शराब की बोतलें मिलीं। यह अनंत के लिए दूसरा बड़ा झटका था। कहां तो वह शुद्ध शाकाहारी था और यहां उसकी धर्मपत्नी शराब का सेवन कर रही है। अनंत के विश्वास पर गहरी चोट लगी थी। गुस्से व अपमान से वह पागल-सा हो गया, इतना बड़ा धोखा। क्यों वैशाली ने उसके जीवन व विश्वास सेे विश्वासघात किया और जब उसने वैशाली को डांटा तो उसने रो-रो कर घर सिर पर उठा लिया और आत्महत्या की धमकी देने लगी। उससे वायदा भी कर दिया कि आगे वह ऐसा कुछ नहीं करेगी जिससे अनंत को दुःख पहुंचे। अनंत ने उसकी कथनी पर विश्वास तोे कर लिया, पर उसे उसके रंग-ढंग में कोई परिवर्तन नजर नहीं आया। घर उसे मानो काटने कोे दौड़ता था। वह अपने रिश्ते को समाप्त करनेे की सोच ही रहा था कि वैशाली ने बताया कि वह गर्भवती है और अनंत के बच्चे की मां बनने वाली है। अनंत को कोई खुशी नहीं हुई बल्कि उसके मन में एक शक और उत्पन्न हो गया कि क्या यह वाकई उसकी संतान है या फिर इसमें भी उसकी कोई चाल है। समय आने पर वैशाली ने पुत्र को जन्म दिया। पर अनंत वैशाली के झूठ से इतना पक चुका था कि वह अपनी संतान को भी अविश्वास की नजरों से देखता है और उसे समझ नहीं आता कि वह क्या करे। आइये, करें अनंत और वैशाली की कुंडली का विश्लेषण- उनकी कुंडलियां इस संदर्भ में क्या प्रकाश डालती हैं। अनंत की जन्मकुंडली में योग कारक ग्रह एवं भाग्येश बृहस्पति एवं द्वादशेश बुध का परिवर्तन योग है और योगकारक मंगल और गुरु की युति द्वादश भाव में है जिसके कारण वे बाल्यावस्था में ही विदेश चले गये और वहां पर उŸाम पढ़ाई-लिखाई करके डाक्टर बन गये और एक ऊंचे पद पर कार्यरत हैं। अनंत की सम राशि व सम लग्न है जिसके कारण अनंत काफी शर्मिला, शांत तथा अच्छे संस्कार वाला है। धर्म भाव में उच्चस्थ शुक्र, बुध व केतु की युति के कारण अनंत काफी धार्मिक प्रवृŸिा का है। विवाह की दृष्टि से विचार करें तो सप्तम भाव पर मंगल की पूर्ण दृष्टि है और सप्तमेश शनि सप्तम भाव से अष्टम भाव में स्थित है। नवांश में अपनी नीच राशि में राहू के साथ है और जन्मांग व नवांश में शत्रु राशि में भी स्थित है। पत्नी कारक ग्रह शुक्र भी अकारक व नीचस्थ ग्रह बुध एवं केतु के साथ पापग्रह राहु की दृष्टि में नवम भाव में स्थित है जिसके कारण अनंत के वैवाहिक जीवन में अशांति व अविश्वास का वातावरण उत्पन्न हुआ। अनंत की कुंडली में सप्तम भाव का स्वामी शनि सूर्य की राशि में सूर्य से दृष्ट है तथा वक्र है। नवांश में शनि नीच राशि में राहू के साथ पाप ग्रह में स्थित है जिसके कारण इसका विवाह अपने से बड़ी उम्र की महिला से हुआ। वैशाली पर अत्यधिक अविश्वास का कारण राहू के ऊपर से सप्तमेश शनि का गोचर है। वैशाली की कुंडली का विश्लेषण करें तो वैशाली का पंचमेश शनि सप्तम भाव में अपनी नीच राशि में बैठे हैं और सप्तमेश मंगल स्वग्रही होकर द्वितीय भाव में है जो दर्शाता है कि वैशाली का विवाह एक सौम्य और शांत स्वभाव के लड़के से हुआ। परंतु खुद वैशाली काफी उग्र स्वभाव की है। शनि की सप्तम भाव में नीच राशि में स्थिति वैशाली की छल कपट व स्वार्थ से अपना उल्लू सीधा करने वाली प्रवृŸिा को भी दर्शाती है। छठे भाव में लग्नेश शुक्र वक्र व अस्त होकर अपनी उच्च राशि में है लेकिन वक्र होेने के कारण नीचस्थ ग्रह की भांति फल देंगे। उसके साथ पूर्ण अस्त बुध व पाप ग्रह राहू और सूर्य सभी व्यसन स्थान अर्थात् द्वादश भाव को देख रहे हैं जो उसकी मादक द्रव्य लेने के बुरे व्यसन को भी दर्शा रहा है। चलित कुंडली में गुरु की पंचम भाव में दृष्टि उसके संतान भाव को बल प्रदान कर रही है और यही पुत्र उसके दाम्पत्य जीवन को आगे बढ़ाने में सहायक होगा। वैशाली की झूठ बोलने की आदत के कारण उसे अनंत की घृणा का शिकार होना पड़ा और यह अविश्वास की दीवार इस हद तक बड़ी हो गई कि उसे अनंत को अपने बच्चे का पिता होने का सबूत देना पड़ रहा है।


दीपावली विशेषांक   अकतूबर 2011

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