अपार संपत्ति का स्वामी बनाने वाली रेखाएं

अपार संपत्ति का स्वामी बनाने वाली रेखाएं  

भारती आनंद
व्यूस : 3592 | फ़रवरी 2006

पने देखा होगा कि गरीब परिवार में जन्मा शिशु और अमीर परिवार में जन्मा शिशु जन्मकाल में एक जैसे होते हैं, न उनका नाम-यश होता है और न वे धन-दौलत के प्रत्यक्ष मालिक होते हैं। हालांकि यह संभव होता है कि धनी परिवार का शिशु आगे चलकर संपत्ति का उत्तराधिकारी होने के नाते धनवान ही होगा, किंतु कभी-कभी यह नहीं भी होता है। ऐसा भी हो सकता है कि गरीब परिवार का शिशु आगे चल कर धन-संपदा का स्वामी हो जाए और अमीर परिवार का शिशु आगे चलकर निर्धन हो जाए। ऐसे कई उदाहरण समाज में देखे जा सकते हैं। आखिर वे कौन से कारण हैं जिनसे यह संभव होता है? कैसे हम जानें कि कौन अपार धन-संपदा का स्वामी हो सकता है? इसी रहस्य का उद्घाटन करती हैं हमारी हस्तरेखाएं:

1. यदि हाथ में जीवन रेखा स्पष्ट, नरम हाथ, बुध क्षेत्र स्पष्ट हो, बुध की उंगली सूर्य की उंगली के तीसरे पोर से लंबी हो और मस्तिष्क रेखा सुंदर और स्पष्ट हो तो जातक बड़ी संपत्ति के मालिक होते हैं।

2. हाथ भारी हो और जीवन रेखा के साथ मंगल रेखा अंत तक चले तो ऐसे व्यक्ति पैतृक संपत्ति के मालिक होते हैं।

3. एक से अधिक भाग्य रेखाएं हों, उंगलियों के आधार बराबर हों, अन्य रेखाएं स्पष्ट हों तो ऐसे व्यक्ति संपत्तिशाली होते हैं।

4. शनि और सूर्य की उंगलियां बराबर हों, गुरु पर त्रिकोण हो, भाग्य रेखा स्पष्ट हो, जीवन रेखा दृढ़ और हथेली मुलायम हो तो धन प्राप्ति के योग बनते हैं।

5. गुरु की स्थिति मजबूत हो, भाग्य रेखा शनि पर्वत या गुरु पर्वत तक जाती हो, भाग्य रेखा साफ-सुथरी, निर्दोष हो और मस्तिष्क रेखा भी स्पष्ट, स्वस्थ और आकर्षक हो तो ऐसे व्यक्ति अच्छी पद-प्रतिष्ठा वाले और धनवान होते हैं। यदि आपके हाथों में भी इस प्रकार की रेखाएं उपस्थित हैं तो इसका लाभ आपको अवश्य ही मिलेगा और यदि नहीं भी हैं तो हताश होने की आवश्यकता नहीं है। प्रतिकूल ग्रहों और प्रतिकूल हस्तरेखाओं का दुष्प्रभाव सर्वथा समाप्त तो नहीं किया जा सकता किंतु नियमित पूजन आदि सत्कार्यों के द्वारा इनके प्रभाव को कम किया जा सकता है। इसके लिए किसी विशेषज्ञ की सहायता अवश्य लेनी चाहिए।

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रत्न विशेषांक  फ़रवरी 2006

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हमारे ऋषि महर्षियों ने मुख्यतया तीन प्रकार के उपायों की अनुशंसा की है यथा तन्त्र, मन्त्र एवं यन्त्र। इन तीनों में से तीसरा उपाय सर्वाधिक उल्लेखनीय एवं करने में सहज है। इसी में से एक उपाय है रत्न धारण करना। ऐसा माना जाता है कि कोई न कोई रत्न हर ग्रह से सम्बन्धित है तथा यदि कोई व्यक्ति वह रत्न धारण करता है तो उस ग्रह के द्वारा सृजित अशुभत्व में काफी कमी आती है। फ्यूचर समाचार के इस विशेषांक में अनेक महत्वपूर्ण आलेखों को समाविष्ट किया गया है जिसमें से प्रमुख हैं- चैरासी रत्न एवं उनका प्रभाव, विभिन्न लग्नों में रत्न चयन, ज्योतिष के छः महादोष एवं रत्न चयन, रोग भगाएं रत्न, रत्नों का शुद्धिकरण एवं प्राण-प्रतिष्ठा, कितने दिन में असर दिखाते हैं रत्न, लाजवर्त मणि-एक नाम अनेक काम इत्यादि। इसके अतिरिक्त स्थायी स्तम्भों के भी महत्वपूर्ण आलेख विद्यमान हैं।

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