अगर जन्मकुंडली नहीं है तो क्या करें?

अगर जन्मकुंडली नहीं है तो क्या करें?  

स्वास्थ्य संबंधी समस्या: अगर आप को स्वास्थ्य संबंधित समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं, आपको तनाव रहता है व नींद भी पूरी नहीं हो पा रही, इसी वजह से आप दिन प्रतिदिन कोई न कोई बीमारी से पीड़ित हो रहे हैं तो आप अपने दाहिने हाथ की छोटी उंगली में चांदी की अंगूठी में मोती जड़वाकर सोमवार को पहनें व सफेद धागे में तीन मुखी रुद्राक्ष डालकर गले में धारण करें, आपको अवश्य लाभ मिलेगा। दांपत्य जीवन सबंधी समस्या हो तो क्या करें?: यदि पति-पत्नी में आपसी मतभेद व प्रेमभाव की कमी हो और आये दिन झगड़े होते रहते हों तो पुरुष जातक को हीरा या सफेद पुखराज डालना चाहिए। अगर सामथ्र्य न हो तो टोपाज या जरकन धारण कर सकते हैं। शुक्रवार को गाय को चारा डालें। रोज चीटियों को आटा दिें व सूर्य को सुबह अघ्र्य अवश्य दें। वैभव लक्ष्मीजी का व्रत व पूजन करें। स्त्री जातक पीला पुखराज धारण करंे या इसका उपरत्न सुनैहला भी धारण कर सकते हैं। हर वीरवार केले के पेड़ पर पीले फूल चढ़ायें। रोज पीपल के पेड़ पर जल दें। भगवान सत्यनारायण जी का पूजन व व्रत करें। संतान संबंधी समस्या आ रही हो तो क्या करें: पति-पत्नी दोनों पीला पुखराज धारण करें व दोनों मिलजुलकर हरिवंश पुराण का पाठ करें। मंदिर व गुरु स्थान पर सेवा करें। अपना घर खरीदने या बनवाने संबंधी समस्या आ रही हो तो क्या करें ? हर शुक्रवार को किसी गरीब व्यक्ति को खाना खिलायें। रविवार को गाय को गुड़ खिलायें। तुलसी के पौधे की सेवा करें व रोज सायं को पौधे के समक्ष दीपक जलायें। आपका अपना मकान अवश्य बनेगा। कारोबार या आजीविका संबंधी समस्या हो तो क्या करें ? बुधवार का व्रत करें, बुध स्तोत्र का पाठ करें व प्रत्येक बुधवार को गणेश जी को लड्डुओं का प्रसाद चढ़ायें। बेटी, बहन, बुआ का आदर सम्मान करें और हमेशा चांदी का चैकोर टुकड़ा अपने पास रखें। आपको अवश्य लाभ मिलेगा। धन में कमी या आर्थिक व्यवस्था ठीक न हो तो क्या करें? आटे की 108 गोलियां अपने इष्ट को नमन करते हुए या ‘ऊँ ह्रीं नमः’ का जप करते हुए बनायंे व 108 दिन ही मछलियों को खिलाएं, आप को लाभ अवश्य मिलेगा।


रेकी एवं प्राणिक हीलिंग  मई 2016

मई माह के फ्यूचर समाचार वैकल्पिक एवं अध्यात्मिक चिकित्सा पद्धति का समर्पित एक विशेषांक है। ये चिकित्सा पद्धतियां शरीर के पीड़ित अंग को ठीक करने में आश्चर्यजनक रूप से काम करती हैं। इन चिकित्सा पद्धतियों का शरीर पर कोई नकारात्मक प्रभाव भी नहीं पड़ता अथवा इनका कोई साईड इफैक्ट नहीं होता। इस विशेषांक के महत्वपूर्ण आलेखों में सम्मिलित हैंः प्राणिक हीलिंगः अर्थ, चिकित्सा एवं इतिहास, रेकी उपचार:अनोखी अनुभूति है, रेकी: एक अद्भुत दिव्य चिकित्सा, चुंबकीय जल एवं लाभ, मंत्रोच्चार द्वारा - गोली, इंजेक्शन और दवा के बिना इलाज, संगीत से उपचार, एक्यूपंक्चर व एक्यूप्रेशर पद्धति आदि। इनके अतिरिक्त स्थायी स्तम्भों में बहुत से लाभदायक व रोचक आलेख भी पूर्व की भांति सम्मिलित किए गये हैं।

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