टोटके

टोटके  

व्यूस : 2327 | अप्रैल 2006

- शनिग्रह की पीड़ा से शांति के लिए: शनिवार के दिन संध्या को काले कुत्ते को तेल की चुपड़ी हुई रोटी खिलानी चाहिए। यदि कुत्ता रोटी खा ले तो अवश्य शनि ग्रह द्वारा मिल रही पीड़ा शांत होती है। यदि कुत्ता रोटी नहीं खाए तो शनि को अशुभ मानना चाहिए। काले कुत्ते को घर के द्वार पर नहीं लाना चाहिए, अपितु पास जाकर सड़क पर ही रोटी खिलानी चाहिए।

- गृहक्लेश की शांति के लिए ः काली गंुजा के ग्यारह दाने लेकर घर के सभी सदस्यों के ऊपर से उतारने के बाद उन्हें दक्षिण दिशा में निर्जन स्थान पर गाड़ दें। यह उपाय शनिवार या अमावस्या को करें।

- धनार्जन के पश्चात भी धन का न टिकना: यदि धन कमाने के बावजूद भी बरकत नहीं है तो एक रुपए का सिक्का और काली गंुजा का एक बीज लेकर जमीन में कुछ गहराई में दबा दें। यह उपाय आप शुक्ल पक्ष के प्रथम बुधवार या शुक्रवार को करें, प्रातः साढ़े ग्यारह बजे से बारह बजे के बीच। अभूतपूर्व सफलता पाएंगे। विशेष ध्यान रखें कि कोई आपको टोके नहीं।

- झूठे विवाद एवं मुकदमे में फंसने पर: कई बार इंसान झूठे मुकदमे एवं विवाद में उलझ जाता है जिससे मान-प्रतिष्ठा की भी हानि होती है। उस घर में धन की बर्बादी और कलह का वातावरण रहता है। यदि बताए गए उपाय सही श्रद्धा और ढंग से किए जाएं तो सफलता निश्चित होती है। मुकदमे में जाते समय चांदी का टुकड़ा पीले वस्त्र में बांधकर अवश्य अपनी जेब में रखें।


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चांदी का चैरस टुकड़ा हमेशा पास रखें। रात्रि में किसी से झगड़ा न करें, अपशब्द न कहें। घर के दक्षिण दरवाजे से आना-जाना न रखें। वर्षा के जल को घर में संभाल कर रखें और पूर्णिमा को उसे फूल द्वारा सारे घर में छिड़कें।

- हानिकारक वृक्ष: घर और कार्यस्थल पर जीवन संकट उत्पन्न करने वाले वृक्ष नहीं लगाएं। ये वृक्ष इस प्रकार हैं: मोतिया, चंपा, केवड़ा, आंवले का वृक्ष। गृह के समीप अश्ुाभ फलकारी चंपा, रात की रानी जैसे अत्यधिक सुगंधित और ठंडक प्रदान करने वाले पौधों के नीचे जहरीले सांप और कीड़े आकर रात्रि को विश्राम करते हैं, अतः ये शुभ फलदायी नहीं हैं। गृहस्वामी के जीवन पर संकट आ सकता है।

- शनि ग्रह एवं वास्तु दोष दूर करने के लिए: लोहे में शनि ग्रह का वास होता है, अतः आप अपने घर के मुख्य द्वार पर काले घोड़े की घिसी हुई नाल लगाएं। जो नाल अपने आप घोड़े के पैर से घिस कर टूटी हो उस नाल का अत्यंत महत्व है। इससे शनि देव प्रसन्न होते हैं, घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहेगी।

- मकान की नींव रखते समय: चांदी का सर्प-सर्पणी का जोड़ा भूमि पूजन करके मकान की नींव में डालना चाहिए। एक पात्र या शीशी में शहद भी रखें। इससे मकान की नींव मजबूत होती है। भूकंप भी आए तो भी मकान सुरक्षित रहता है, दीवारों पर दरारें नहीं पड़ती, उनमें कभी सांप-बिच्छू नहीं निकलते हैं।

- घर में लक्ष्मी का वास रहने के लिए: प्रतिदिन अपने पूजागृह में फूलों की एक माला अपने इष्टदेव को चढ़ाएं, भोग लगाएं तथा गरीब को दान में कुछ अवश्य दें। बुरे दिनों में यह पुण्य काम आता है। छोटा सा उपाय है, फल अनंत हैं।


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- कन्या के जल्दी विवाह के लिए: कन्या की नाक अवश्य छिदवाएं और उसमें छोटा पीला पुखराज या पीला नग डलवाएं। बाधा दूर होगी और विवाह शीघ्र होगा।

- नींद आने के लिए: बुरे स्वप्न न आएं और सुंदर नींद आए इसके लिए सोने से पूर्व ईश्वर का स्मरण कर तीन बार निम्न मंत्र को बोलें। सुखद नींद आएगी और बुरे स्वप्न भी नहीं आएंगे। मंत्र: अच्युतं केशवं विष्णुं हरिं सोमं जनदिनम्। हंसं नारायणं कृष्णं जपेद् दुस्स्वप्नप्रशान्तेय।।

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पराविद्याओं को समर्पित सर्वश्रेष्ठ मासिक ज्योतिष पत्रिका  अप्रैल 2006

सभ्यता के आरम्भिक काल से ही फलकथन की विभिन्न पद्धतियां विश्व के विभिन्न हिस्सों में प्रचलित रही हैं। इन पद्धतियों में से अंक ज्योतिष का अपना अलग महत्व रहा है यहां तक कि अंक ज्योतिष भी विश्व के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग रूपों में प्रचलित है तथा इन सब में आपस में ही विभिन्नता देखने को मिलती है। हालांकि सभी प्रकार के अंक ज्योतिष के उद्देश्य वही हैं तथा इनका मूल उद्देश्य मनुष्य को मार्गदर्शन देकर उनका भविष्य बेहतर करना तथा वर्तमान दशा को सुधारना है। फ्यूचर समाचार के इस विशेषांक में अंक ज्योतिष के आधार पर फलकथन को वरीयता दी गयी है। इसमें मुख्यतः कीरो की पद्धति का अनुशरण किया गया है। इसके अन्तर्गत समाविष्ट महत्वपूर्ण आलेखों में- अंक ज्योतिष का परिचय एवं महत्व, अंक फलित के त्रिकोण प्रेम, बुद्धि एवं धन, मूलांक से जानिए भाग्योदय का समय, नाम बदलकर भाग्य बदलिए, हिन्दी के नामाक्षरों द्वारा व्यवसाय का चयन, अंक ज्योतिष का महत्वपूर्ण पहलू स्तूप, अंक एवं आॅपरेशन दुर्योधन, मूलांक, रोग और उपाय, अंक विद्या द्वारा जन्मकुण्डली का विश्लेषण आदि। इन आलेखों के अतिरिक्त दूसरे भी अनेक महत्वपूर्ण आलेख अन्य विषयों से सम्बन्धित हैं। इसके अतिरिक्त पूर्व की भांति स्थायी स्तम्भ भी संलग्न हैं।

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