- बच्चे या किसी को भी घर में नजर लगने पर घर के बुजुर्ग व्यक्ति का जूता लेकर पीड़ित व्यक्ति के ऊपर से सात बार घुमा कर जूते के तले पर कुछ थूक कर जमीन पर जोर से पटकना चाहिए। मन में ¬ रां राहवे नमः मंत्र का जप जूता घुमाते समय बोलते रहना चाहिए। लगी बुरी नजर उतर जाती है। बड़ा ही कारगर टोटका है। - व्यवसाय को नजर दोष से बचाने के लिए वहां पर मुख्य द्वार पर शनिवार को चमत्कारिक गुटिका (नजरबट्टू) लगानी चाहिए। बुरी नजर या टोने, टोटके का प्रभाव नहीं पड़ेगा। कुछ भी ऐसा होने पर गुटिका स्वतः ही टूट या फट जाती है। यह बहुत ही लाभकारी है। घर हो या व्यवसाय इसका प्रयोग सफल है। यहां तक कि कार में भी बाहर लगाने पर दुर्घटना से रक्षा करती है। - घर में लक्ष्मी का वास चाहते हैं, घर को बुरी आत्मा एवं बुरी नजर से बचाये रखना चाहते हैं तो कुमकुम के पांव घर में प्रवेश द्वार, सीढ़ियों या चैखट पर बना दें। सूर्योदय के समय लक्ष्मी अतिथि रूप में घर में प्रवेश करेंगी तो फिर जाने का नाम नहीं लेंगी। - लाल रंग का रिबन मकान के मुख्य द्वार पर बांधें। इससे घर में सुख-समृद्धि आती है, साथ ही कैसा भी वास्तु दोष हो, दूर हो जाता है। शुभ मुहूर्त में रिबन बांधें। - घर में अगर कोई व्यक्ति बहुत दिनों से बीमार है तो उसे नैर्ऋत्य कोण में सुलाएं और ईशान कोण में ठंडा पानी रखें। वह जल्दी स्वस्थ होगा तथा उस पर दवाइयों का प्रभाव जल्दी पड़ेगा। रोग धीरे-धीेरे दूर होने लगेगा। - पुत्री के विवाह की यदि चिंता हो तो पिरामिड शक्ति के चमत्कार से इसका समाधान संभव है। मंगल पिरामिड की अंगूठी शुक्ल पक्ष के प्रथम मंगलवार के दिन अपनी पुत्री के बायें हाथ की तर्जनी अंगुली में पहना दें। पहनाने से पूर्व उसे (अंगूठी) गंगा जल, कच्चे दूध से धोकर, टीका और लड्डू का भोग लगा कर धूप दीप दिखाएं, विवाह शीघ्र होने की प्रार्थना करते हुए पहनें। इससे विवाह बाधा दूर होती है और शीघ्र विवाह होता है। यही नहीं, इसके चमत्कार से उत्तम वर की प्राप्ति होती है और पुत्री अपनी ससुराल में सुखी जीवन भी व्यतीत करती है। - पिरामिड की शक्ति और चमत्कार द्वारा परीक्षा में भी सफलता प्राप्त की जा सकती है। स्टडी रूम में खिड़की पर तांबे का एक पिरामिड पूर्व दिशा की ओर लगाएं। स्टडी टेबल पर कांच का पिरामिड रखें। पढ़ने से दो घंटे पूर्व किताब पर पिरामिड रख दें। मन एकाग्र होता है। बुद्धि बढ़ती है, संपूर्ण पाठ याद हो जाता है। परीक्षा में पूर्णतः सफलता मिलती है। - गौरी (पार्वती) की प्रतिमा पर चढ़ाए गये सिंदूर को धारण करने वाली महिलाएं सौभाग्यसंपन्न होती हैं। - यदि मंगल के कारण विवाह में विलंब है तो आठ मीठी रोटियां जो कि एक तरफ से सिंकी हुई हों, किसी भूरे कुत्ते को खिलाएं। शीघ्र लाभ देखेंगे। साथ ही सिरहाने लाल कपड़े में सोंफ बांध कर रख कर सोएं। - यदि कार्य बनते-बनते बिगड़ जाते हों तो पीपल के पांच पत्तों पर पनीर, दूध से बनी कोई भी मिठाई अमावस्या की रात को पीपल वृक्ष के नीचे रख आएं, दीप जलाएं तेल का, काम बनने की प्रार्थना करें। पीछे मुड़ कर न देखें। कोई टोके नहीं। आप देखेंगे कार्य बनने लगेंगे। आपने पूछा ‘‘ फ्यूचर समाचार की एक पाठिका ने उधमपुर से उपाय जानना चाहा है- वह जो भी याद करती हैं, भूलने की आदत हो गयी है। प्रातः पूजा में दो अखरोट की गिरी एक कटोरी में रखें, 5, 7 दाने किशमिश के मिलाकर धूप, दीप जलाएं। ¬ गं गणपतये नमः का दो माला जाप करें, मूंगे की माला या रुद्राक्ष से। पूजा के पश्चात नाश्ते से पूर्व अखरोट, किशमिश स्वयं खा लें, एक कप दूध पी लें। साथ ही प्रतिदिन सायं देवालय के दर्शन करें। 40 प्रतियां हनुमान चालीसा की बांटें। पूर्णमासी पर सत्यनारायण कथा स्वयं करें या पंडित जी से करायें। शीघ्र लाभ महसूस करेंगे। दिमाग कंप्यूटर की तरह हो जाएगा, सब कुछ याद रहने लगेगा। मंत्र जप 40 दिन करें। शुक्ल पक्ष के प्रथम बुधवार से शुरू करें। अवश्य लाभान्वित होंगी। साथ ही गणेश रुद्राक्ष धारण करें तो सोने पर सुहागा।’’


रत्न विशेषांक  फ़रवरी 2006

हमारे ऋषि महर्षियों ने मुख्यतया तीन प्रकार के उपायों की अनुशंसा की है यथा तन्त्र, मन्त्र एवं यन्त्र। इन तीनों में से तीसरा उपाय सर्वाधिक उल्लेखनीय एवं करने में सहज है। इसी में से एक उपाय है रत्न धारण करना। ऐसा माना जाता है कि कोई न कोई रत्न हर ग्रह से सम्बन्धित है तथा यदि कोई व्यक्ति वह रत्न धारण करता है तो उस ग्रह के द्वारा सृजित अशुभत्व में काफी कमी आती है। फ्यूचर समाचार के इस विशेषांक में अनेक महत्वपूर्ण आलेखों को समाविष्ट किया गया है जिसमें से प्रमुख हैं- चैरासी रत्न एवं उनका प्रभाव, विभिन्न लग्नों में रत्न चयन, ज्योतिष के छः महादोष एवं रत्न चयन, रोग भगाएं रत्न, रत्नों का शुद्धिकरण एवं प्राण-प्रतिष्ठा, कितने दिन में असर दिखाते हैं रत्न, लाजवर्त मणि-एक नाम अनेक काम इत्यादि। इसके अतिरिक्त स्थायी स्तम्भों के भी महत्वपूर्ण आलेख विद्यमान हैं।

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