वास्तु सज्जा, रंग व वास्तु का सही प्रयोग

वास्तु सज्जा, रंग व वास्तु का सही प्रयोग  

निर्माण वास्तु सम्मत होने पर भी कई बार व्यक्ति को कष्ट होता है, तो उस स्थिति में यह पाया जाता है कि व्यक्ति उस घर का सही प्रयोग नहीं कर रहा होता। जैसे- गलत दिशा में सिर करके सोना, गलत दिशा की ओर मुंह करके कार्य करना, गलत कमरे में कार्य करना, किसी दिशा विशेष में उसके शत्रु ग्रहों से संबंधित सामान रखना, गलत दिशा में धन रखना व पूजा करना, गलत रंगों का प्रयोग करना, सज्जा वास्तु अनुरूप न करना, चित्रों आदि को गलत दिशा में लगाना आदि। इन प्रयोग संबंधी दोषों के भी कई बार बहुत भयंकर परिणाम देखने में आये हैं। सुखी जीवन के लिए प्रयोग, सज्जा व रंग संबंधी सुझाव: Û पूजा घर ईशान कोण में ही रखें। Û धन की तिजोरी का मुंह उŸार दिशा में ही रखें। Û रसोई आग्नेय कोण में बनाएं। Û खाना पूर्व या उŸार दिशा की ओर मुख करके खाएं। Û मुख्य शयनकक्ष दक्षिण में बनाएं। Û ईशान कोण में लोहे की अलमारी, लोहे का फर्नीचर व कबाड़ आदि न रखें। Û ब्रह्म स्थान में जूठे बर्तन, चप्पल-जूते व कबाड़ न रखें। Û सीढ़ियों के नीचे रसोई, शौचालय व मंदिर न बनाएं। Û पूर्व, उŸार व ईशान में पहाड़ों का चित्र न लगाएं। Û पहाड़ों का चित्र दक्षिण, पश्चिम या नैऋत्य में लगाएं। Û झरना, नदी, फव्वारा, मछली घर के चित्र या असली के पूर्व, उŸार या ईशान में लगाएं। Û खिड़की या दरवाजे की तरफ पीठ करके न बैठें न खाना बनाएं। Û ईशान व पूर्व दिशा में कूड़ा-करकट, पत्थर व मिट्टी के टीेले आदि न रखें। Û उŸार दिशा में गोबर का ढेर न रखें। Û पश्चिम व नैऋत्य दिशा में आग न जलाएं। Û पूजा घर में हाथ से बड़ी मूर्तियां न रखें। Û ड्राइंग रूम केे शो केस में भगवान की मूर्तियां शो पीस बनाकर न रखें। मूर्तियांे को पूजा घर में रख कर बाकायदा उनकी पूजा करें। Û घर में बंद घड़ियां न रखें, उन्हें चालू करायें या बेच दें। Û बच्चों का अध्ययन कक्ष वायव्य में न बनाएं। Û नौकरों को वायव्य में न ठहराएं। Û नैऋत्य में मेहमानों को न ठहराएं Û विवादों व मुकदमों के कागजात आग्नेय में न रखें। Û घड़ियों को उŸार व पूर्व की दीवार पर लगाएं। Û मुख्य द्वार पर यदि गणेश जी का चित्र लगाना हो तो वैसा ही चित्र उस दीवार के अंदर की तरफ भी लगाएं। Û घर में हिंसक जीव-जंतुओं के चित्र, उदासी वाले चित्र व युद्ध के चित्र न लगाएं। Û ताजे फूल व फलों के चित्र को भी घर में लगाने से वातावरण सुंदर व आनंददायक लगता है। Û घर के सभी सदस्यों का एक संयुक्त चित्र पूर्व की ओर लगाएं। Û दिवंगत पूर्वजों के चित्र दक्षिण दिशा में लगाएं। Û घर का भारी सामान नैऋत्य दिशा में लगाएं। Û घर के सभी दर्पण विभिन्न कक्षों के उŸार या पूर्व की दीवार पर ही लगाएं। Û दिशाओं के ग्रहों के अनुरूप उचित रंगों का प्रयोग उस दिशा के कक्ष में करें।


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