आध्यात्मिक उपायों द्वारा संतान प्राप्ति एवं सुख

आध्यात्मिक उपायों द्वारा संतान प्राप्ति एवं सुख  

व्यूस : 2121 | मई 2006

भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता में वैसे तो सभी सोलह संस्कारों का अपना-अपना महत्व है लेकिन विवाह संस्कार का संपूर्ण संस्कारों में विशिष्ट स्थान है। भारतीय सभ्यता में विवाह संस्कार का संतानोत्पत्ति से ही अधिक तात्पर्य है। घर में संतान होना शुभ माना जाता है।

धार्मिक दृष्टि से मनुष्य पर जो पितृऋण होता है वह संतान प्राप्ति के बाद समाप्त होता है। कुछ ऐसे भी लोग होते हैं जिनको डाक्टर, वैद्य आदि द्वारा इलाज करने पर भी संतान नहीं होती है। जहां मनुष्य के सभी भौतिक प्रयास विफल हो जाते हैं वहां आध्यात्मिक उपाय करने से कार्य सफलता के द्वार खुलते हैं।


Get Detailed Kundli Predictions with Brihat Kundli Phal


जिन लोगों को संतान होने में बाधाएं आ रही हों अथवा मनोवांछित संतान की इच्छा हो, उन्हें अपने घर में संतान गोपाल यंत्र को स्थापित करके संतान गोपाल मंत्र की साधना करनी चाहिए। इस यंत्र के सम्मुख बैठकर संतान गोपाल मंत्र का नित्य श्रद्धा एवं विश्वास पूर्वक जप करने से सुंदर, सुशील, सुसंस्कृत संतान की प्राप्ति होती है। संक्षिप्त पूजन एवं स्थापना विधि: किसी शुभ मुहूर्त में अथवा बृहस्पतिवार को अथवा बुधवार के दिन प्रातःकाल के समय इस यंत्र को पंचामृत से अभिषेक करके पंचोपचार पूजन करके घर के पूजास्थल में स्थापित करें। नित्य निम्न मंत्र का एक माला जप करें।

संतान गोपाल मंत्र ¬ देवकीसुत गोविन्द ! वासुदेव जगत्पते, देहि मे तनयं कृष्णं ! त्वामहं शरणंगत।। रुद्राक्ष की उत्पत्ति देवादिदेव महादेव भगवान शिव के दयारूपी अश्रुओं से हुई है। रुद्राक्ष परम पवित्र तथा भगवान शिव का स्वरूप है। रुद्राक्ष भिन्न-भिन्न मुखों में पाये जाते हैं। सभी रुद्राक्ष मूल रूप से शिव के प्रतीक हैं, लेकिन मुखों के आधार पर शास्त्रों में इनको अलग-अलग देवताओं का स्वरूप माना गया है।

इन्हें अलग-अलग कार्यों में सफलता के लिए धारण किया जाता है। जिन लोगों को संतान सुख एवं संतान प्राप्ति की कामना हो उन्हें दसमुखी रुद्राक्ष एवं चारमुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए। दसमुखी रुद्राक्ष स्वयं भगवान विष्णु का स्वरूप है। कहा भी गया हैः दशवक्त्रो महासेन साक्षात्देवोजनार्दनः। चार मुखी रुद्राक्ष स्वयं ब्रह्मा का स्वरूप है। कहा गया है: चतुर्वक्त्रः स्वयं ब्रह्मा। चार मुखी रुद्राक्ष संसार के उत्पत्तिकर्ता ब्रह्माजी का स्वरूप होने से संतान प्राप्ति एवं वंशवृद्धि के लिए लाभदायक होता है। दसमुखी रुद्राक्ष संसार के पालनकर्ता विष्णु का स्वरूप है। इसे धारण करने से संतानसुख एवं मनोवांछित संतान प्राप्ति में आने वाली बाधाओं का शमन होता है।

इन दोनों रुद्राक्षों को संयुक्त रूप से गले में धारण करने से संतान एवं संतान सुख की प्राप्ति होती है। संक्षिप्त धारण विधि: इन रुद्राक्षों को अपनी सामथ्र्य अनुसार सोने में या चांदी में जड़वाकर सोने या चांदी की चेन में अथवा लाल धागे में सोमवार, गुरुवार के दिन धारण करें। धारण करने से पूर्व इनका गंगाजल, दूध, दही, घी, मधु, शक्कर से अभिषेक करके चंदन, धूप दीप से पूजन करें तथा नित्य निम्न मंत्र का प्रतिदिन एक माला जप करें। मंत्र: ¬ ह्रां ह्रीं ह्रूं सन्तान सुखं कुरु कुरु स्वाहा। अन्यथा संतान गोपाल मंत्र भी जप सकते हैं।


Know Which Career is Appropriate for you, Get Career Report


Ask a Question?

Some problems are too personal to share via a written consultation! No matter what kind of predicament it is that you face, the Talk to an Astrologer service at Future Point aims to get you out of all your misery at once.

SHARE YOUR PROBLEM, GET SOLUTIONS

  • Health

  • Family

  • Marriage

  • Career

  • Finance

  • Business

रुद्राक्ष एवं सन्तान गोपाल विशेषांक  मई 2006

ऐसा माना जाता है कि रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के अश्रु कणों से हुई है। ज्योतिष में प्रचलित अनेक उपायों में से रुद्राक्ष का उपयोग ग्रहों की नकारात्मकता एवं इनके दोषों को दूर करने के लिए किया जाता है ताकि पीड़ा को कमतर किया जा सके। अनेक प्रकार के रुद्राक्षों को या तो गले में या बांह में धारण किया जाता है। रुद्राक्ष अनेक प्रकार के होते हैं। इनमें से अधिकांश रुद्राक्षों का नामकरण उनके मुख के आधार पर किया गया है जैसे एक मुखी, दो मुखी, तीन मुखी इत्यादि। इस विशेषांक में रुद्राक्ष के अतिरिक्त सन्तान पर भी चर्चा की गई है। इस विशेषांक के विषय दोनों है। इसमें रुद्राक्ष एवं संतान दोनों के ऊपर अनेक महत्वपूर्ण आलेखों को सम्मिलित किया गया है जैसे: रुद्राक्ष की उत्पत्ति एवं महत्व, अनेक रोगों में कारगर है रुद्राक्ष, सन्तान प्राप्ति के योग, कैसे जानें कि सन्तान कितनी होंगी, लड़का होगा या लड़की जानिए स्वर साधना से, सन्तान बाधा निवारण के ज्योतिषीय उपाय, इच्छित सन्तान प्राप्ति के सुगम उपाय, सन्तान प्राप्ति के तान्त्रिक उपाय आदि। इन आलेखों के अतिरिक्त दूसरे भी अनेक महत्वपूर्ण आलेख अन्य विषयों से सम्बन्धित हैं। इसके अतिरिक्त पूर्व की भांति स्थायी स्तम्भ भी संलग्न हैं।

सब्सक्राइब


.