हस्तरेखा और मंगल दोष

हस्तरेखा और मंगल दोष  

हस्तरेखा और मंगल दोष कालूराम परमार मानव सृष्टि के प्रारंभ से ही अपने भूत, वर्तमान एवं भविष्य के बारे में जानकारी प्राप्त करने हेतु प्रयासरत रहा है। वर्तमान में इस हेतु ज्योतिष की अनेक विधाएं हैं जिनमें हस्त रेखा शास्त्र अत्यंत प्रचलित है। यह एक ऐसी पद्धति है जिसमें किसी भी अतिरिक्त साधन की आवश्यकता नहीं होती। इसकी सहायता से सुविधानुसार किसी भी समय अपना भूत, वर्तमान और भविष्य जान सकते हंै। पर इसके लिए हस्त रेखा शास्त्री को हाथ की रेखाओं, यवों, चिह्नों, तिलों, धब्बों तथा शरीर पर अन्यत्र विद्यमान अन्य चिह्नों आदि का गहन ज्ञान होना जरूरी है। हर व्यक्ति अपनी समस्याओं से मुक्ति पाने एवं अपने जीवन साथी से सामंजस्य बैठाने की हर संभव कोशिश करता है लेकिन फिर भी जाने-अनजाने तनाव हो ही जाता है। इस तनाव का ज्योतिष में सर्वप्रथम कारण मंगल दोष माना जाता है। यहां हाथ में स्थित मंगल की विभिन्न स्थितियों के दोषों का विवरण प्रस्तुत है। चित्र में मंगल पर्वत को हथेली में दो स्थानों पर चिह्नित किया गया है- एक ऊपर और दूसरा नीचे। ऊपर के मंगल का ज्यादा उन्नत और उभरा होना व्यक्ति में आक्रामकता एवं साहस को बढ़ावा देता है क्यांेकि वह सेनापति है, किसी से हार स्वीकार नहीं करता। फलतः ऐसे व्यक्ति को जब अपने जीवन साथी से कोई हल्की सी भी उलाहना मिलती है तो वह उसे अपने प्रचंड वेग से प्रहार कर उसे नुकसान पहुंचाता है अर्थात् उसे हार स्वाकीर करने को बाध्य करता है। इससे साथी में एक प्रकार की हीनभावना पनपती है और लगाव कम होता जाता है। ऐसे में तलाक भी हो सकता है। यदि इस स्थान पर क्राॅस या सितारा हो तो तलाक की संभावना गंभीर हो जाती है। ऊपर के मंगल का दबा हुआ होना भी एक अशुभ लक्षण है। यदि यह पर्वत अपेक्षा से अधिक दबा हुआ हो तो शय्या सुख में कमी रहती है। पर्वत की इस स्थिति से व्यक्ति में सेक्स के प्रति आसक्ति या विरक्ति देखी जाती है। इस स्थान पर किसी वृत्त, दाग या तिल का होना इसे और ज्यादा पुष्ट करता है। इस स्थिति में व्यक्ति को नेत्र रोग, परिवार में कलह, बड़े भाइयों से विद्वेष, जीवन साथी की आकस्मिक मृत्यु आदि की संभावना रहती है। उसे दुर्घटना द्वारा चोट भी लग सकती है और उसका कोई अंग भंग हो सकता है। ऊपर का मंगल यदि बुध पर्वत की ओर खिसका हो तो जातक का स्वभाव उग्र होता है। वह हमेशा अपने को एक कुशल योद्धा समझता है और हार को पचा नहीं पाता। उसे हल्का सा अपमान भी बर्दाश्त नहीं होता। इस स्थिति का मंगल राहु की तरफ खिसका हो तो जातक कूटनीति एवं षडयंत्र करने वाला होता है। फलतः वह नित नवीन परेशानियों एवं उलझनों से घिरा रहता है। मंगल का अनेक रेखाओं से दबा होना और उस स्थान पर जाल का चिह्न रक्त प्रवाह को असामान्य करता है। फलतः जातक के फोड़ा फंुसी एवं ब्रेन हेमरेज के शिकार होने की संभावना रहती है। नीचे का मंगल क्षेत्र भी इसी प्रकार से उन्नत होने पर जातक अति आत्म विश्वास से युक्त होता है। वह किसी भी कार्य को चुनौती देकर स्वीकार करता है जिससे कभी-कभी व्यर्थ ही उलझनों में फंस जाता है। ऐसे जातक हर दर्जे का दिखावा करते हैं। यह दिखावा जब उनके जीवनसाथी को पता लगता है तो उसका मोह भंग हो जाता है। फलतः दाम्पत्य जीवन में कलह होना शुरू हो जाता है। यह पर्वत अविकसित हो तो जातक हीन भावनाओं से घिर जाता है। वह अपने साथी की कही किसी भी बात को अपने अनुसार देखता है। फलतः टकराव की स्थिति बन जाती है। इस स्थिति को प्रभावी बनाने में कोई अशुभ चिह्न एक उत्प्रेरक की भांति कार्य इस स्थिति के फलस्वरूप व्यक्ति को आर्थिक मुसीबतों और पारिवारिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है और उसकी वाणी प्रभावित होती है। अनावश्यक खर्च भी बढ़ जाता है। यदि नीचे का मंगल शुक्र की ओर झुका हुआ हो तो शुक्र और मंगल से प्रभावित होने के फलस्वरूप वह उग्र स्वभाव का हो जाता है। इस स्थिति में उसमें काम के प्रति आसक्ति बनी रहती है और वह काम पिपासा को शांत करने हेतु किसी भी हद तक जा सकता है। यदि इन दोनों पर्वतों पर द्वीप या क्रास का निशान मिले तो जातक को उसका प्यार न मिले तो वह दुखी होकर आत्महत्या तक कर सकता है। मंगल पर्वत हमेशा अशुभ ही नहीं होता। यदि यह उन्नत हो तो एक सच्चा सहायक भी हो सकता है। उस पर किसी ग्रह का शुभ चिह्न ऊध्र्व रेखाएं या कोई अन्य शुभ चिह्न हो तो यह बहुत ही योगकारक ग्रह बन कर व्यक्ति को सफलता के शिखर पर पहंुचा देता है। इसकी स्थिति, शुभाशुभ चिह्नों की प्रतिक्रिया, अन्य पर्वतों से सामंजस्य एवं हाथ के आकार प्रकार, उंगलियों की बनावट और उन पर स्थित चिह्नों को भी इसके साथ जोड़ कर सही स्थिति का पता लगाया जा सकता है तथा समस्याओं का समाधान किया जा सकता है।



शनि विशेषांक  जुलाई 2008

शनि का खगोलीय, ज्योतिषीय एवं पौराणिक स्वरूप, शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या एवं दशा के प्रभाव, शनि के दुष्प्रभावों से बचने एवं उनकी कृपा प्राप्ति हेतु उपाय, शनि प्रधान जातकों के गुण एवं दोष, शनि शत्रु नहीं मित्र भी, एक संदर्भ में विवेचना

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