उडीसा का प्रसिद्द – विरजा देवी मंदिर

उडीसा का प्रसिद्द – विरजा देवी मंदिर  

व्यूस : 4173 | सितम्बर 2011
उड़ीसा का प्रसिद्ध- विरजा देवी मंदिर नवीन राहुजा भारत वर्ष में हर राज्य में अनेक मंदिर हैं और हर मंदिर का इतिहास अलग-अलग है। हर एक मंदिर किसी न किसी खास वजह से विखयात है। उड़ीसा राज्य में प्रसिद्ध विरजा देवी मंदिर है जो आम लोगों में काफी लोकप्रिय है। विरजा देवी मंदिर की लोकप्रियता का क्या इतिहास है, पढ़िए इस लेख में। उड़ीसा के जाजपुर नामक स्थान पर एक भव्य मंदिर है जो 'विरजा देवी' मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है। विरजा देवी को स्थानीय लोग ही नहीं वरन् दूर-दराज के लोग भी जानते और मानते हैं। याजपुर को उड़ीसा के स्थानीय लोग 'जाजपुर' कहते हैं। यह नाभि गया क्षेत्र और उत्कल का चक्र क्षेत्र माना जाता है। यहां श्राद्ध, तर्पण आदि का विशेष महत्त्व हैं। यह एक छोटा-सा नगर है, जो वैतरणी नदी के तट पर बसा हुआ हैं। इसी क्षेत्र में ब्रह्माजी ने बृहत् यज्ञ किया था। उस यज्ञ से ही विरजा देवी प्रकट हुई थी। ब्रह्माजी के यज्ञ के कारण इस क्षेत्र का नाम यागपुर अथवा यापुर पड़ा जो बाद में जाजपुर के नाम से विखयात हुआ। दक्षिण-पूर्व रेलवे के हावड़ा- वाल्टेयर रेलमार्ग पर हावड़ा से लगभग 337 किमी. की दूरी पर जाजपुर - क्योंझर रोड पर स्थित है। यहीं से इकत्तीस किमी. की दूरी पर याजपुर तीर्थ है, जहां से बसें एवं टैक्सियां आती जाती हैं। यहां पर यात्रियों के ठहरने हेतु धर्मशालाएं तथा लॉज आदि भी उपलब्ध हैं। विरजा देवी मंदिर बस स्टैण्ड से लगभग दो किमी. की दूरी पर हरमुकुंदपुर बस्ती में स्थित है। मुखय मंदिर में विरजा देवी की द्विभुजी मूर्ति प्रतिष्ठित है। इसी मंदिर में देवी के वाहन सिंह की भी मूर्ति है। मंदिर के बाहर शिव, गणेश, हनुमान, काली आदि देवी-देवताओं के भी पृथक-पृथक मंदिर हैं। इस मंदिर के घेरे के भीतर में चौवन शिवलिंग हैं। कहा जाता है कि जिसको पुत्र न होते हों अथवा पुत्र होकर मर जाते हों, उसको इन 54 शिवलिंगों की आराधना करने से निश्चय ही पुत्र प्राप्ति होती हैं। विरजा देवी मंदिर के एक ओर नाभि गया क्षेत्र है जहां पिंडदान किया जाता है। मंदिर के घेरे के बाहर ब्रह्मकुंड नामक एक विशाल सरोवर भी है। यहां से चौथाई कि. मी. की दूरी पर अष्टादश भुजी काली, त्रिलोचन महादेव, तिल भांडेश्वर एवं मंगला देवी के प्राचीन मंदिर हैं। विरजा देवी मंदिर से नगर की ओर लगभग चौथाई किलोमीटर पहले वह स्थान है जहां पर ब्रह्मा जी ने यज्ञ किया था और जिससे विरजा देवी प्रकट हुई थी। वहां से यज्ञ स्थान के स्मृति चिह्न स्वरूप एक विशाल स्तंभ बना हुआ है। गणेश मंदिर बस स्टैंड के समीप ही वैतरणी नदी के तट पर ही है। इसमें गणेश जी की बड़ी भव्य मूर्ति स्थापित है। इसी के निकट सप्तमातृका मंदिर भी है, जिसमें सप्तदेवियों की मानवाकार सात मूर्तियां हैं। यहीं एक मंदिर में श्री लक्ष्मी जी और दूसरे में श्री जगन्नाथ जी के श्री विग्रह भी हैं। अतः आपको भी विरजा देवी के दर्शन अवश्य करने चाहिये तथा उनकी कृपा प्राप्ति करनी चाहिए।

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पुनर्जन्म विशेषांक  सितम्बर 2011

पुनर्जन्म की अवधारणा और उसकी प्राचीनता का इतिहास पुनर्जन्म के बारे में विविध धर्म ग्रंथों के विचार पुनर्जन्म की वास्तविकता व् सिद्धान्त परामामोविज्ञान की भूमिका पुनर्जन्म की पुष्टि करने वाली भारत तथा विदेशों में घटी सत्य घटनाएं पितृदोष की स्थिति एवं पुनर्जन्म, श्रादकर्म तथा पुनर्जन्म का पारस्परिक संबंध

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