बहुविवाह एवं बहुविवाह योग पर विचार

बहुविवाह एवं बहुविवाह योग पर विचार  

प्राचीन में बहुविवाह को अधिक मान्यता थी। इस समय अनेक राजा-महाराजाओं ने अनेकों पत्नियां, दासियां रखते थे। जहां तक देवता भी अनेक पत्नियां व पटरानियां रखते थे। स्वयं भगवान राम के पिता जनक के तीन रानियां थी। कृष्ण ने कई रानियां व सैकड़ों पटरानियां थी। मगर इस युग में (आधुनिक) बहुविवाह प्रचलन पर रोक लगा दी गई। और सरकार द्वारा एक पत्नी ही रखने का विचार पास किया गया। कारण जो भी रहा हो मगर मूलतः कारण जनसंख्या वृद्धि ही था। आओ जानें ज्योतिष दृष्टि में क्या है बहु विवाह या बहु संबंध: सर्व प्रथम ये जाने कि बहु विवाह किन कारणों के कारण होता है। जैसे- संतान का न होना, अधिक कामुकता, पत्नी मनपसंद न होना आदि कारण बहुविवाह को पढ़ाते हैं। इसी प्रकार बहु संबंध भी निम्न कारण से होते हैं। जैसे अधिक कामुकता पत्नी से मनखिन्न रहने के कारण, ग्रृहक्लेश के कारण व्यक्ति अनेक स्त्रियों से संबंध बना लेते हैं। ज्योतिष दृष्टि में जाने किन गृह योगों के कारण होते हैं विवाह अधिक। सप्तम भाव विवाह (पत्नी-पति) का भाव माना गया है। सप्तमेश जो विवाह गृह का स्वामी है यदि पाप ग्रहों से दृष्ट या पाप ग्रहों के मध्य हो, तो दाम्पत्य जीवन को कमजोर करता है यदि सप्तमेश पाप ग्रहों से दृष्ट व द्विस्वभाव राशि में विद्यमान हो, तो व्यक्ति दो या दो से अधिक विवाह करता है। यदि सप्तम में राहू, शनि, मंगल, सूर्य प्रथक कारक गृह हो, तो ये गृह पति-पत्नी अलगाव कराते हैं। जिसके कारण भी व्यक्ति पुनः विवाह कर लेता है। मंागलिक दोष (मंगली) भी दाम्पत्य जीवन में निम्नता लाता है ये दोष लग्न द्वितीय, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम और द्वादश में होने पर यदि सप्तम भाव के दोनों ओर षष्टम या अष्टम में पाप ग्रह हो, तो दाम्पत्य जीवन को कमजोर बनाते हैं। जिसके कारण पत्नी में मनमुटाव, गृह कलह रहती है। जिसके चलते पुनः विवाह की संभावना अधिक बढ़ जाती है। संतान के अभाव के कारण: पंचम भाव या पंचमेश का पीड़ित होना या पंचम भाव पर पाप गृहों की दृष्टि भी संतान पक्ष को कमजोर करती है। जिससे भी व्यक्ति पुनर्विवाह की सोचता है। कुछ संतान प्रतिबधक योग - Û चंद्र और तृतीयेश मेष, कर्क, तुला, धनु, मकर और सिंह राशि में होने पर संतान सुख की प्राप्ति नहीं होती है। Û पंचमेश षष्टम, अष्टम और द्वादश भाव में गुरु से अदृष्ट हों तो भी संतान सुख में बाधा पहुंचाते हैं। Û पंचम भाव में सिंह राशि और वहां शनि मंगल स्थि हो। पंचम, षष्टगत हो संतान बाधक योग होता है। उपरोक्त कारण भी बहु विवाह को मजबूती देते हैं। दाम्पत्य जीवन कलह के कारण: Û सप्तमेश जीवन साथी का प्रतिनिधित्व करता है। यदि यह दूषित हो, तो दाम्पत्य जीवन कलह पूर्ण बना देता है। Û सप्तमेश द्वादश, षष्टम, अष्टम, द्वितीय (अष्टम से अष्टम) में है कारण दाम्पत्य जीवन नीरस बनाते हैं। Û सप्तमेश नीच या शत्रु राशि में या नवांश में हो। Û शुक्र दाम्पत्य जीवन तथा सेक्स का कारण मात्र है। Û कारक तत्व गुरु (स्त्री) शुक्र (पुरुष) का दूषित होना भी दाम्पत्य जीवन को कमजोर बनाता है। उपरोक्त कारण विवाह भी बहु विवाह है। अति कामुकता के कारण: इसे जानने के लिए निम्न कुंडली और भाव पर टिप्पणी करें। निम्न कुंडली मंगल-शनि की संयुक्ति चतुर्थ भाव में चंद्र भावेश के साथ है। शनि वक्री तथा वगोŸामांश में है। मंगल भी नीच अंग होने के कारण बली है। सप्तमस्थ शुक्र पर मंगल राहु की दृष्टि के कारण अति कामुक बना दिया। लग्न, लग्नेश चतुर्थ भाव व चतु पाप गृह से पीड़ित है। किशोरावस्था में शुक्र की महा दशा ने अधिक कामुक बना दिया। सप्तम भाव राहू से पीड़ित इतर संबंध बनवाता है। चतुर्थ भाव व चतुर्थेश और सप्तम भाव पीड़ित हो और शुक्र भाव पाप प्रभाव में हो तो जातक को अति कामुक बना देता है। ये योग ऐसे हैं बहु विवाह या बहु संबंध बनावा देते हैं। पति-पत्नी का मनपसंद ना होना: यदि सप्तमेश सूर्य शनि गृह हो, तो पति उम्र में बड़ा होता है। सप्तम भावेश या भाव राहू, सूर्य से दृष्ट या यें गृह सप्तम में हो, तो पति का अधिक उम्र वाला ईष्र्यालु है। इसमें पंचम भाव का भी शुभ हो मुख्य स्थान रखता है क्योंकि ये स्थान शिक्षा के साथ-साथ प्रेम का भी है। अतः इसका पीड़ित होना भी दाम्पत्य जीवन में दरारें डाल देता है। ये कारण भी विवाह संबंध को निम्न जन्म कुंडली भी दाम्पत्य सुख में निरस्ता का अभाव को दर्शाती है। वृश्चिक लग्न की जन्म कंुडली में लग्न में मंगल सप्तममस्थ शनि दृष्ट होना पति की आयु अधिक होना। शनि से दृष्ट होने के कारण पूर्ण मंगली बनाता है। एक संतान होने के कारण भी दाम्पत्य जीवन नरक सा बन गया। तलाक तक की नौहवत आ पहुंची। आज बहु विवाह को एक तत्व ‘दहेज प्रथा’ ने और बल दिया। आज व्यक्ति धन की लालसा में एक पत्नी से किसी भी कारण के मारता है, अनेक प्रकार से यातनाएं देता है। यहां तक की उसी लीला को समाप्त कर देता है। जिससे वह अन्य विवाह कर सके। दहेज के लालच से व्यक्ति अनेक विवाह कर लेता है। बहु विवाह से होने वाले संकटों में सबसे भीषण समस्या है। जनसंख्या वृद्धि। इसी के कारण बेरोजगारी, अन्न आवास की कमी, पिछड़ापन, आर्थिक परेशानिया आदि कारण होते हैं।ु


प्रेम और विवाह विशेषांक  जनवरी 2007

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