कैसे करें पुखराज रत्न की पहचान

कैसे करें पुखराज रत्न की पहचान  

इस अंक में हम आपको पुखराज के बारे में कुछ खास बातों से अवगत कराएंगे। पुखराज, जिसे अंग्रेजी में YELLOW SAPPHIRE CORUNDUM कहते हैं देखने में हल्के पीले या गहरे पीले रंग का होता है। यह चमकीला और पारदर्शी होता है। यह सफेद रंग का भी होता है जिसे अंगे्रजी में WHITE SAPPHIRE CORUNDUM कहते हैं। असली और नकली पुखराज: पुखराज की तरह देखने वाले कई प्राकृतिक एवं सिंथैटिक रत्न उपलब्ध हैं। सिर्फ आंखांे से पहचान करना बहुत कठिन है। जैसे प्राकृतिक: Yellow Beryl, Natural Zircon, Natural Spiral, Tourmaline, Scapolite, Topaz, Citrine Quartz, Chrysoberyl Etc. कृत्रिम: ैSCZ, Synthetic Spinal, Syn Glass, Synthetic Yellow Sapphire Synthetic Yellow Sapphire भी अलग-अलग विधियों से बनता है। कुछ को तो सिर्फ देखकर पहचानना नामुमकिन सा ही है। जैसे 1Flame Fusion Method 2. Flux Fusion Method 3. Cgochralspi Method 4. Hydrothermal Method 5. Floating Zone Method इसे अलग-अलग को अलग-अलग विधियों से पहचाना जाता है। आइए जानें कि इन सभी में कैसे अंतर किया जाता है। वैसे तो पुखराज को अन्य प्राकृतिक रत्नों से अलग करना कुछ सरल है लेकिन पुखराज को कृत्रिम पुखराज और वह भी अलग-अलग तरीकों से बने हुए पुखराज से सिर्फ देखकर अलग करना बहुत ही कठिन है। इन्हें यंत्र से एक-दूसरे से अलग किया जा सकता है। रत्न प्रयोगशाला में इस्तेमाल होने वाले कुछ खास यंत्र या माध्यम निम्नलिखित हैं। 1. Refractometer : इससे रत्नों की प्रकाश को मोड़ने की क्षमता को आंकते हैं। हर रत्न की अपनी एक निर्धारित सीमा होती है जिसे त्प् अर्थात कहते हैं जो अलग रत्नों के अलग-अलग रासायनिक संयोजन पर आधारित है। पुखराज एवं कृत्रिम पुखराज की त्प् एक सी ही नजर आती 1.76-1.77 क्त् 008 यह एक जैसी इसलिए होती है क्योंकि दोनों का रासायनिक संयोजन एक जैसा होता है जो दूसरे प्राकृतिक रत्न हैं उन्हें बहुत ही सरलता से अलग किया जा सकता है क्योंकि यह कभी भी 1.76-1.77 क्त् 008 न होकर कुछ और मिलेगी जैसे ब्पजतपदम फनंतज्र (सुनैला) की 1.54-1.55 .क्त् 008 2. आपेक्षिक घनत्व: इससे हम रत्न का घनत्व नापकर देखते हैं कि वह पानी से कितना गुना भारी है। इससे प्राकृतिक रत्नों को, जो देखने में एक ही रंग के होते हैं, अलग किया जा सकता है। परंतु प्राकृतिक पुखराज एवं कृत्रिम पुखराज में फर्क नहीं किया जा सकता। 3. Polariscope : कुछ रत्न Singly Refractive SR तथा कुछ Doubly Refractive DR होते हैं। DR में भी Uniaxial एवं Biaxial होते हैं। स्वाभाविक बनावट को देखकर हम यह बता सकते हैं कि अमुक रत्न कौन सा हो सकता है। पुखराज में DR, Uniaxial लेते हैं। इससे हम काफी रत्नों को अलग कर सकते हैं। 4. Dricroscope: इससे हम रत्नों में Pleochroism देखते हैं। ैत् रत्नों में च्समवबीतवपेउ नहीं मिलता, क्त् रत्नों में च्समवबीतवपेउ दिखाई देता है। इसमें भी 2-3 रंग देख सकते हैं। 2 रंग को क्पबीतवपेउ और 3 रंग को ज्तपबीवपेउ कहते हैं। जैसे पुखराज में क्पबीतवपेउ दिखाई देता है परंतु ळसंेे में च्समवबीतवपेउ ही नहीं मिलता। 5. Microscope: यह बहुत महत्वपूर्ण यंत्र है। इससे भी हम बहुत से रत्न अलग कर सकते हैं। पुखराज (प्राकृतिक) में बहुत सी ऐसी खूबियां होती हैं जिनसे आप इसे दूसरे रत्नों से अलग कर सकते हैं। प्राकृतिक पुखराज में Hexagonal Zoning, Hexagonal Crystals, Liquid Fingerprints, Directional Needles, Silk आदि दिखाई दे सकते हैं। Synthetic Yellow Sapphire Immersionscope esa Plato Lines (Fluxo Fusion) दिखाई देते हैं। Gas Bubbles भी दिखाई दे सकते हैं। Synthetic Yellow Sapphire (Hydrothermal) : Reflecting Disks, Seed Plate, Bread Crumbs दिख सकते हैं। Synthetic Yellow Sapphire : Flux Fingerprints, Seed Plate (Flux Fusion) Flux Remnants दिखाई दे सकते हैं। इन सभी खूबियों को देखकर व पहचान कर एक रत्न विशेषज्ञ असली व नकली पुखराज को एक दूसरे से आसानी से अलग कर सकता है। एक विचार: यह धारणा जो रत्न बिल्कुल कांच की तरह साफ होता है उसमें बाल जैसे दिखने वाला कुछ भी नहीं होना चाहिए बिल्कुल गलत है। अच्छे से अच्छे पुखराज में भी कोई न कोई छोटे बाल जैसा प्दबसनेपवद मिल ही जाता है। कांच जितने साफ 1,00,000 पुखराज में से 1 या 2 ही पुखराज निकल पाते हैं तो फिर ये तो बड़े नौ रत्न हैं। Lab Certificate कुछ बातें जो हमेशा ध्यान में रखनी चाहिए - नग खरीदते वक्त सर्टिफिकेट जरूर मांगें। - सर्टिफिकेट पर नग की फोटो होनी चाहिए व अन्य विवरण जैसे: वजन, माप, पहचान चिह्न आदि भी होने चाहिए। इससे कोई भी आपको नकली नग नहीं दे पाएगा। सावधानी: फोटो व अन्य विवरण जरूर देखें क्योंकि आजकल लोग असली सर्टिफिकेट के साथ नकली रत्न दे देते हैं। फोटो व अन्य विवरण की जांच कर इससे बचा जा सकता है।


वक्री ग्रह विशेषांक  अप्रैल 2015

फ्यूचर समाचार के वक्री ग्रह विषेषांक में वक्री, अस्त व नीच ग्रहों के शुभाषुभ प्रभाव के बारे में चर्चा की गई है। बहुत समय से पाठकों को ऐसे विशेषांक का इंतजार था जो उन्हें ज्योतिष के इन जटिल रहस्यों को उद्घाटित करे। ज्ञानवर्धक और रोचक लेखों के समावेष से यह अंक पाठकों में अत्यन्त लोकप्रिय हुआ। इस अंक के सम्पादकीय लेख में वक्री ग्रहों के प्रभाव की सोदाहरण व्याख्या की गई है। इस अंक में वक्र ग्रहों का शुभाषुभ प्रभाव, अस्त ग्रहों का प्रभाव एवं उनका फल, वक्री ग्रहों का प्रभाव, नीच ग्रह भी देते हैं शुभफल, क्या और कैसे होते हैं उच्च-नीच, वक्री एवं अस्तग्रह, कैसे बनाया नीच ग्रहों ने अकबर को महान आदि महत्वपूर्ण लेखों को शामिल किया गया है। इसके अतिरिक्त बी. चन्द्रकला की जीवनी, पंचपक्षी के रहस्य, लाल किताब, फलित विचार, टैरो कार्ड, वास्तु, भागवत कथा, संस्कार, हैल्थ कैप्सूल, विचार गोष्ठी, वास्तु परामर्ष, ज्योतिष और महिलाएं, व्रत पर्व, क्या आप जानते हैं? आदि लेखों व स्तम्भों के अन्तर्गत बेहतर जानकारी को साझा किया गया है।

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