वास्तु सम्मत भवन

वास्तु सम्मत भवन  

कुछ समय पहले पंडित जी का अमेरिका के टेक्सास राज्य की राजधानी ह्यूस्टन में जाना हुआ। वहां एक परफ्यूम व्यापारी श्री रफीक मैहराली के आग्रह पर उनके घर जाने पर पता चला कि जब से वह इस फ्लैट में आये हैं उनको व्यापार में अप्रत्याशित रुप से नये-नये लाभदायक अवसर मिल रहे हैं। उनका विचार था कि इसे बेचकर वे एक विला खरीद लें। पंडित जी ने उनके सारे घर में घूमकर देखा तथा समझाया कि यह एक अत्यंत ही विलक्षण वास्तु विज्ञान द्वारा निर्मित फ्लैट है, तथा उन्हें इसे कदापि नहीं बेचना चाहिए, क्यूंकि अच्छे भाग्य तथा स्वकर्मों के अतिरिक्त हमारे घर/ कार्यस्थल की वास्तु का भी हमारे जीवन की उन्नति में महत्वपूर्ण योगदान होता है। हो सके तो इसे भी रखकर (चाहे किराये पर दे दें) एक बड़ा मकान लिया जा सकता है। जब तक परिवार की जरुरतें पूरी हो रही हों तब तक इस फ्लैट को अपने पास र ख् ा न ा / इ स म े ं रहना चहुँमुखी विकास की ओर अग्रसर करता रहेगा। प्रश्नः- कृपया हमारा नक्शा देखकर बतायें कि क्या वास्तु शास्त्रानुसार इसमें अभी भी और सुधार हो सकता है? जबसे हमने फ्यूचर समाचार में आपके सुझाव पढ़कर ईशान में बनी बैठक को बाहर बनाया है, तथा दक्षिण-पश्चिम के स्टोर का रास्ता शयन कक्ष से बंद किया है, जीवन में आश्चर्यजनक सुधार आये हैं। कृपया बतायें कि घर में शौचालय व स्नानघर कहाँ बना सकते हैं? किशन सिंह, नागौर, राजस्थान उत्तरः- प्रिय किशन सिंह जी, आापका सेप्टिक टैंक बाहर आग्नेय कोण में है जिससे परिवार में विशेषतया पुत्र को स्वास्थ्य संबंधी समस्यायें व धन-हानि होने की संभावनायें बनी रहती हैं। इसे इस स्थान से हटा कर दक्षिण-पूर्वी कोने से 17 फीट छोड़ कर पूर्व में मध्य गेट से पहले बाहर ही बना सकते हैं। - धन संबंधी परेशानियों को तुरंत दूर करने के लिये प्लाॅट के आग्नेय में बंद कोने को खोलने हेतु, गौशाला को दक्षिण-पूर्वी कोने से 18 फीट पीछे हटाकर दक्षिणी दीवार से सटाकर अविलम्ब बनायें। - बिल्ंिडग के दक्षिणी/ दक्षिण-पूर्वी भाग के खुला बरामदे को ढंक दें। सीढ़ियों को पश्चिमी दीवार के साथ वायव्य कोण मे बना सकते हैं। आप चाहंे तो नैर्ऋत्य के स्टोर को मुख्य शयन कक्ष से भी जोड़ सकते हैं। - वायव्य जोन में सीढ़ियों से थोड़ा हट कर शौचालय/स्नानघर बना सकते हैं। सेपिटक टैंक अन्दर बनवाना हो तो ईशान से 27 फीट छोड़कर उत्तरी जोन में कर सकते हंै। - यदि चाहें तो मकान के वायव्य में स्थित कमरे में भी खुले बरामदे की तरफ खुलने वाले दरवाजे लगवाकर, शौचालय तथा स्नानघर बनवाया जा सकता है।


मंगल दोष विशेषांक  जुलाई 2015

फ्यूचर समाचार के इस विशेषांक में मंगल दोष की विस्तृत चर्चा की गई है। कुण्डली में यदि लग्न, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम भाव एवं द्वादश भाव में यदि मंगल हो तो ऐसे जातक को मंगलीक कहा जाता है। विवाह एक ऐसी पवित्र संस्था जिसके द्वारा पुरुष एवं स्त्री को एक साथ रहने की सामाजिक मान्यता प्राप्त होती है ताकि सृष्टि की निरन्तरता बनी रहे तथा दोनों मिलकर पारिवारिक एवं सामाजिक दायित्व का निर्वहन कर सकें। विवाह सुखी एवं सफल हो इसके लिए हमारे देश में वर एवं कन्या के कुण्डली मिलान की प्रथा रही है। कुण्डली मिलान में वर अथवा कन्या में से किसी एक को मंगल दोष नहीं होना चाहिए। यदि दोनों को दोष हैं तो अधिकांश परिस्थितियों में विवाह को मान्यता प्रदान की गई है। इस विशेषांक में मंगल दोष से जुड़ी हर सम्भव पहलू पर चर्चा की गई है। इसके अतिरिक्त स्थायी स्तम्भ में भी विभिन्न विषयों को समाविष्ट कर अच्छी सामग्री देने की कोशिश की गई है।

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