आसानी से पाया जाने वाला अदरक मसाले के अतिरिक्त औषधीय गुणों से भी भरपूर है। अदरक दो रूपों में होता है ताजा व हरा अदरक और सूखा अदरक। आमतौर से सब्जी आदि पकवानों में ताजा अदरक प्रयोग में आता है और सूखा अदरक जिसे सोंठ भी कहते हैं मसालों व औषधियों में प्रयोग किया जाता है। अदरक में अपनी विशेष गंध और चटपटा स्वाद होता है। यह आलू, प्याज आदि की भांति जमीन के नीचे जड़ के रूप में पैदा होने वाला कंद ही है। अदरक में कई पोषक तत्व पाये जाते हैं। पानी, प्रोटीन, वसा, खनिज, रेशे, कार्बोहाइड्रेट्स, कैल्शियम, फाॅस्फोरस, लोहा, विटामिन ‘सी’, ‘बी’ सब अदरक में पाये जाते हैं। आयुर्वेद ने अदरक को एक औषधि माना है। आयुर्वेद के अतिरिक्त अन्य चिकित्सा प्रणालियों ने अदरक को पूरा सम्मान दिया है और इसके प्रयोग से कई रोगों का समाधान हुआ है। विभिन्न रोगों में अदरक द्वारा चिकित्सा: पेट दर्द: सोंठ पाउडर में थोड़ी सी हींग, सेंधा नमक मिलाकर ताजे पानी या गुन-गुने पानी के साथ लेने से पेट दर्द में राहत मिलती है। आसानी से पाया जाने वाला अदरक मसाले के अतिरिक्त औषधीय गुणों से भी भरपूर है। अदरक दो रूपों में होता है ताजा व हरा अदरक और सूखा अदरक। आमतौर से सब्जी आदि पकवानों में ताजा अदरक प्रयोग में आता है और सूखा अदरक जिसे सोंठ भी कहते हैं मसालों व औषधियों में प्रयोग किया जाता है। अदरक में अपनी विशेष गंध और चटपटा स्वाद होता है। यह आलू, प्याज आदि की भांति जमीन के नीचे जड़ के रूप में पैदा होने वाला कंद ही है। अदरक में कई पोषक तत्व पाये जाते हैं। पानी, प्रोटीन, वसा, खनिज, रेशे, कार्बोहाइड्रेट्स, कैल्शियम, फाॅस्फोरस, लोहा, विटामिन ‘सी’, ‘बी’ सब अदरक में पाये जाते हैं। आयुर्वेद ने अदरक को एक औषधि माना है। आयुर्वेद के अतिरिक्त अन्य चिकित्सा प्रणालियों ने अदरक को पूरा सम्मान दिया है और इसके प्रयोग से कई रोगों का समाधान हुआ है। विभिन्न रोगों में अदरक द्वारा चिकित्सा: पेट दर्द: सोंठ पाउडर में थोड़ी सी हींग, सेंधा नमक मिलाकर ताजे पानी या गुन-गुने पानी के साथ लेने से पेट दर्द में राहत मिलती है। अरुचि: अदरक के छोटे-छोटे टुकड़े कर देसी घी में भूनकर नमक मिलाकर खाने से अरुचि समाप्त होती है, भूख लगती है और गैस समाप्त होती है। आफारा: अदरक के टुकड़े को काला नमक लगाकर चूसने और चाटने से आफारा दूर होता है, पेट दर्द, उल्टियां और पेट की ऐंठन भी दूर होती है। अजीर्ण: अदरक के रस में नींबू और पुदीना का रस मिलाकर पीने से लाभ होता है। यदि चाहें तो शहद भी मिला सकते हैं। अजीर्ण दूर करने के लिए अदरक एक महत्वपूर्ण औषधि है। अपच: ताजे अदरक के रस में काला नमक मिलाकर भोजन पूर्व और बाद में पीने से अपच दूर होता है। जिनके पेट में गैस हो जाती है वह भी इससे लाभ उठा सकते हैं। कब्ज: जिन लोगों को कब्ज रहती है वह अदरक को किसी भी रूप में प्रयोग कर लाभ उठा सकते हैं। हिचकी: अदरक के टुकड़े को चूसने से हिचकी बंद हो जाती है। पेट गैस: सोंठ और काला नमक पीसकर पाउडर बना लें। इस चूर्ण को प्रतिदिन नियमित रूप से सेवन करते रहने से पेट गैस दूर हो जाती है। खट्टी डकारें: सोंठ, अजवाइन, काला नमक पीसकर नींबू के रस में मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से खट्टी डकारें बंद हो जाती हैं, पाचन विकार दूर होते हैं। सर्दी, खांसी, जुकाम: सर्दी, खांसी, जुकाम में अदरक राम-बाण का काम करता है। खांसी: अदरक के रस में शहद मिलाकर सेवन करने से खांसी में जल्द आराम आ जाता है। बच्चे के लिए भी यह बहुत प्रभावशाली है। 10 ग्राम अदरक दूध में मिलाकर पीने से सर्दी-खांसी-जुकाम ठीक हो जाता है। जुकाम: सोंठ और मिश्री एक कप पानी में पकाएं। जब पानी आधा रह जाए तो छानकर पी लें। दो-तीन दिन लगातार यह काढ़ा पिएं, जुकाम ठीक हो जाएगा। अदरक और तुलसी की पŸिायों की चाय बनाकर पीने से जुकाम, खांसी और सर्दी दूर हो जाएगी। श्वांस रोग: गुन-गुने पानी में अदरक का रस और शहद मिलाकर पीने से श्वांस विकार दूर हो जाते हैं। यह इन्फ्लूएन्जा और ज्वर को भी ठीक करता है। अदरक, मेंथी दाने और थोड़ी हल्दी पानी में उबालें। जब पानी आधा रह जाए तो ठंडा होने पर शहद मिलाकर पीने से श्वांस रोग ठीक हो जाता है। बुखार: अदरक और पुदीने का काढ़ा बनाकर सेवन करने से बुखार में लाभ होता है, कफ भी शांत हो जाता है। आधा चम्मच सोंठ पाउडर एक कप पानी में इतना उबालें कि आधी रह जाए। इसमें मिश्री डालकर पीने से बुखार उतर जाता है। यदि बुखार अधिक तेज हो तो अदरक के रस में समान मात्रा में शहद मिलाकर चाटने से बुखार की तेजी समाप्त हो जाती है। जोड़ों का दर्द: अदरक शरीर के सभी प्रकारों के दर्द को ठीक करता है। एक चम्मच सोंठ और आधा जायफल दोनों को पीसकर तिल में मिलाकर उसमें कपड़ा भिगोकर जोड़ों पर पट्टी बांधने से दर्द दूर होता है। गठिया रोग में 10 ग्राम सोंठ, 100 ग्राम पानी में उबालकर शहद मिलाकर पिलाने से आराम मिलता है। मासिक-धर्म: जिन स्त्रियों को मासिक-धर्म के विकार हैं उन्हें अदरक के टुकड़े को पानी में उबालकर पीने से आराम होता है। सोंठ और पुराने गुड़ का काढ़ा बनाकर पीने से मासिक-धर्म में लाभ होता है। जिन स्त्रियों को मासिक-धर्म के दिनों में कष्ट होता है वे अदरक का काढ़ा बनाकर रखें और दिन मंे खाना खाने के बाद उसमें शहद मिलाकर पीने से लाभ होता है। पेशाब: जिनको पेशाब करते समय दर्द रहता है और पेशाब के साथ खून आता है उन्हंे चाहिए कि वे सोंठ पाउडर को दूध में मिलाकर पिएं दूध में चीनी व मिश्री मिला सकते हैं। इससे पेशाब संबंधी रोग दूर हो जाते हैं। अदरक का प्रयोग हर प्रकार के रोग, कमजोरी व दर्दों के लिए उŸाम है, घरेलू उपचार में यह अदरक सार्थक है।


डिप्रेशन रोग एवं ज्योतिष विशेषांक  September 2017

डिप्रेशन रोग एवं ज्योतिष विशेषांक में डिप्रेशन रोग के ज्योतिषीय योगों व कारणों की चर्चा करने हेतु विभिन्न ज्ञानवर्धक लेख व विचार गोष्ठी को सम्मिलित किया गया है। इस अंक की सत्य कथा विशेष रोचक है। वास्तु परिचर्चा और पावन तीर्थ स्थल यात्रा वर्णन सभी को पसंद आएगा। टैरो स्तम्भ में माइनर अर्कानाफाइव आॅफ वांड्स 64 की चर्चा की गई है। महिलाओं के पसंदीदा स्तम्भ ज्योतिष एवं महिलाएं में इस बार भी रोचक लेख सम्मिलित किया गया है।

सब्सक्राइब

अपने विचार व्यक्त करें

blog comments powered by Disqus
.