हस्त मुद्रा लक्षण से फलित

हस्त मुद्रा लक्षण से फलित  

हस्त मुद्रा लक्षण से फलित के. के. निगम हाथों को छिपाने या अंगुली से हथेली को ढकने का प्रयास करनाः इस प्रकार का जातक गूढ विचारों वाला होता है तथा अपनी जिज्ञासा जल्दी प्रकट नहीं करता है, गोपनीय प्रवृत्ति का होता है, उसके चरित्र में कुछ कालापन अवश्य होगा तथा वह कपटी, झूठा, पाखंडी व धोखेबाज हो सकता है। हाथों की अंगुलियों को छिपाने का प्रयास करना : इस प्रकार के जातक के मन में कोई गोपनीय बात होती है, वह बात कर्म संबंधी हो सकती है। लचीले और स्फूर्ति भरे हाथ के साथ आना : इस प्रकार के हाथ का जातक तेजस्वी और शक्तिशाली होता है, वह आत्म निर्भर, अल्प भाषी, संयमी और बुद्धिमान होता है। हाथों को ढीला ढाला और निर्जीव सा लटकाए हुए आना- इस प्रकार के हाथ वाला जातक निर्णय और उद्देश्य की मानसिकता से हीन, आलसी और अपने संबंध में अच्छा बुरा सोचने की शक्ति से हीन होता है। हाथों को अपनी-अपनी ओर लटके होना, पर मुठि्ठयां मजबूती से बंद : इस प्रकार के हाथ वाले व्यक्ति किसी बड़े संकल्प या निश्चय को लेकर परेशान होते हैं, परंतु बंद मुठ्ठी यह बताती है कि जातक में अटूट जीवन शक्ति है। दृढ़ निश्चय कैसा और कितना है यह इस बात पर निर्भर करता है कि मुठ्ठी कितनी कोमलता या मजबूती से बंद है। यदि मुठ्ठी कोमलता से बंद है तो यह दृढ़ संकल्प का संकेत देती है पर इसमें आवेश नहीं होता है। परंतु यदि मुठ्ठी कसकर बंधी है तो यह इस बात का संकेत है कि जातक आवेश में भी है। मनुष्य के हाथों को देखकर वास्तविक फलित करने के लिए आवश्यक है कि पृच्छक के आते समय उसके हाथों की गतिविधियों से उसके हाथ दिखाने के पहले ही काफी कुछ जानकारी जातक के विषय में देवज्ञ को प्राप्त हो जाए। बायां हाथ बगल में तथा दायां हाथ सीने पर : इस प्रकार से आने वाले जातक की कलाई यदि शालीनता से मुड़ी हो, मध्यम एवं तर्जनी अंगुलियां आपस में मुड़ी हों तो ऐसा जातक कलात्मक गुणों से भरपूर तथा सुरुचि पूर्वक कार्य करने वाला होता है। इस प्रकार से आने वाले जातक अधिकतर महिलाएं होती हैं। कभी हाथ नीचे करना, कभी जेब में डालना : इस प्रकार से आने वाले जातक का उद्देश्य अनिश्चित होता है, इसके मनोभाव उसके नियंत्रण में नहीं होते किंतु ऐसे जातक अक्सर मजबूत चरित्र के होते हैं किंतु इन्हें निर्देशन की आवश्यकता होती है। हाथों को शरीर के आगे या थोड़ा सा बगल में रहने देना : एैसा जातक शंकालू और शक्की स्वभाव का होता है और हर वस्तु स्थिति की थाह लेने के बाद ही निर्णय लेता है। हाथों को रुमाल से लपेटते- खोलते आना : अपने वस्त्रों को छूते हुए या बटन आदि को छूते हुए आना। इस प्रकार के जातक अधीर, व्यग्र और पलभर में उत्तेजित हो जाने वाले होते हैं। हाथों की मुठि्ठयां कसी हुई, कुहनी झुकी हुई और बांहे कमान की तरह कसी हुई होना : इस प्रकार के जातक दम्मी व लड़ाकू, मनोवृत्ति के होते हैं। दोनों हाथों को इस तरह मलना जैसे धो रहा हो : इस प्रकार से आने वाले जातक धूर्त और चालाक, ढोंगी व अविश्वसनीय प्रकृति के होते हैं। हाथ पीछे परस्पर बंधे हुए और आंखें जैसे कुछ ढूंढ रही हों : इस प्रकार का जातक किसी भी प्रकार के लालच में नहीं फंसने वाला तथा डरपोक होता है।

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कालसर्प योग  मई 2011

बहुचर्चित कालसर्प योग भय एवं संताप देने वाला है। इस विषय में अनेक भ्रांतियां ज्योतिषीय क्षेत्र में पाठकों को गुमराह करती हैं। प्रस्तुत है कालसर्प योग के ऊपर एक संक्षिप्त, ठोस एवं विश्वास जानकारी

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