हीरा शुक्र के शुभ प्रभाव को बढ़ाने के लिए हीरा धारण करना लाभदायक माना गया है। निम्न स्थितियों में हीरा धारण करना आवश्यक हो जाता है: जब शुक्र शुभ भावेश हो और अपने भाव से 6, या 8वें घर में उपस्थित हो। जब शुक्र कुंडली में नीच राशि में हो, वक्री हो, अस्त, हो या पाप ग्रहों के प्रभाव में हो। उपर्युक्त स्थिति के शुक्र की महादशा, या अंतर्दशा चल रही हो। जिन व्यक्तियों को विषैले जीव-जंतुओं के बीच में रहना पड़ता हो। व्यापारिक प्रतिनिधि, फिल्मी अभिनेता एवं अभिनेत्रियां, फिल्म निर्माता तथा किसी भी कला क्षेत्र से जुड़े हुए व्यक्ति तथा प्रेमी-प्रेमिका भी इसे धारण कर लाभ ले सकते हैं। भूत-प्रेत व्याधि से पीड़ित व्यक्ति भी हीरा धारण कर लाभ ले सकते हैं। शुद्ध हीरे को गर्म पानी, गर्म दूध, या तेल में डालने पर यह उसे ठंडा कर देता है। शुद्ध हीरे पर किसी भी वस्तु की खरोंच का चिह्न नहीं बन सकता। दोषयुक्त हीरा कभी धारण न करें। जो हीरा धूम्र वर्ण हो, जो मुख पर लाल, या पीला हो, उसे धारण करें। हीरे पर किसी प्रकार की रेखा, बिंदु, या कटाव नहीं होना चाहिए। अंगूठी में जड़ने के लिए कम से कम एक रत्ती वजन का हीरा होना चाहिए। वैसे जितना अधिक वजन का हीरा धारण किया जाएगा, उतना अच्छा परिणाम प्राप्त होगा। हीरे के साथ माणिक्य, मोती, मूंगा और पीला पुखराज न पहनें। एक बार धारण किये हुए हीरे का प्रभाव 7 वर्ष तक रहता है। उसके बाद उसे पुनः विधिवत दूसरी अंगूठी में धारण करना चाहिए। हीरे को चांदी, या प्लैटिनम में दाहिने हाथ की कनिष्ठिका (सबसे छोटी अंगुली) में शुक्रवार को प्रातः काल धारण किया जाना चाहिए। अंगूठी निर्माण करते समय शुक्र वृष, तुला, या मीन राशि में हो, अथवा शुक्रवार के दिन भरणी, पूर्वाषाढ़, पूर्वाफाल्गुनी में से कोई भी नक्षत्र हो, तब यह अंगूठी निर्माण कर धारण करनी चाहिए। अंगूठी निर्माण के बाद उस अंगूठी की पूजा, प्राण प्रतिष्ठा, हवन आदि क्रिया करने के पश्चात, शुक्रवार को, प्रातःकाल, पूर्व दिशा की ओर मुंह कर के, धारण करनी चाहिए। यदि ऐसा करना संभव न हो, तो शुक्र के पौराणिक मंत्र ‘ऊं शुं शुक्राय नमः’ की एक माला जप कर उपर्युक्त मुहूर्त में अंगूठी धारण की जा सकती है। स्त्रियों को हीरा धारण करने का निषेध मिलता है। इस संबंध में स्वयं शुक्राचार्य ने कहा है: ‘न धारयेत् पुत्र कामानारी वज्रम कदाचनः।’ अर्थात पुत्र की कामना रखने वाली स्त्री को हीरा नहीं पहनना चाहिए। अतः वे स्त्रियां जिनको पुत्र संतान हैं, परीक्षणोपरांत हीरा धारण कर सकती हैं। नियमानुसार धारण किया गया हीरा व्यक्ति को सुख, ऐश्वर्य, राजसम्मान, वैभव, विलासिता आदि देने में पूर्ण सक्षम होता है। लेकिन किसी योग दैवज्ञ से कुंडली परीक्षणोपरांत ही हीरा धारण करें। हीरा अपना शुभाशुभ परिणाम शीघ्र देता है।



रत्न विशेषांक  जून 2009

रत्न विशेषांक में जीवन में रत्नों की उपयोगिता: एक ज्योतिषीय विश्लेषण, विभिन्न लग्नों एवं राशियों के लिए लाभदायक रत्नों का चयन, सुख-समृद्धि की वृद्धि में रत्नों की भूमिका. विभिन्न रत्नों की पहचान एवं उनका महत्व, शुद्धि करण एवं प्राण प्रतिष्ठा तथा रोग निवारण में रत्नों की उपयोगिता आदि के विषय में जानकारी प्राप्त की जा सकती है.

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