व्यावसायिक वास्तु

व्यावसायिक वास्तु  

आज व्यावसायिक वास्तु का क्षेत्र दिनों दिन बढ़ता जा रहा है। दुकान, शोरूम, कार्यालय, बैंक, विद्यालय, क्लीनिक व अस्पताल, शिक्षण संस्थान, रेस्टोरेन्ट, होटल, कसीनो, बार, पेट्रोल पंप, क्लब, ब्यूटी पार्लर, सिनेमा घर व बैन्कवेट हाल सभी व्यावसायिक वास्तु की श्रेणी में आते हैं। व्यावसायिक वास्तु के लिए भी वास्तु के मूलभूत सिद्धांत वही रहते हैं। ब्रह्माण्डीय ऊर्जा व पंचमहाभूतों का तालमेल बनाते हुए नियमों को लागू करना चाहिए। व्यावसायिक वास्तु के लिए भूमि की परीक्षा, मिट्टी की गुणवŸाा, भूमि की ढलान, भूखंड का आकार, भूमि से निकलने वाली वस्तुओं का शुभाशुभ विचार तथा भूमि तक पहुंचने के मार्ग आदि का विचार गृह वास्तु की तरह ही किया जाता है। कुछ नियमों में थोड़ा बहुत अंतर आ जाता है। जैसे गृह वास्तु के लिए सिंह मुखी भूखंड अच्छा नहीं माना जाता लेकिन व्यावसायिक वास्तु के लिए अच्छा माना जाता है। गृह वास्तु में बेसमेन्ट उŸार औरपूर्व में ब्रह्मस्थान को छोड़कर बनानी चाहिए लेकिन व्यावसायिक वास्तु में पूरे भूखंड पर भी बेसमेन्ट बनायी जा सकती है लेकिन ब्रह्म स्थान पर कोई बीम या कालम नहीं आना चाहिए। गृह वास्तु में सामान्यतः दक्षिण में द्वार नहीं बनाये जा सकते हैं। गृह वास्तु के समीप मंदिर व धर्मशाला होना अच्छा नहीं होता, लेकिन व्यावसायिक वास्तु में इनका होना अच्छा होता है। गृह वास्तु में आठों दिशाओं में जिन-जिन चीजों व ढांचागत सिद्धांतों का उल्लेख आया है वे सभी व्यावसायिक वास्तु में भी लागू होगी, जैसे कुआं, बोरिंग, पूजा घर, बगीचा, रसोई घर, जेनरेटर, सीढ़ियां, ओवर हेड टैंक, शौचालय, भोजनालय, भण्डारण व कोषागार आदि अपनी निश्चित दिशाओं में ही होने चाहिए। इसके अतिरिक्त कुछ प्रचलित सूत्र लिख रहे हैं जो व्यावसायिक वास्तु में विशेष रूप से उपयोगी है। व्यावसायिक वास्तु के 42 सूत्र: पं. जयप्रकाष शर्मा (लाल धागे वाले) Û व्यापारिक संस्थान के मालिक को दक्षिण, पश्चिम या दक्षिण पश्चिम (नैऋत्य) में इस प्रकार बैठना चाहिए कि उसका मुंह उŸार या पूर्व की ओर हो। Û दुकान व शोरूम में बिक्री का सभी सामान दक्षिण, पश्चिम एवं वायव्य में रखना चाहिए। Û बिक्री काउन्टर पर खड़े सेल्समैन का मुंह पूर्व या उŸार की ओर होना चाहिए। Û कैशकाउंटर, मालिक या मैनेजर के स्थान के ऊपर कोई बीम नहीं होना चाहिए। Û दुकान/शोरूम में भारी वस्तुएं या कम उपयोगी वस्तुएं नैऋत्य में रखनी चाहिए। Û जो माल काफी दिनों से न बिक रहा हो, उसे वायव्य कोण में रख दें, शीघ्र बिक जाएगा। Û मुख्य कार्यालय का प्रवेश द्वार उŸार या पूर्व की ओर रखें। Û कार्यालय में कैन्टीन आग्नेय कोण में ही बनानी चाहिए। Û कार्यालय में खजांची व लेखा विभाग के कर्मचारियों को उŸार दिशा में बिठाना चाहिए। Û सभी केबिनों के द्वार अंदर की ओर खुलने चाहिए। Û स्वागत कक्ष प्रवेश-द्वार के समीप होना चाहिए व स्वागत कर्ता का मंुह पूर्व या उŸार की ओर हो। Û स्वागत कक्ष में उŸार, पूर्व, ईशान की तरफ सजावटी पौधे व फूलों के गमले लगाए जा सकते हैं। Û सीढ़ियों की संख्या विषम होना शुभ होता है। Û सार्वजनिक सुविधाएं भवन के नैऋत्य या पश्चिमी भाग में बनानी चाहिए। Û रेस्टोरेन्ट का डाइनिंग हाल पश्चिम में बनाना चाहिए। आवश्यकता होनने पर दक्षिण एवं पूर्व में भी बनाया जा सकता है। Û रेस्टोरेन्ट में रसोई आग्नेय में तथा वितरण-काउन्टर वायव्य में बनाया जा सकता है। Û अस्पताल व नर्सिंग होम में दक्षिण का द्वार नहीं बनाना चाहिए। Û अस्पताल का आपातकालीन वार्ड वायव्य के समीप उŸार में बनाना चाहिए। Û अस्पताल में गहन चिकित्सा कक्ष (प्ण्ब्ण्न्ण्) वायव्य में बनाना चाहिए। Û अस्पताल में प्रसूति वार्ड ईशान एवं पूर्व के बीच बनाना चाहिए। Û अस्पताल मंे शल्य चिकित्सा विभाग पश्चिम में बनाना चाहिए Û नैऋत्य कोण में कोई वार्ड नहीं बनाना चाहिए। Û रोगियों के कमरे दक्षिण में नहीं बनाने चाहिए। Û रोगियों के सिर उŸार दिशा में नहीं होने चाहिए। Û मुर्दा घर या पोस्टमार्टम का कमरा दक्षिण में बनाया जा सकता है। Û लिफ्ट उŸार या पूर्व में बनायी जा सकती है। Û अस्पताल में नर्सों का होस्टल वायव्य एवं उŸार के बीच में और डाक्टरों का होस्टल पश्चिम में बनाना चाहिए। Û सिनेमा हाल में पर्दा वायव्य या उŸार में होना चाहिए। Û क्लब में आउट डोर गेम्स के स्टेडियम पूर्व, उŸार या पश्चिम में बनाने चाहिए। Û क्लब में जिम्नेजियम पश्चिम में पूर्व मुखी बनाना चाहिए। Û क्लब में मदिरालय पश्चिम मंे कभी नहीं बनाना चाहिए। Û योगाभ्यास व धन के कमरे पूर्व, उŸार एवं पश्चिम में बनाने चाहिए। Û विद्यालय में अध्यापन के कमरे पूर्व, उŸार एवं पश्चिम में बनाने चाहिए। Û पढ़ते समय विद्यार्थियों का मुंह उŸार या पूर्व की ओर होना चाहिए। Û विद्यालय में स्टाफ रूम वायव्य या उसके आसपास होना चाहिए। Û दुकान में तराजू पश्चिम, दक्षिण या वायव्य में होना चाहिए। Û बर्फखाने में बर्फ का संग्रह वायव्य में होना चाहिए। Û ज्योतिष कार्यालय में पंचांग व पुस्तकें ज्योतिषी के दाएं हाथ की तरफ होनी चाहिए। Û तैयार माल के सेम्पल, बिक्री विभाग से संबंधित अधिकारी व कर्मचारी वायव्य कोण में होने चाहिए।


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