र्नैृत्य में भूमिगत स्रोत/द्वार: नकारात्मक ऊर्जा का भंडार

र्नैृत्य में भूमिगत स्रोत/द्वार: नकारात्मक ऊर्जा का भंडार  

पिछले माह पंडित जी दक्षिण दिल्ली के समृद्ध क्षेत्र फ्रेन्डस कालोनी के एक बंगले का वास्तु परीक्षण करने गए। परिवार में मां और बेटा रहते थे जो कि आर्थिक व मानसिक परेशानियों से गुजर रहे थे। बिना सोचे समझे कई प्राॅपर्टी खरीदने की वजह से उनका धन काफी जगह फंसा हुआ था। दोनों में वैचारिक मतभेद बना रहता है जिसकी वजह से घर में तनाव रहता है। जब बेटा एक साल का था तभी उसके माता पिता का तलाक हो गया था एवं मां ने अकेले ही बेटे को पाल-पोस कर बड़ा किया था। बेटे की शादी में भी विलम्ब हो रहा था। वास्तु परीक्षण करने पर पाए गए दोषः - दक्षिण-पश्चिम में पिछली तरफ भी एक द्वार जो कि अनचाहे खर्चों तथा रिश्तों में दूरी का कारण बनता है इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह भी बना रहता है। - बिल्डिंग आयताकार नहीं थी, पूर्व व दक्षिण कोने कट रहे थे यह अनियमित आकार विकास में अवरोध व घर में जोश/उत्साह व खुशी की कमी का कारण होता है। - दक्षिण-पश्चिम में भूमिगत जल स्रोत बना था जो कि बहुत ही गंभीर वास्तु दोष है। यह आर्थिक व स्वास्थ्य हानि का मुख्य कारण होता है। परिवार के मुखिया के लिए अति दुखद परिस्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं। - पीछे की ओर बनी सीढियों के नीचे स्टोर बनाया हुआ था। सीढ़ियों का नीचे से बंद होना भी सभी ओर से विकास होने में अवरोध उत्पन्न करता है। - रसोई में गैस और सिंक एक ही लाइन में बने थे जिससे घर में वैचारिक मतभेद बना रहता है। सुझाव - दक्षिण-पश्चिम में बने द्वार को हटाकर दीवार बनाने की सलाह दी गई तथा बगल में बने दक्षिण के द्वार को इस्तेमाल करने को कहा गया। - पूर्व में बने स्टोर की ओर तथा रसोई से पीछे की ओर दरवाजा बनाने को कहा गया जो कि वह चाहे तो हमेशा बंद रख सकते हैं तथा पीछे दक्षिण में कटे हुए हिस्से को ऊपर से कवर करने को कहा गया जिससे बिल्डिंग आयताकार हो सके। - भूमिगत जल स्रोत को अच्छी तरह से बन्द करके आगे बने गार्डन में उत्तर-पूर्व में बनाने को कहा गया। - सीढ़ियों के नीचे के हिस्से को दरवाजा हटाकर खोलने को कहा गया जिससे उसके नीचे हवा का प्रवाह हो सके। - सिंक को रसोई के पश्चिम की ओर स्थानांतरित करने को कहा गया। यदि न हो सके तो गैस और सिंक के बीच दो फुट ऊंची पार्टीशन बनावाने को कहा गया। पंडित जी ने उन्हें आश्वासन दिया कि सभी सुझावों को कार्यान्वित करने के पश्चात् उन्हें अवश्य ही लाभ होगा तथा घर में अनवरत खुशियों का आगमन रहेगा।


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संकटमोचक हनुमान विशेषांक  आगस्त 2013

फ्यूचर समाचार पत्रिका के संकटमोचक हनुमान विशेषांक में राम भक्त हनुमान के प्राकट्य की कथा, उपदेश, पूजन विधि, ऐश्वर्यदायी साधना के विभिन्न सूत्र, उनके विभिन्न स्वरूप, विभिन्न रूपों की पूजा से दुःख निवारण, प्रमुख तीर्थ स्थलों का परिचय, पूजा साधना के प्रभाव, चक्र आदि ज्ञानवर्धक आलेख सम्मिलित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त उत्तराखंड की त्रासदी, कृष्ण जन्माष्टमी व्रत, श्रावण में क्यों बढ़ जाता है शिव पूजा का महत्व, अंक ज्योतिष के रहस्य, सत्यकथा, पुरूषोत्तम श्री कृष्ण की अमृतवाणी, त्रिक भावों में ग्रहों का फल एवं उपाय, भुखंड वास्तु व सम्मोहन उपचार तथा धार्मिक क्रिया कलाप का वैज्ञानिक महत्व और ऊर्जा क्षेत्र बढाने के साधन व विवादित वास्तु इत्यादि रोचक आलेख भी पत्रिका की शोभा बढ़ाते हैं।

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