विभिन्न प्रकार की मालाएं उनके उपयोग से लाभ

विभिन्न प्रकार की मालाएं उनके उपयोग से लाभ  

विभिन्न प्रकार की मालाएं तथा उनके उपयोग से लाभ आचार्य रमेश शास्त्री तुलसी माला : यह माला तुलसी के पौधे से निर्मित की जाती है। तुलसी परम पवित्र एवं आध्यात्मिक तथा औषधीय गुणों से अपने आप में परिपूर्ण है। इस माला से भगवान विष्णु, राम, कृष्ण एवं गायत्री मंत्र का जप, अत्यंत शुभदायी होता है। वैष्णव दीक्षा से दीक्षित साधु संत, तथा गृहस्थी भक्तजन इसे कण्ठी के रूप में भी धारण करते हैं। मांसाहार, आदि तामसिक वस्तुओं का सेवन करन वाले लोगों को तुलसी की माला धारण नहीं करनी चाहिए। हल्दी की माला : इस माला को हरिद्रा की गांठ से निर्मित किया जाता है। इस माला का विशेष उपयोग पीताम्बरा देवी, बगलामुखी मंत्र के जप अनुष्ठान में किया जाता है। इसके अतिरिक्त इस माला पर बृहस्पति ग्रह का मंत्र जप भी करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। माला का शुद्धीकरण करने के बाद उपयोग करें। सफेद चंदन की माला : चंदन दो प्रकार का होता है। लाल चंदन एवं सफेद चंदन। अधिकांशतः सफेद चंदन का ही अधिक उपयोग होता है। सफेद चंदन की माला पर महासरस्वती, महालक्ष्मी मंत्र, गायत्री मंत्र आदि का जप करना विशेष शुभफलप्रद होता है। इसके अतिरिक्त इस माला को मानसिक शांति एवं लक्ष्मी प्राप्ति के लिए भी गले में धारण करने से लाभ होता है। फिरोजा माला : फिरोजा एक ऐसा रत्न है जिसका उपयोग अधिकांशतः सभी धर्म के लोग करते हैं। बौद्ध धर्मावलंबी इसे बहुत पवित्र रत्न मानते हैं। विशेष रूप से इस रत्न माला को धारण करने से समाज, घर, परिवार में सभी के साथ प्रेम बना रहता है। इसे धारण करने से नकारात्मक ऊर्जा परिवर्तित होती है जिससे व्यक्ति के जीवन में सुख-सौहार्द बढ़ता है। इस माला को शुक्रवार, या बुधवार को धारण कर सकते हैं।



पुनर्जन्म विशेषांक  सितम्बर 2011

पुनर्जन्म की अवधारणा और उसकी प्राचीनता का इतिहास पुनर्जन्म के बारे में विविध धर्म ग्रंथों के विचार पुनर्जन्म की वास्तविकता व् सिद्धान्त परामामोविज्ञान की भूमिका पुनर्जन्म की पुष्टि करने वाली भारत तथा विदेशों में घटी सत्य घटनाएं पितृदोष की स्थिति एवं पुनर्जन्म, श्रादकर्म तथा पुनर्जन्म का पारस्परिक संबंध

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