अर्क विद्या हीलिंग कोर्स

अर्क विद्या हीलिंग कोर्स  

व्यूस : 1687 | दिसम्बर 2011

ईश्वर ने मानव को अनेक चमत्कारी व गुणकारी शक्तियों से सुशोभित कर पृथ्वी पर अवतरित किया है किंतु उसे स्वयं ही इन शक्तियों और गुणों का ज्ञान नहीं होता लेकिन इसमें मानव जाति का तनिक भी दोष नहीं है क्योंकि आज के आधुनिक जीवन की भागदौड़ में स्वयं के लिए उसके पास पर्याप्त समय नहीं है इसी कारणवश जब तक वह स्वयं को जानेगा नहीं तब तक ईश्वर से प्राप्त इन शक्तियों का मूल्य वह समझ नहीं पाएगा। परंतु आज के इस वैज्ञानिक युग में भी कुछ मनुष्य ऐसे भी हैं जो स्वयं में विद्यमान इन गुणों व शक्तियों का मूल्य भलीभांति जानते है जिससे वह स्वयं तथा अन्य मानव जाति की भलाई का कार्य ईश्वर की आज्ञा मानकर करते हैं।

उनमें से एक है केसरमित्र श्री वी. एस. पी तेनेती। श्री तेनेती जी प्राचीन वैदिक और यौगिक रहस्यमयी सूर्योपासना के मार्ग का प्रचार कर रहे हैं। इस विद्या को ‘‘महाशमन्तक विद्या’’ कहा जाता है जो कि ‘‘अर्क विद्या’’ से प्रारंभ होती है। श्री तेनेती जी इस विद्या का श्रेय अपने सद् गुरु ‘‘आदित्य पूर्णानंद’’ स्वामी जी को जो कि नंदू बाबा के नाम से विख्यात हैं, को अर्पित करते हैं। अर्क-विद्या दो स्तर का बुनियादी पाठ्यक्रम है जो सीखने के लिए आसान व्यवस्थित भक्ति का मार्ग है जिसमें उपदेश क्रिया के मंत्र, मुद्राएं, प्रयोग और साधनाएं हैं। सबसे शक्तिशाली ‘‘स्पर्श स्वर संधाना’’ दिक्षा से साधक को ‘‘सूर्योपासना मार्ग’’ के लिए तैयार किया जाता है।

यह दिक्षा प्रणाली गुरु परंपरा पद्धति द्वारा अपनाई गई है। यह दिक्षा गुरु मित्र द्वारा दी जाती है। इस विद्या का नियमित रूप से अभ्यास करने से शांतिपूर्ण रवैया, अच्छा मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य, सही आध्यात्मिक समझ, आंतरिक दृष्टि, अंतज्र्ञान की क्षमता, विकसित उपचार शक्ति, ब्रह्मांडीय चेतना, सहानुभूति और बिना किसी शर्त के सबसे प्यार करना -- इस प्रकार शिक्षार्थी तनाव को दूर रखने, नकारात्मक अहंकार, दुविधा, चिंता, भय, क्रोध झूठ और आत्मदया को बौद्धिक दृष्टिकोण से दूर करता है। अर्क-विद्या सूर्योपासना का एक उच्च मार्ग है जो कि ‘‘शमन्तक विद्या’’ का आधार स्तर है। यही मार्ग साधक को केसर विद्या तक ले जाता है।

यह मार्ग प्राचीन यौगिक और वैदिक महा-ऋषियों, योगियों और गुरु परंपराओं द्वारा अभ्यास किया जाने वाला सूर्य का गुप्त आध्यात्मिक मार्ग है। अर्क-विद्या द्वारा मानव में विद्यमान चित्त शक्ति को जागृत करने, बढ़ाने और मौजूदा चिकित्सा शक्तियों का उपयोग करने के लिए वांछित भौतिकवादी प्रयोजनों को प्राप्त करने और अंततः ज्ञान के पथ की ओर धकेल देने, सामरिक तरीकों के माध्यम से, ईमानदारी से सभी धर्मों और समुदाय के लिए प्यार का विकास करने के लिए प्रयास करने की शक्ति सिखाता है।

अर्क-विद्या की विशेषताएं:

1. शक्तिशाली मुहूर्तों द्वारा अनेक लक्ष्यों की प्राप्ति।

2. नकारात्मक ऊर्जा, बुरी नजर, दृष्टि दोष तथा वास्तु दोष से मुक्ति पाई जा सकती है।

3. इस विद्या के द्वारा आंतरिक ऊर्जा, आत्मविश्वास तथा जीवन शक्ति के स्तर को शक्तिशाली मंत्रों के द्वारा बढ़ाया जाता है तथा गोपनीय मुद्राओं की सहायता से शारीरिक मानसिक एवं भावनात्म्क समस्याओं का निवारण किया जा सकता है और आध्यात्मिक बाधाओं को भी दूर कर सकते हैं।

4. नव-ग्रह अनुग्रहम द्वारा ग्रहों की शांति।

5. ‘‘करकौन’’ चिकित्सा विधि द्वारा स्वयं तथा दूसरों का उपचार। अंगुलियों के अग्र भाग के स्पर्श द्वारा तथा राशि रत्नों के माध्यम से किया जाता है।

6. ‘‘बिंब’’ ध्यान तथा विशेष ध्यान तकनीकें, कलश प्रतिष्ठान एवं चार दैव्य मुद्रा चिन्ह।

7. वास्तु शास्त्र के मुख्य सिद्धांत

8. इसके द्वारा इन विशेषताओं को बढ़ाया जा सकता है जैसे ब्रह्मवर्चस, तेज शक्ति, रक्तशुद्धि, एकाग्रता क्रियात्मक हुनर, पूर्ण संपन्नता, स्फूर्ति, प्रसिद्धि। डर चिंता, भय, बुरी आदतें तथा मति-भ्रम से मुक्ति पाना।

9. प्रयोगों द्वारा धन बढ़ाना, ऋण से मुक्ति तथा आर्थिक विपत्तियों से निदान।

10. लक्ष्यों और विचारों की अभिव्यक्ति।

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