लाल किताब में ग्रहों की स्थिति अनुसार आयु व मृत्यु

लाल किताब में ग्रहों की स्थिति अनुसार आयु व मृत्यु  

लाल किताब में ग्रहों की स्थिति अनुसार आयु व् मृत्यु भगवान सहाय श्रीवास्तव लाल किताब के अनुसार आयु का विचार चंद्र से करते हैं। चंद्र की भाव स्थिति के अनुसार आयु का निर्धारण किया जाता है। चंद्र का शुक्र से संबंध हो तो आयु 85 वर्ष होगी। पुरुष ग्रह का साथ हो तो 96 वर्ष और पाप ग्रह से संबंध हो तो 30 वर्ष कम होगी। शनि व गुरु की युति वाली कुंडली में जातक की आयु का निर्णय 11वें भाव के ग्रहों से करें। किंतु 11वां भाव रिक्त हो तो जन्मकुंडली चंद्र की आयु के अनुसार ही समझें। गुरु 6,8,10 या 11वें भाव में हो तो आयु 2 वर्ष, शुक्र व मंगल 7वें भाव में हों तो 2 वर्ष, मंगल या बुध 7वें भाव में हो तो 2 वर्ष, बुध, शुक्र व चंद्र 5वें भाव में हों तो 2 वर्ष, चंद्र और केतु पहले भाव में हों और चैथा भाव रिक्त हो तो 2 वर्ष, चंद्र 5वें में हो तो 12 वर्ष, सूर्य 11वें में हो तो 12 वर्ष और शनि 5वें में हो और पुरुष ग्रह का साथ न हो तो जातक दीर्घायु होता है। अल्पायु योग गुरु शत्रु ग्रहों से घिरा हो तो आयु अल्प होती है। बुध, गुरु और शुक्र नौवें भाव में हों तो आयु अल्प होगी। गुरु के शत्रु बुध, शुक्र और राहु नौवें भाव में हों तो आयु अल्प होगी। चंद्र और राहु सातवें या आठवें भाव में हों तो आयु अल्प होगी। बुध नौवें भाव में हो तो प्रत्येक 8वां दिन, मास और 8वां वर्ष अशुभ होगा व किसी पशु के कारण मृत्यु होगी। दीर्घायु योग- चंद्र और गुरु बारहवें भाव में हों तो आयु दीर्घ होगी। जन्म कंुडली में स्थित अशुभ ग्रह वर्ष कुंडली में भी उसी भाव में अशुभ हों तो उस वर्ष में अधिक अशुभ फल प्राप्त होते हैं। जन्म कुंडली के 8वें भाव में स्थित ग्रह जब वर्ष कुंडली के 8वें भाव में आ जाए तो उसके मित्र ग्रह बलि का बकरा बनेगा। छठे भाव में संबंधित ग्रह कारक होगा। छठे भाव में स्थित ग्रह वर्ष कुंडली के लग्न भाव में आ जाए तो उसका मित्र ग्रह बलि का बकरा बनेगा। 8वें भाव में संबंधित ग्रह अल्पायु होने का संकेत देते हैं। जब बारहवां भाव रिक्त हो तो चंद्र जिस भाव में स्थित होगा उस भाव से संबंधित वार को मृत्यु होगी। यदि नौवां व बारहवां भाव रिक्त हो तो 9-12 के सामने का वार लेंगे। कुंडली में प्रत्येक भाव और मृत्य का दिन कोष्ठक के अनुसार समझें। जहां कोष्ठक है वहां अंकित वार ही मृत्यु का दिन होता है। जन्मकुंडली में ग्रहों की स्थिति के अनुसार आयु का वर्णन यहां प्रस्तुत है। चंद्र व केतु छठे भाव में हों या चंद्र छठे व सूर्य 10वें में हो तो आयु अल्प होती है। सूर्य शनि के किसी भाव (9वें या 12वें) में हो या पुरुष ग्रहों के साथ हो तो आयु मध्यम होगी। सूर्य व चंद्र की युति 11वें भाव में हो तो आयु ठीक होगी। चंद्र और केतु पहले भाव में हों और चैथा भाव रिक्त हो तो आयु मध्यम होगी। चंद्र 5वें और सूर्य 11वें में हो और पुरुष ग्रह उनके मित्र हों या न हों तो आयु मध्यम होगी। चंद्र और राहु पहले भाव में हों तो मृत्यु दोपहर में या गोली लगने से होगी। गुरु और राहु दूसरे या बुध और गुरु छठे भाव में हांे तो मृत्यु लंबी बीमारी से होगी। सूर्य और राहु 11वें भाव में हों और 8वें भाव में अल्पायुकारक हो तो आयु 22 वर्ष होगी। दसवें भाव में शनि और दूसरे भाव में स्त्री ग्रह हो या 11वें में सूर्य और राहु हों तथा शनि अशुभ भाव में हो या अशुभ हो और पुरुष ग्रह साथ हों या न हों तो जातक दीर्घायु होगा। चंद्र और राहु छठे भाव में या मंगल अशुभ छठे में हो, और शुक्र व केतु अशुभ हों और बोलते समय दांतों का मांस व कान ऊपर चढ़ जाएं तो आयु 25 वर्ष होगी परंतु मरते समय पुत्र छोड़ जाएगा। बुध व गुरु दूसरे भाव में और राहु तीसरे भाव में हो तो आयु 30 वर्ष होगी। 19 वर्ष की आयु में पिता की मृत्यु व धन हानि हो सकती है। चंद्र, बुध और राहु किसी भी भाव म स्थित हों तो आयु 35 वर्ष होगी। गुरु और राहु 9वें या 11वें में हों तो आयु 40 वर्ष होगी। बुध व केतु 12वें में या गुरु और राहु छठे में हों तो आयु 45 वर्ष होगी। चंद्र पांचवे, दूसरे या छठे भाव के ग्रह अशुभ हों तो आयु 50 वर्ष होगी। चंद्र, राहु और बुध दूसरे या पांचवें भाव में हों तो आयु 56 वर्ष होगी। चंद्र और बुध तीसरे भाव में हों तो आयु 60 वर्ष होगी। शुक्र और चंद्र या चंद्र और राहु 9वें भाव में हों तो 65वें वर्ष में अचानक मृत्यु होगी। शेष आयु- स्वभाव बदल जाए अर्थात् कठोर हृदयी नम्र और नम्र हृदयी कठोर हो जाए तो 1वर्ष शेष है। रात्रि में ध्रुवतारा न दिखाई पड़े तो 40 दिन आयु शेष है। घी, तेल व पानी में अपनी छाया न दिखे तो सात दिन आयु शेष है। सांप काट ले या मुंह से खून बहता रहे तो चार दिन आयु शेष है। इसमें संदेह हो सकता है। सांस लेते समय पेट न हिले और आंख पथरा जाए तो कुछ घंटे की आयु शेष है। हथेली को प्रकाश की ओर करके देखंे, यदि रक्त न दिखे या हथेली सफेद दिखे और शरीर अकड़ जाए तो समझ लें मृत्यु हो गई। मृत्यु कैसे होगी? - चंद्र, शनि और मंगल 5वें या 8वें भाव में हों, शुक्र व अशुभ मंगल की युति न हो तो झगड़े या युद्ध में मृत्यु होगी। शनि और शुक्र की युति 10वें में और सूर्य चैथे में हो तो अचानक मृत्यु होती है। सूर्य उच्च का पहले भाव में हो या स्थित हो और अकेला हो तो समय पर स्वाभाविक मृत्यु होगी। शनि छठे में, बुध तीसरे, 10 वें या 11वें में और शनि 7वें में हो तो पशु द्वारा मृत्यु होगी। बुध 12वें में और शनि 7वें में हो तो मृत्यु आत्महत्या द्वारा होगी। चंद्र और बुध की युति हो और सूर्य अशुभ हो तो इस स्थिति में भी आत्महत्या से मृत्यु होगी। चंद्र और बुध चैथे में हों तो भी मृत्यु आत्महत्या से ही होगी। चंद्र व बुध तीसरे या छठे में हों शनि व चंद्र की युति सातवें में हो और बुध, मंगल व चंद्र 10वें या सातवें में हों तो आघात से अल्पायु में मृत्यु होगी। शुक्र पहले और सूर्य सातवें में हो और साथ में शत्रु या पापी ग्रह हों या वर्ष कुंडली में तीसरे में शत्रु या पापी ग्रह हों और सूर्य व शुक्र पहले, तीसरे या 10वें में हों तो तपेदिक से मृत्यु होगी। सूर्य, बुध और चंद्र की युति चैथे भाव में हो तो घोड़े से गिरकर मृत्यु होगी। चंद्र व राहु की युति चैथे भाव में हो तो फांसी से या कुएं में गिरने या दम घुटने से मृत्यु होगी। शनि तीसरे, बुध 11वें या सूर्य व शनि 10वें और बुध 8वें में हो तो कैद में मृत्यु होगी। बुध और शनि चैथे या बुध, शनि और चंद्र की युति हो और सूर्य स्थापित हो तो हत्या से मृत्यु होगी या हत्यारा हो जाएगा। चंद्र व शनि से बली हों तो परदेश में और सातवें में हों तो अपने देश या मातृभूमि में मृत्यु होगी। चंद्र 10वें में हो और दूसरा भाव रिक्त हो तो फेफड़े व छाती के रोग से मृत्यु होगी। बुध व गुरु आमने सामने हों तो अधरंग से मृत्यु होगी। बुध व गुरु की युति तीसरे में हो तो संताप से मृत्यु होगी। मृत्यु का समय पापी ग्रहों के अशुभ कार्यों का परिणाम है। शुक्र व पापी ग्रह अशुभ हों, बुध, राहु व केतु वर्ष फल में एकत्र हों, तीसरा भाव रिक्त या तीसरे में अशुभ ग्रह हों या 8वां अथवा छठा भाव या दोनों अशुभ हों, बुध तीसरे, 8वें, 9वें या 12वें में हो, शनि-राहु, केतु व चंद्र या चंद्र व राहु 8वें भाव में हांे तो मृत्यु आने का कोई न कोई बहाना बन जाता है। मृत्यु का अंतिम वर्ष व दिन- चंद्र का भाव मृत्यु का अंतिम दिन (वार) होगा और वर्ष कंुडली में चंद्र की स्थिति और 8वें व 12वें भाव के प्रभाव में ज्ञात करेंगे। 8वें या 12वंे भाव में जो ग्रह अशुभ होंगे उनके अनुसार जो पहला वर्ष होगा। वही अंतिम व अशुभ वर्ष होगा। यदि 12वें भाव पर शुभ दृष्टि हो तो मृत्यु नहीं होगी। जब भी शुभ दृष्टि समाप्त होगी वह वर्ष अंतिम वर्ष होगा।



लाल किताब विशेषांक  जून 2008

लाल किताब की उत्पति इतिहास एवं परिचय, लाल किताब द्वारा जन्मकुंडली निर्माण के सिद्धांत एवं विधि, लाल किताब द्वारा फलादेश करने की विधि, लाल किताब में वर्णित उपायों का विस्तृत वर्णन, लाल किताब के सिद्धांत व उपायों की अन्य विधायों से तुलना

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