सिंहस्थ गुरु एवं कुम्भ स्नान

सिंहस्थ गुरु एवं कुम्भ स्नान  

डॉ. अरुण बंसल
व्यूस : 3736 | आगस्त 2015

हरिद्वारे कुंभ योगे मेषार्के कुंभ गुरो। प्रयागे मेषस्थेज्ये मकरस्थ दिवाकरे।। उज्जैन्यां च मेषार्के सिंहस्थे च वृहस्पते। सिंहस्थितेज्य सिंहार्के नासिके गौतमी तटे।। स्कंद पुराण

अर्थात्

कुंभ और मेष राशि में सूर्य होने पर हरिद्वार में, मेष राशि में गुरु और मकर राशि में सूर्य होने पर प्रयाग तथा सिंह राशि में गुरु और मेष राशि में सूर्य होने पर उज्जैन में कुंभ पर्व होता है। सिंह राशि में गुरु और सिंह राशि में ही सूर्य जब होता है, तब नासिक पंचवटी में सिंहस्थ महाकुंभ पर्व मनाया जाता है।

एक स्थान पर कुंभ मेला लगभग 12 वर्षों बाद पड़ता है। गुरु एवं सूर्य की राशि के अनुसार यह पर्व मनाया जाता है:

इस प्रकार कुंभ का मेला, एक निश्चित समय के पश्चात न हो कर, लगभग 12 वर्षों के अंतराल में पुनः उसी स्थान पर मनाया जाता है। गुरु एवं सूर्य के राशि संचरण के अनुसार कभी नासिक में पहले एवं कभी उज्जैन में पहले कुंभ पड़ता है। गुरु इस वर्ष 14 जुलाई को 6ः25 प्रातः कर्क से सिंह राशि में प्रवेश कर रहे हैं। अतः सिंहस्थ गुरु के पर्व 14 जुलाई से ही प्रारम्भ हो रहे हैं। अगस्त 2015 से नासिक/त्र्यंबकेश्वर में कुंभ पर्व मनाया जा रहा है तथा अप्रैल 2016 से यह पर्व उज्जैन में मनाया जाएगा। नासिक में विभिन्न दिनांकों में निम्न विशेष स्नान होंगे:

  • 14 जुलाई: नासिक में राम कुंड पर सिंहस्थ गुरु पर्व
  • 14 अगस्त: अखाड़ों द्वारा ध्वजा आरोहण
  • 26 अगस्त: श्रावण शुक्ल एकादशी स्थान
  • 29 अगस्त: श्रावण पूर्णिमा को प्रथम शाही स्थान
  • 13 सितंबर: भाद्रपद अमावस्या को मुख्य द्वितीय शाही स्थान
  • 18 सितंबर: ऋषि पंचमी का तृतीय स्थान
  • 25 सितंबर: वामन द्वादशी का मुख्य चतुर्थ स्थान
हरिद्वार कुंभ मेष 1998, 2010 2021, 2033
प्रयाग वृषभ मकर 2001, 2013 2025, 2037
नासिक सिंह सिंह 1992, 2003 2015, 2027
उज्जैन सिंह मेष 1992, 2004 2016, 2028

2016 में उज्जैन के साथ हरिद्वार में अर्ध कुंभ भी मनाया जाएगा। 2019 में वृश्चिक के गुरु में प्रयाग में अर्ध कुंभ मनाया जाएगा। अर्ध कुंभ केवल हरिद्वार एवं प्रयाग में मनाया जाता है, उज्जैन एवं नासिक में नहीं। उज्जैन मंे कुम्भ की व हरिद्वार में अर्द्ध कुम्भ की निम्न तारीखें विशेष हैं:

सूर्य, गुरु एवं चंद्र की विविध स्थितियों के अनुसार कुंभ पर्व के आयोजन पर भिन्न-भिन्न चारों स्थलों का शाही स्नान होता है। तदनुसार विभिन्न अखाड़ों के महंतों का स्नान होता है। इसके पश्चात शंकराचार्यों का स्नान होता है। इसके बाद महामंडलेश्वरादि का स्नानादि होता है। कुंभ पर्व पर किये गये धर्म कृत्य कोटि गुणा अधिक फल प्रदान करने वाले होते हैं। अतः इस पर्व पर सभी को धर्म लाभ लेना चाहिए।

इस वर्ष गुरु एवं सूर्य के सिंह राशि में प्रवेश करने पर कार्तिकादि श्रावण मास की अमावस्या, अर्थात 29 अगस्त 2015 को नासिक में राम कुंड में कुंभ पर्व के प्रथम शाही स्नान का आयोजन किया गया है। वैदिक वाङ्मय के अनुसार त्र्यंबकेश्वर में शैव एवं नासिक में, जहां भगवान श्री राम ने अपने बनवास का चैदहवां वर्ष व्यतीत किया था, वैष्णव लोग स्नान करते हैं। यह स्वयं में आश्चर्य की बात है कि कुंभ पर्व में, बिना किसी निमंत्रण के, लाखों-करोड़ों लोग एक ही समय पर, एक ही स्थान पर एकत्रित हो जाते हैं।


अपनी कुंडली में राजयोगों की जानकारी पाएं बृहत कुंडली रिपोर्ट में


कुंभ माहात्म्य

महाभारत एवं अन्य ग्रंथों के अनुसार देवासुर में परस्पर युद्ध के समय समुद्र मंथन हुआ। उस समय अमृत कलश प्राप्त हुआ, जिसे कुंभ भी कहा जाता है।

इस अमृत कुंभ को ले कर प्रयाग, उज्जैन, नासिक, हरिद्वार आदि 4 स्थानों पर विश्राम के समय गरुड़ जी ने वहां देव पूजन किया। इसी बीच अमृत की कुछ बूंदंे वहां छलक पड़ीं, जिस कारण इन 4 स्थलों की धरती को शुचि संज्ञक माना जाने लगा एवं वहां कुंभ पर्व मनाया जाने लगा।

हिंदू धर्म गं्रथों में कुंभ पर्व का अत्यंत विस्तृत उल्लेख पाया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार समस्त देव एवं देवीगण कुंभ पर आगमन कर के आनंदित होते हैं। कुंभ पर्व पर श्राद्ध, यज्ञ, दान, तप, मंत्र सिद्धि आदि प्रमुख रूप से सिद्ध होते हैं।

स्नान विधि

गंगा, यमुना, सरस्वती, कृष्णा, कावेरी, ब्रह्मपुत्र आदि कई ऐसी पवित्र नदियां हैं, जिनमंे स्नान करते समय सर्वप्रथम पैर का स्पर्श अनुचित माना गया है। इस कारण स्नान करते समय सर्वप्रथम थोड़ा सा जल अपने हाथों में ले कर सिर पर छिड़कना चाहिए। तत्पश्चात सारे अंग को नहलाया जा सकता है।

22.04.16 पूर्णिमा स्नान
06.05.16 अमावस्या स्नान
09.05.16 तीज स्नान
11.05.16 पंचमी स्नान
21.05.16 पूर्णिमा स्नान
हरिद्वार
14.01.16 मकर संक्रान्ति पर स्नान
08.02.16 मौनी अमावस्या स्नान
12.02.16 बसंत पंचमी स्नान
22.02.16 माघ पूर्णिमा स्नान
08.03.16 महाशिवरात्रि शाही स्नान
07.04.16 सोमावती अमावस्या शाही स्नान
15.04.16 रामनवमी स्नान
22.04.16 चैत्र पूर्णिमा स्नान
06.05.16 अमावस्या स्नान
21.05.16 वैशाख पूर्णिमा स्नान
simhasth-guru-and-kumbh-snan

क्या करें?

कुंभ पर्व के समय, धर्म सिंधु के अनुसार, 8 दान मुख्य माने गये हैं तथा इनकी विशेषताएं अति लाभकारी हैं। ये आठ दान इस प्रकार हैं: 1. तिल 2. लोहा अथवा लोहे से निर्मित वस्तुएं 3. कपास, अथवा कपास से निर्मित वस्तुएं 4. सोना, सोने से बनी वस्तुएं 5. नमक 6. सप्त धान्य 7. पृथ्वी एवं 8. गाय।

कुंभ पर्व पर भीष्म जी को तर्पण देना सभी के लिए आवश्यक एवं पुण्यकारी माना गया है। कुंभ पर्व पर तांबे के लोटे से सूर्य को अघ्र्य देना अति लाभकारी है। अघ्र्य देने से नेत्र दोष, नव ग्रह दोष, पितृ दोष नष्ट होते हैं। अघ्र्य देने के लिए सूर्योदय के कुछ बाद, लोटे में जल ले कर, हृदय के साथ लगा कर, धीरे-धीरे जल को अटूट धार से गिराना चाहिए। नव ग्रह शांति एवं काल सर्प योग शांति, विष कन्या दोष आदि की शांति भी कुंभ पर्व पर उचित मानी गयी हैं। सौभाग्य एवं सुख की प्राप्ति के लिए कुंभ पर्व पर गंगादि के किनारे की मिट्टी से शिव लिंग निर्मित कर के पार्थिव पूजा करने से सुख-सौभाग्य की निश्चय ही प्राप्ति होती है। अनेक प्रकार के बुरे कर्मों के प्रायश्चितस्वरूप, हृदय तक जल में खड़े हो कर, शुद्ध रुद्राक्ष की माला पर यथाशक्ति 24 संख्यात्मक जप करने से लाभ होता है।

पुत्र प्राप्ति एवं पुत्र सुख के लिए श्रीमद्भागवत कथामृत का पान करना तथा विष्णु एवं कृष्ण को तुलसी, अथवा बेल पत्र से सहस्रार्चन करना निश्चय ही लाभ देते हैं। भाग्योदय एवं धन लाभ आदि के लिए ब्रह्मा एवं एकादश रुद्र की पूजा-उपासना की जाती है। कमल पुष्प से विष्णु पूजन करने पर कुंभ पर्व पर उपस्थित सभी देवताओं को संतुष्टि मिलती है तथा वे आशीष प्रदान करते हैं। पुण्य नदी के किसी भी तीर्थ में स्नान करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं एवं पुण्य की प्राप्ति होती है। कहा गया है कि जो पुण्य कार्तिक माह में हजार बार गंगा स्नान से प्राप्त होता है, माघ माह के सौ स्नान एवं वैशाख में एक लाख नर्मदा स्नान करने पर जो पुण्य प्राप्त होता है, वह पुण्य कुंभ पर्व में एक स्नान से प्राप्त होता है।


To Get Your Personalized Solutions, Talk To An Astrologer Now!




Ask a Question?

Some problems are too personal to share via a written consultation! No matter what kind of predicament it is that you face, the Talk to an Astrologer service at Future Point aims to get you out of all your misery at once.

SHARE YOUR PROBLEM, GET SOLUTIONS

  • Health

  • Family

  • Marriage

  • Career

  • Finance

  • Business


.