नेट परीक्षा - कौन होगा सफल

नेट परीक्षा - कौन होगा सफल  

नीलम शर्मा
व्यूस : 3713 | जनवरी 2013

एक सफल व सुरक्षित भविष्य की तलाश हर युवा पीढ़ी का सपना होती है। वर्तमान समय की चुनौतियों से निबटने के लिए हमारा मेहनती युवा वर्ग अनेक तरह की प्रतियोगिता परीक्षाएं देता रहता है। इन्हीं परीक्षाओं में से एक है नेट की परीक्षा जिसे पास करने का अर्थ है डाॅक्टरेट की उपाधि के लिए रजिस्टर्ड हो जाना तथा पढ़ाई की अवधि के दौरान सरकार से आर्थिक सहायता प्राप्त करना इस परीक्षा में सफल होने वाले विद्यार्थियों को भी 2 तरह की श्रेणियों में बांटा जा सकता है।

1. लेक्चरशिप

2. जूनियर रिसर्च फैलो। पहली श्रेणी में लेक्चरशिप की योग्यता हासिल करने के साथ-साथ लोग पीएच.डी के लिए भी रजिस्टर्ड हो जाते हैं और दूसरी श्रेणी के लोग जो जूनियर रिसर्च फैलो पास करते हैं वे पीएच.डी. में रजिस्टर्ड होने के साथ ही आर्थिक सहायता के दावेदार बन जाते हैं

जो सरकार से पांच साल तक मिलती रहती है। इस दौरान विद्यार्थी बिना किसी झंझट में पड़े अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे सकते हैं। लेकिन ये पांच वर्ष विद्यार्थियों के लिए कड़े परिश्रम व अति धैर्य के होते हैं। इस दौरान उन्हें कई तरह की घरेलू, सामाजिक व मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। यह सब कुछ आसान नहीं होता, पर जो लोग ये कर पाते हैं उनका सुनहरा भविष्य प्रसिद्धि व पैसे का रास्ता खोल देते हैं, किसी भी देश के लिए ये उसकी धरोहर बन जाते हैं।

इस रिसर्च के माध्यम से जिन बच्चों की कुंडली में ऐसी संभावनायें हों उन्हें भविष्य के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है। साथ ही जो लोग नेट की तैयारी कर रहे हैं उनका भी मार्गदर्शन किया जा सकता है। यहां पर उन कुंडलियों को लिया गया है जिन्होंने जूनियर रिसर्च फैलो उत्तीर्ण किया है तथा स्काॅलरशिप ले रहे हैं व शोध कार्य कर रहे हैं। संबंधित पैरामीटर मार्गदर्शन करेंगे -

Û लग्न तथा लग्नेश: किसी भी प्रतियोगिता में सफलता के लिए लग्न या लग्नेश बली होना चाहिए। 

Ûछठा भाव तथा षष्ठेश: छठा भाव प्रतियोगिता तथा संघर्ष का भाव है। किसी भी परीक्षा का सामथ्र्य यही भाव दिखाएगा। छठा भाव जितना बलवान होगा परीक्षा में सफलता की संभावना उतनी ही ज्यादा होगी।

Û पंचम तथा अष्टम का आपस में संबंध पंचम भाव तथा अष्टम भाव में आपस का संबंध स्थिति, युति तथा दृष्टि द्वारा बनना। ये संबंध ही रिसर्च या पीएच.डी. में सफलता दिलाएगा।


अपनी कुंडली में राजयोगों की जानकारी पाएं बृहत कुंडली रिपोर्ट में


Û तृतीयेश का संबंध पंचम, अष्टम या छठे से हो: तृतीय भाव अष्टम से अष्टम है। अष्टम भाव रिसर्च का है। तृतीय भाव ही लिखने का कार्य कराएगा जो थिसिस के रूप में सामने आएगा।

Û धनेश तथा लाभेश का संबंध: द्वितीय तथा एकादश का संबंध पांच, छह तथा आठवें भाव में किसी से भी बनना ही स्काॅलरशिप दिलवाएगा। ये भाव धन तथा इच्छापूर्ति के हैं। ग्रहों में बुध प्रभावशाली रहेगा। बुध बुद्धिजीवी वर्ग का प्रतिनिधित्व करता है। बुध का लग्न में होना या उसका लग्न में बैठना काम को और ज्यादा आसान बनाएगा। बुध लेखन कार्य कराएगा। अष्टकवर्ग में बुध का अच्छा स्कोर सहायता करेगा। आइये देखें कि किस तरह से उदाहरण कुंडलियां ये बातें साबित करेंगी।

कुंडली 1: 10 अगस्त, 1984, 01ः45, वराणसी दशा - केतु/शुक्र/शुक्र स्काॅलरशिप का समय - अक्तू. 2010 से अब तक पैरामीटर व्याख्या Û मिथुन लग्न का स्वामी बुध, तृतीय भाव में बैठकर, लग्न में 35 नं. देकर लग्न को प्रभावशाली बना रहा है।

Û षष्ठेश स्वयं अपने घर में 30 अंकों के साथ बैठकर संघर्ष करने की क्षमता दे रहा है।

Û अष्टमेश शनि पंचम भाव में स्थित है तथा पंचमेश शुक्र लग्नेश बुध के साथ तृतीय भाव में युति में है। यह पीएच.डी. में सफलता का द्योतक है।

Û तृतीयेश की दृष्टि अष्टम भाव पर है तथा पंचमेश शुक्र भी तृतीय भाव में स्थित है।

Û लाभेश तथा धनेश चंद्र ने छठे व आठवें भाव से संबंध बनाकर पीएच.डी से मिलने वाली स्काॅलरशिप को पक्का कर दिया है।

Û दशा - केतु/शुक्र/शुक्र - स्काॅलरशिप के समय दशा पांचवें व छठे घर की मिली। कुंडली 2: 5 सितंबर, 1982, 11ः30, वराणसी दशा - बुध/गुरु/शुक्र स्काॅलरशिप का समय - मई 2006 से मई 2011 तक मिली। पैरामीटर व्याख्या

Û लग्नेश व षष्ठेश स्वयं मंगल है जो पंचमेश गुरु के साथ 12वें घर में स्थित है। योग के अनुसार जब पंचमेश द्वादश में जाएगा तो पढ़ाई पर बहुत खर्च कराएगा या पढ़ाई का खर्च होगा।

Û लग्न व षष्ठेश एक ही होने से लग्न प्रबल है। षष्ठेश अपने घर को देखकर संघर्ष करने की क्षमता दे रहा है।

Û अष्टमेश बुध, तृतीय शनि के साथ युति में, ग्यारहवें घर में, सप्तम दृष्टि से पंचम भाव को देख रहा है।

Û बुध अष्टमेश होकर ईच्छापूर्ति के घर लाभ में बैठा है। धनेश गुरु भी षष्ठेश मंगल के साथ 12वें घर में युति में है अर्थात् प्रतियोगिता से धन लाभ। लेखन कार्य से लाभ शनि व बुध भी दर्शा रहे हैं जो युति में ग्यारहवें घर में है।

दशा विवेचन - बुध/गुरु/शुक्र ग्यारहवें तथा दूसरे घर की दशायें मिलीं जब जातक का स्काॅलरशिप शुरु हुआ। कुंडली 3ः 22 जून, 1983, 01ः30, चंदोली, उ.प्र. दशा - शनि/गुरु/बुध स्काॅलरशिप का समय - सितंबर 2009 से अब तक पैरामीटर व्याख्या Û लग्नेश गुरु है जो त्रिकोण में स्थित है। लग्न में अष्टकवर्ग में 38 नं. है।

Û छठे घर में भी 34 नंबरों के साथ संघर्ष का सामथ्र्य है।

Û अष्टमेश शुक्र पंचम में स्थित होकर और पंचमेश चंद्र अष्टम में स्थित होकर परिवर्तन योग से पीएच.डी में सफलता दे रहे हैं।


जीवन की सभी समस्याओं से मुक्ति प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें !


Û तृतीयेश शुक्र स्वयं अष्टमेश होकर पंचम में स्थित है, तृतीय भाव में बुध विराजमान है।

Û लाभेश शनि अष्टम भाव में बैठकर धनेश को सप्तम दृष्टि से देख रहा है तथा धनेश मंगल भी अष्टम दृष्टि से लाभ भाव को देख रहा है। दशा - शनि/गुरु/बुध की मिली जब स्काॅलरशिप मिलना शुरू हुआ। लग्नेश एकादशेश तथा तृतीय भाव में बैठे बुध की दशा मिली। कुंडली 4: 25 दिसंबर, 1988, 15ः10, गाजियाबाद दशा - बुध/मंगल/शनि स्काॅलरशिप का समय - नवंबर 2012 से आरंभ पैरामीटर व्याख्या Û लग्नेश लग्न को देख रहा है। लग्न में 31 नंबर है अतः लग्न मजबूत है। लग्नेश ही षष्ठेश भी बना है।

Û पंचमेश बुध अष्टम में जाकर रिसर्च का योग दे रहा है, साथ ही अष्टमेश गुरु लग्न में बैठकर पंचम भाव को देख रहा है।

Û धनेश का संबंध अष्टम से तथा एकादशेश का संबंध पंचम से बनाया है।

Û दशा - पंचमेश तथा अष्टम व एकादश में स्थित ग्रहों ने पढ़ाई से आर्थिक लाभ दिलवाया। कुंडली 5: 30.12.1981, 8ः30, जहानाबाद(बिहार) स्काॅलरशिप का समय - जून 2009 से मार्च 2011 तक विषय - गांधी फैलोशिप पैरामीटर व्याख्या Û लग्नेश शनि एकादशेश मंगल के साथ भाग्य स्थान में षष्ठेश की राशि में है।

Û लग्न सर्वाष्टक वर्ग में ज्यादा स्कोर के साथ नहीं है पर लग्न स्वामी की दशम दृष्टि तथा गुरु की नवम दृष्टि अष्टमेश सूर्य की सप्तम दृष्टि और षष्ठेश का अपनी राशि को देखना उसे अत्यधिक बल दे रहा है। वहीं पर राहु भी स्थित है जो शुभ तथा बली है। सर्वाष्टक में छठे घर को 32 का स्कोर मिल रहा है जो लग्न की कमी को पूरा करता है।

Û अष्टमेश सूर्य व षष्ठेश बुध युति के 12वें घर में बैठकर छठे घर से दृष्टि संबंध भी बना रहा है।

Û दशा - जून 2009 से मार्च 2011 कुंडली 6: 10 नवंबर, 1984, 11ः30, जम्मू दशा - राहु/बुध/राहु स्काॅलरशिप का समय - जून 2010 से आरंभ पैरामीटर व्याख्या Û लग्नेश गुरु है।

Û चंद्रमा अष्टमेश को देख रहा है और चंद्र उसकी राशि वृश्चिक को छठे घर में बैठ कर देख रहा है।

Û धनेश शनि ग्यारहवें घर में बैठकर पंचम व अष्टम को दृष्टि दे रहा है। ग्यारहवां घर ईच्छापूर्ति का भी घर है।

Û तृतीयेश भी थीसिस लिखवाने का योग दे रहा है। Û दशा- स्काॅलरशिप के समय की दशा का संबंध भी छठे घर से बन रहा है। कुंडली 7: 10.7.1986, 19ः30, तितलागढ़ (उड़ीसा) दशा - शुक्र/केतु/सूर्य स्काॅलरशिप का समय - मार्च 2011 से आरंभ पैरामीटर व्याख्या Û पंचमेश मंगल लग्न में बैठकर लग्नेश में मेहनत करने की ताकत दे रहा है।

Û मंगल की अष्टम दृष्टि अष्टम भाव पर है जो रिसर्च का योग देता है। Û शनि लाभेश होकर अपने द्वितीय तथा छठे स्थान को देखकर प्रतियोगिता से धन लाभ दे रहा है।

Û एकादशेश शुक्र भी अष्टमेश चंद्र के साथ युति में भाग्य स्थान में है। Û दशा ईच्छापूर्ति के एकादशेश शुक्र व केतु की मिली। कुंडली 8: 23 जून, 1987, 06ः00, मुजफ्फरपुर दशा - राहु/गुरु/गुरु स्काॅलरशिप का समय - जनवरी 2011 से आरंभ पैरामीटर व्याख्या Û लग्नेश बुध लग्न में है। बुध अपने आप में बुद्धिजीवी वर्ग का प्रतिनिधित्व करता है।

Û शुक्र व शनि यानि पंचमेश व अष्टमेश में दृष्टि संबंध है जो रिसर्च का योग देता है।

Û धनेश चंद्र, पंचमेश के साथ युति में होकर छठे भाव को दृष्टि दे रहा है। यह पढ़ाई से धन लाभ का योग है।

Û एकादशेश की दशा मिली जिसने तृतीय, पंचम भाव को मजबूत किया।

Û अष्टकवर्ग में सभी घर मजबूत हैं।

Ask a Question?

Some problems are too personal to share via a written consultation! No matter what kind of predicament it is that you face, the Talk to an Astrologer service at Future Point aims to get you out of all your misery at once.

SHARE YOUR PROBLEM, GET SOLUTIONS

  • Health

  • Family

  • Marriage

  • Career

  • Finance

  • Business

नव वर्ष विशेषांक  जनवरी 2013

futuresamachar-magazine

शोध पत्रिका के इस अंक में विभिन्न विषयों जैसे आप के लिए 2013, 2013 वर्ष में भारत का भविष्य, शकट योग, वैवाहिक जीवन में खुशी, प्रश्न कुण्डली, कारकांश, वास्तु, अंकज्योतिष और वैकल्पिक दशा आदि पर शोध उन्मुख आलेख हैं।

सब्सक्राइब


.