विश्व और भारत पं. अजय भाम्बी आज के समय में चाहे देश हो या विदेश हर जगह परिवर्तन हो रहा है । यह परिवर्तन किसी देश के लिए शुभ है तो किसी देश के लिए अशुभ । परिवर्तन प्रकृति का नियम है और प्रकृति ग्रह, नक्षत्र और राशियों से प्रभावित होती है। नया साल 2013 शुरू होने जा रहा है। इस साल ग्रह, नक्षत्र और राशियों के परिवर्तन से विश्व और भारत में क्या परिवर्तन होंगे। इस विषय पर प्रकाश डाल रहे हैं ख्याति प्राप्त ज्योतिषी श्री अजय भांबी जी। समय चलायमान है जिसके फलस्वरूप इस दुनिया में सब कुछ परिवर्तनषील है। आने वाले क्षण की उत्सुकता प्रत्येक व्यक्ति के मन में कुछ न कुछ घटनाक्रम को जन्म देती है। आने वाला पल आषंकित भी करता है और उसके साथ ढेर सारी संभावनाओं की आहट भी देता है। आम आदमी की जिन्दगी आने वाले कल पर बहुत कुछ निर्भर करती है क्योंकि उसकी सारी उम्मीदें, योजनाएं, कल्पनाएं भविष्य पर ही निर्भर करती हैं। आने वाले कल के साथ अगर एक पूरा साल करवट ले रहा हो तो दुनिया के हर आदमी की अपेक्षाएं उस पूरे साल से हो जाती हैं। 2013 आहट दे रहा है और इसकी दस्तक में बहुत सारे संकेत छुपे हुए हैं जिन्हें हम ज्योतिष के दर्पण से न केवल भली भांति जान सकते हैं बल्कि बहुत हद तक अपनी अनुकूलता के हिसाब से व्यवस्थित भी कर सकते हैं। वैदिक ज्योतिष के हिसाब से नये वर्ष की गणना चैत्र मास के प्रारम्भ से की जाती है जो हर वर्ष मार्च - अप्रैल में पड़ता है। गणना के अनुसार जगत कुंडली बनायी जाती है और विष्व की विभिन्न दिषाओं में बसे देषों में आने वाले वर्ष में राजनैतिक, आर्थिक, सामाजिक, व्यावसायिक घटनाक्रम क्या हो उसका अनुमान समय से पहले ही लगा लिया जाता है। इस वैदिक ज्योतिषीय वार्षिक गणना के अतिरिक्त और भी कई तरह की कुंडलियां बनती हैं। ग्रेगोरियन कैलेण्डर के अनुसार 1 जनवरी 2013 को हम नये वर्ष में प्रवेष कर रहे हैं। इस देष के अधिकतर व्यवसायी दिवाली के दिन से व्यापारिक वर्ष का प्रारम्भ मानते हैं। इसके अतिरिक्त देष के कई प्रान्त मकर राषि में सूर्य


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