वेद विज्ञान पर अन्तर्राष्ट्रीय सम्मलेन

वेद विज्ञान पर अन्तर्राष्ट्रीय सम्मलेन  

व्यूस : 4657 | आगस्त 2006
वेद विज्ञान पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन भारत आदिकाल से वेदों के लिए विश्व में प्रख्यात रहा है। वैदिक युग में भारत में विज्ञान अपने चरमोत्कर्ष पर था, किंतु महाभारत युद्ध के पश्चात सब कुछ नष्ट हो गया और विज्ञान पूर्णतः लुप्त हो गया। ज्योतिष विज्ञान एवं आयुर्वेद भी उस समय अपने चरर्मोत्कर्ष पर थे। आज पुनः ज्योतिष एवं आयुर्विज्ञान की ओर वैज्ञानिक आशा भरी दृष्टि से देखने लगे हैं। हाल ही में एक समाचार पत्र में प्रकाशित समाचार के अनुसार ज्योतिष को मौसम विज्ञान की भविष्यवाणियों के लिए सही पाया गया और इस दिशा में यह अब एक विश्वसनीय आधार माना जा रहा है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि आधुनिक उपकरणों से जो मौसम की जानकारी ली जाती है, वह 30-40 प्रतिशत से अधिक ठीक नहीं होती जबकि ग्रहों के अनुसार लगाए गए अनुमान 60-70 प्रतिशत तक सही उतरते हैं। ग्रहों की स्थिति और गति के अनुसार मौसम की लंबे समय तक की भविष्यवाणी की जा सकती है। अखिल भारतीय ज्योतिष संस्था संघ ज्योतिषीय संस्थाओं का भारत का एकमात्र सबसे बड़ा संघ है। ज्योतिष की सैकड़ों संस्थाएं इसकी सदस्य हैं। इस संघ का कार्य ज्योतिष की शिक्षा देना और इसका देश-विदेश में प्रचार-प्रसार करना है। इस संघ की 125 से अधिक शाखाएं पूरे भारत में फैली हैं। नेपाल, अमेरिका और कनाडा में भी इसकी शाखाएं फैली हुई हैं। इसके 10 हजार से अधिक विद्यार्थी हैं और सैकड़ों विद्यार्थी ज्योतिष के विभिन्न विषयों के शोध कार्य में रत हैं। अखिल भारतीय ज्योतिष संस्था संघ कंप्यूटर ज्योतिष जगत में अग्रणी संस्था फ्यूचर पाॅइंट के साथ मिलकर विदेश में दो सम्मेलनों का आयोजन करने जा रहा है - प्रथम दो दिवसीय सम्मेलन बैंकाक में और द्वितीय एक दिवसीय सम्मेलन सिंगापुर में। इसमें भारत से लगभग 100 ज्योतिर्विद भाग लेने जा रहे हैं। सम्मेलन के मुख्य उद्देश्य हैं: भारतीय ज्योतिष एवं प्राच्य विद्याओं का विदेशों में प्रचार-प्रसार। दूसरे देशों के ज्योतिष के प्रारूप को समझना एवं भारतीय ज्योतिष के साथ उसका तुलनात्मक अध्ययन। यह देखना कि भारतीय ज्योतिष विदेश में कितना कारगर है। विदेश में पैदा हुए जातकों पर स्थान परिवर्तन के कारण इसका फलादेश सटीक बैठता है या नहीं, इसका अध्ययन। ज्योतिष एवं भारतीय प्राच्य विद्याओं के प्रशिक्षण कंेद्र विदेशों में खोलना। ज्योतिष में किए जा रहे शोधों की विषय वस्तु एवं कार्यशैली पर विचार और उसकी जानकारी विदेशों में देकर वहां के ज्योतिर्विदों को शोध के लिए प्रेरित करना। Û अन्य देशों को ज्योतिष के नई दिशाओं में प्रयोग का महत्व बताना - ज्योतिष का उपयोग केवल जातक का भविष्य बताने के लिए ही नहीं किया जाता, बल्कि इसके अनेक जनकल्याणार्थ उपयोग भी किए जा सकते हैं जैसे मौसम की जानकारी, शेयर बाजार एवं खाद्यान्नों के उतार-चढ़ाव और जातक के स्वास्थ्य की जानकारी आदि। थाइलैंड में ज्योतिष की चार संस्थाएं, थाइ-इंडिया कल्चरल इकाॅनाॅमिक कोआॅपरेशन एसोसिएशन, द एस्ट्राॅलाॅजिकल एसोसिएशन आॅफ थाइलैंड, द फेडरेशन आॅफ एस्ट्राॅलाॅजर्स एण्ड थाइ ट्रेडिशनल मेडिसिन एसोसिएशन और द इंटरनेशनल एस्ट्राॅलाॅजर्स एसोसिएशन, मिलकर बैंकाक के हिंदू समाज-देव मंदिर में इस अंतर्राष्ट्रीय ज्योतिष सम्मेलन का आयोजन कर रही हैं। द एस्ट्राॅलाॅजिकल एसोसिएशन आॅफ थाइलैंड के अध्यक्ष आचार्य थानाकोन सिनकसेम, द इंटरनेशनल एस्ट्राॅलाॅजर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष आचार्य पिन्यो पुंगचरन, और द फेडरेशन आॅफ एस्ट्राॅलाॅजर्स एंड थाइ टेªडिशनल मेडिसिन एसोसिएशन के अध्यक्ष आचार्य डुआंगसुरियनीद के प्रतिनिधित्व में लगभग 500 ज्योतिर्विद इस सम्मेलन में भाग लेंगे। थाइलैंड के पूर्व प्रधानमंत्री और थाइ-इंडिया कल्चरल इकाॅनाॅमिक कोआॅपरेशन एसोसिएशन के अध्यक्ष जनरल चवलित यांेगचाइयुध एवं थाइलैंड में भारत के राजदूत एच.ई. विवेक काटजू दोनों मिलकर दिनांक 22 जुलाई, 2006 को प्रातः 10 बजे इस ज्योतिष सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे। सिंगापुर में ज्योतिष सम्मेलन का आयोजन खालसा आॅडिटोरियम में फ्यूचर पाॅइंट एवं सिंगापुर के मशहूर इवेंट आॅर्गेनाइजर ओमेगा पाॅइंट के संयुक्त तत्वावधान में किया जाएगा। ओमेगा पाॅइंट की अध्यक्षा जैक्यूलिन ने सिंगापुर के जाने माने ज्योतिर्विदों व वास्तु शास्त्रियांे को इस समारोह में आमंत्रित किया है। सम्मेलन में जिन विषयों पर परिचर्चा होगी उनमें मुख्य हैं - दोनों देशों के पंचांगों एवं फल कथन विधियों में अंतर, भौगोलिक स्थिति में परिवर्तन के साथ वास्तु कथन में अंतर, भविष्य कथन की कला और अच्छे स्वास्थ्य, सुख एवं समृद्धि की प्राप्ति में यंत्र और मंत्र की उपादेयता। मानसून का फलादेश कैसे किया जाता है इस पर विशेष चर्चा होगी। शेयर बाजार, मुद्रा बाजार, सर्राफा, खाद्यान्न एवं तेल-तिलहन आदि में उतार-चढ़ाव की भविष्यवाणी की तकनीक पर भी विशेष चर्चा होगी। साथ ही वहां के ज्योतिषियों को इस क्षेत्र में शोध करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। गौरतलब है कि अखिल भारतीय ज्योतिष संस्था संघ ने हृदय रोग पर ऐसे कई शोध किए हैं जिनसे यह पता लगाना आसान हो जाता है कि किसी व्यक्ति को किस समय हृदय रोग का दौरा पड़ेगा। सम्मेलन में इस सिलसिले में एक साॅफ्टवेयर का प्रदर्शन भी किया जाएगा। भोजन के द्वारा रोग के निदान पर डाॅ. वेद प्रकाश गर्ग अपना विशेष वक्तव्य देंगे। वे भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद पर भी प्रकाश डालेंगे। इसके अलावा उपस्थित जनसमूह की समस्याओं का ज्योतिषीय समाधान किया जाएगा। इस प्रकार वैदिक ज्ञान जनसमूह तक पहुंचेगा एवं ज्योतिर्विद भी दूसरे देश में इस विज्ञान के उपयोग की जानकारी प्राप्त कर पाएंगे। आशा है इस प्रकार के अंतर्राष्ट्रीय आयोजन ज्योतिष जगत में एक नई पहल की शुरुआत करेंगे और ज्योतिष को विश्व में पुनः स्थापित करेंगे।

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पराविद्याओं को समर्पित सर्वश्रेष्ठ मासिक ज्योतिष पत्रिका  आगस्त 2006

भविष्यकथन के विभिन्न पहलू सभ्यता के प्रारम्भिक काल से ही प्रचलित रहे हैं। वर्तमान परिदृश्य में ज्योतिष, अंकशास्त्र, हस्तरेखा शास्त्र एवं मुखाकृति विज्ञान सर्वाधिक लोकप्रिय हैं। प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन की आगामी घटनाओं की जानकारी प्राप्त करने की इच्छा होती है। इसके लिए वह इन विधाओं के विद्वानों के पास जाकर सम्पर्क करता है। फ्यूचर समाचार के इस विशेषांक में मुख्यतः हस्तरेखा शास्त्र एवं मुखाकृति विज्ञान पर प्रकाश डाला गया है। इन विषयों से सम्बन्धित अनेक उल्लेखनीय आलेखों में शामिल हैं - हथेली में पाए जाने वाले चिह्न और उनका प्रभाव, पांच मिनट में पढ़िए हाथ की रेखाएं, विवाह रेखा एवं उसके फल, संतान पक्ष पर विचार करने वाली रेखाएं, शनि ग्रह से ही नहीं है भाग्य रेखा का संबंध, जाॅन अब्राहम और शाहरुख खान की हस्तरेखाओं का अध्ययन, कैसे करें वर-कन्या का हस्तमिलान, उपायों से बदली जा सकती है हस्तरेखाएं, चेहरे से जानिए स्वभाव आदि। इनके अतिरिक्त स्थायी स्तम्भों के अन्य महत्वपूर्ण आलेख भी शामिल हैं।

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