वायव्य का बढ़ना- प्रगति का रुकना

वायव्य का बढ़ना- प्रगति का रुकना  

व्यूस : 2824 | दिसम्बर 2013
कुछ दिन पहले पं. गोपाल षर्मा जयपुर के एक वरिष्ठ प्रषासनिक अधिकारी श्री अतुल कुमार जी के घर वास्तु निरीक्षण करने गये। उन्होंने बताया कि वे काफी समय से मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं। उनके प्रत्येक कार्य में रुकावट तथा स्वास्थ्य में दिन प्रतिदिन गिरावट हो रही है। उनकी पत्नी ने कहा कि जब से उन्होंने अपने नये मकान में स्थानांतरण किया है तब से ही अनिद्रा व बैचेनी के कारण साहब का स्वभाव चिड़चिड़ा हो गया है। सर्वेक्षण करते समय पाए गए वास्तु दोष: - दक्षिण-पष्चिम में प्रवेष द्वार कार्यों में रुकावट, विचार वैमनस्य, स्वास्थ्य में गिरावट व मान हानि का कारण बनता है। - वायव्य कोण का बढ़ना विय हानि, फिजूल खर्ची व उन्नति में भारी अवरोध पैदा करता है। - उत्तर की ओर सिर करके सोने से बुरे स्वप्न आते हैं व व्यक्ति अनिद्रा तथा सिर के दर्द से पीड़ित रहता है। - उत्तर-पष्चिम वाले षयन कक्ष के सम्मुख दर्पण के होने से सोने वाले व्यक्ति के षरीर के जो अंग दर्पण में दिखते हं उनमें दर्द व रोग हो जाते हैं। सुझाव: - उन्हें कहा गया कि यदि प्रवेष की दिषा बदलनी संभव हो तो प्रवेष द्वार दक्षिण-पूर्व या दक्षिण में बनायें। यदि संभव नहीं है तो दहलीज में एक चांदी की पत्ती डालें व फिर दहलीज बनाकर उस पर पीला पेंट कर दें। - उत्तर-पष्चिम भाग के दोष को समाप्त करने के लिये उत्तर-पष्चिम की ओर से व उत्तर-पूर्व तक परगोला बनाने की सलाह दी, जिससे घर का आकार नियमित हो सके। - उन्हें दर्पण की दिषा बदलने की सलाह दी गई ताकि उसमें सोते वक्त अक्ष न दिखे। यदि संभव न हो तो रात को दर्पण ढंक कर सोयें। - सिर को दक्षिण की ओर करके सोने को कहा। उन्हें बताया गया कि सोते समय सिर पष्चिम व पूर्व में भी कर सकते हैं परन्तु उत्तर पूर्णतया त्याज्य है। पंडित जी ने उन्हें आष्वासन दिया कि सभी सुझावों को कार्यान्वित करने के पष्चात उनको सभी परेषानियों से तुरंत राहत मिलेगी।

Ask a Question?

Some problems are too personal to share via a written consultation! No matter what kind of predicament it is that you face, the Talk to an Astrologer service at Future Point aims to get you out of all your misery at once.

SHARE YOUR PROBLEM, GET SOLUTIONS

  • Health

  • Family

  • Marriage

  • Career

  • Finance

  • Business

पर्व व्रत विशेषांक  दिसम्बर 2013

फ्यूचर समाचार पत्रिका के पर्व व्रत विषेषांक में व्रत और पर्वों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी, उनका धार्मिक महत्व, उनसे जुड़ी शास्त्रोक्त लोक गाथाएं तथा विभिन्न पर्वों के मनाए जाने की विधि और उनके सांस्कृतिक महत्व को दर्शाने वाले अनेकानेक आलेख जैसे विराट संस्कृति के परिचायक हैं भारतीय पर्व, आस्था एवं शांति का पर्व मकर संक्रांति एवं सरस्वती पूजा, होली, गुरु पूर्णिमा, स्नेह सद्भावना एवं कर्Ÿाव्य का सूत्र रक्षाबंधन, शारदीय नवरात्र, महापर्व दीपावली एवं छठ पर्व की आलौकिकता व पर्व व्रत प्रश्नोŸारी सम्मिलित किये गये हैं इसके अतिरिक्त नवंबर मास के व्रत त्यौहार, अंक कुंडली का निर्माण एवं फलादेश, आरुढ़ लग्न का विचार, एश्वर्य और सौंदर्य की रेखाएं, त्रिक भावों ग्रहों का फल एवं उपाय तथा गूगल बाॅय कौटिल्य नामक सत्यकथा को भी शामिल किया गया है।

सब्सक्राइब


.