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वास्तु और हमारा जीवन

वास्तु और हमारा जीवन  

वास्तु और हमारा जीवन १०० वास्तु गुरधिक्षय सयल वास्तु का व्यक्ति के जीवन पर विशेष प्रभाव पड़ता है। वस्तुतः इसका गहरा प्रभाव उस समय विशेष रूप से परिलक्षित होता है, जब कोई व्यक्ति बुरे दौर से गुजर रहा होता है। इसलिए विशेषज्ञों ने घर, आॅफिस के वास्तुदोष के निवारण करने पर जोर देते हैं। वास्तुशास्त्र एक विज्ञान है। किसी भवन में वास्तुदोष होने पर उसका निराकरण वैज्ञानिक तरीके से करना चाहिए। यदि किसी मंदिर का वास्तु ठीक न हो तो वहां भी ज्यादा लोग दर्शन करने नहीं जाते, मंदिर में चढ़ावा भी ठीक से नहीं चढ़ता, जबकि वहां स्वयं भगवान विराजमान रहते हैं। आशय यह कि वास्तु दोष का प्रभाव हर स्थान पर पड़ता है। भवन की बनावट में वास्तु के अनुकूल परिवर्तन करके दोषों को दूर किया जा सकता है। वास्तुदोष निवारणार्थ कुछ नियम निम्नलिखित हैं। इन्हें अपनाने से मानसिक व आत्मिक शांति प्राप्त होती है। मकान चैरस हो, लंबाई व चैड़ाई समान हों या चैड़ाई से लंबाई दोगुनी हो। भोजन पकाने का स्थान (प्लेटफार्म) पूर्व-दक्षिण दिशा में होना चाहिए। इससे भोजन शरीर को लगता है। डायनिंग टेबल गोल या अंडाकार नहीं होनी चाहिए, अन्यथा आपस में झगड़े हो सकते हैं। रसोई घर का मुख्य द्वार भोजन बनाने वाली के ठीक पीछे नहीं होना चाहिए। इस स्थिति में दरवाजा होने पर गृहिणी का पेट या पैर खराब हो सकते हैं। जिस अलमारी में धन इत्यादि रखते हों, उसे उत्तर दिशा में रखें। अलमारी का मुख दक्षिण दिशा में रहने से धन की वृद्धि होती है। सीढ़ियों के नीचे शौचालय या बाथरूम कभी नहीं बनाना चाहिए, न ही बिजली का मीटर या बिजली की माटे र इत्यादि रख।ंे इसस े घर म ंे अशांि त का वातावरण रहता है। घर में झाडू, लकड़ी या निसरनी खड़ी अवस्था में न रखें अन्यथा शत्रु हावी रहते हंै। इन्हें लेटा कर रखें। धन की चाहत रखने वाले झाडू को छिपा कर रखें। घर में संगीत का सामान जैसे तबला, पेटी, ढोलक, सितार इत्यादि फर्श पर रखें। पानी की टंकी मकान के मुख्य दरवाजे के ऊपर कभी नहीं रखनी चाहिए। इससे हृदय संबंधी रोग होने की संभावना रहती है। रसोई घर में चूल्हे (गैस) एवं पानी रखने के स्थान के बीच पर्याप्त दूरी रखें, अन्यथा कलह होने की संभावना रहती है। भगवान या इष्ट देव का स्थान पूर्व-उत्तर दिशा में होना चाहिए। घर में घंटी व घंटा न रखें, न ही बजाएं, अन्यथा आर्थिक संकट पैदा हो सकता है। मकान की छत साफ रखें, छत पर चैखट, फालतू सामान, उल्टा मटका इत्यादि न रखें, इससे दरिद्रता आती है।


व्रत कथा विशेषांक   नवेम्बर 2008

सोमवार से शनिवार तक किये जाने वाले व्रत कथाएँ एवं उनका महत्व, व्रत एवं कथा करने की पूजन विधि एवं दिशा निर्देश, अहोई अष्टमी, करवा चौथ, होली आदि जैसे वर्ष भर में होने वाले सभी विशेष व्रत कथाएँ और उनका महत्व, व्रत एवं कथाओं के करने से मिलने वाले लाभ

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