अनोखी विद्या सोचिए, क्या कह रहे है हस्ताक्षर

अनोखी विद्या सोचिए, क्या कह रहे है हस्ताक्षर  

अनोखी विद्या सोचिए! क्या कह रहे हैं हस्ताक्षर? ओम प्रकाश दार्शनिक जो व्यक्ति अपने हस्ताक्षर अधिकतर हिंदी में अथवा अपनी क्षेत्रीय भाषा में करते हैं, ऐसे व्यक्ति कुछ धार्मिक स्वभाव के, अपने धर्म पर आस्था रखने वाले, थोड़े - से मिलनसार, लोकप्रिय, वाणी पर आस्था रखने वाले, कुछ हरफनमौला तथा रसिक स्वभाव के, समाज के अनुरूप कार्य करने वाले, किंतु धर्म के प्रति कभी-कभी विद्रोह करने वाले भी होते हैं। ऐसे व्यक्तियों के जीवन में अनेक घटनाएं अकस्मात् होती रहती हैं। ऐसे लोग 24-25 वर्ष की अवस्था में नौकरी या व्यवसाय करते देखे गये हैं। ये लोग अपने जीवन में स्थायी कार्य करने वाले, पैतृक धन को बढ़ाने वाले, जीवन में भाई-बहनों से अधिक लगाव रखने वाले व दूसरों की सहायता करने वाले होते हैं, किंतु फिर भी ऐसे लोग कभी-कभी धोखा भी खाते हैं। इनको अपने जीवन में शासन की ओर से अथवा मुफ्त की गाड़ी का योग बनता है। भवन जैसे सामान्य लाभ प्राप्त करने के उपरांत भी ऐसे व्यक्ति स्वयं के परिश्रम व बुद्धि से उŸाम स्थान/पद, प्रतिष्ठा, मान-सम्मान पाते हैं। 27-28 वर्ष की अवस्था में इनको अनेक बार भाग्य सुधारने का अवसर प्राप्त होता है। ऐसे लोग सफलतावादी बनते हैं। 31 वर्ष की आयु के आस-पास, ऐसे लोगों के जीवन में कुछ विशेष परिवर्तन होता है। हिंदी या अपनी क्षेत्रीय भाषा में अधिक हस्ताक्षर करने वाला व्यक्ति घर, परिवार व पत्नी की ओर से कुछ बाधाएं या कम सहयोग पाता है तथा संतान आदि की ओर से उसको चिंता रहती है। एक-दो संतान खंडित हों या अन्य कोई बात हो, लेकिन उसके उपरांत भी उसको समाज मंे मान-सम्मान तथा कुछ विशेष स्थान प्राप्त होता है। ऐसे व्यक्तियों का जीवन भौतिक सुख-साधन से संपन्न रहता है। ऐसे लोग अपनी योजनाओं व लक्ष्य के प्रति सदैव जागरुक रहते हैं। 39-40 की अवस्था के आस-पास शारीरिक व पारिवारिक शुभता व सुख का भी योग बनता है। भोजन व परिधान का सामान्य आकर्षण रहता है। इनके जीवन में हड्डी तथा औजार व गुप्त शत्रुओं से कुछ बाधा हो सकती है। ऐसे व्यक्ति कृत्रिम व्यवहार कम पसंद करते हैं। चूंकि ऐसे लोग स्वयं के परिश्रम से अपने कार्य में प्रगति करते हैं, अतएव इन्हें दूसरों का हस्तक्षेप पसंद नहीं होता। समाज में धीरे-धीरे उच्च स्थान पाने वाले ये अपने पिता से बेहतर जीवन यापन करते देखे गये हैं। अपने सिद्धांत पर चलते हैं। साझे के काम व मुकदमों की तरफ से कष्ट होता है। जातक कुछ नया करने वाला होता है, जिससे उसको लोकप्रियता प्राप्त होती है। यात्राओं का बेहतर लाभ प्राप्त हो सकता है। यदि जातक राजनीति में अथवा किसी धार्मिक संस्था में होता है तो शासन/संस्था के पैसों से दूर-दूर की यात्रा करने वाला होता है तथा अपने जीवन में उŸाम धन संग्रह करता है। चाहे वह नैतिक या अनैतिक ढंग से धन अर्जित करे और अत्यधिक लोभी हो किंतु फिर भी ऐसा व्यक्ति समाज के लिए आदर का पात्र माना जाता है। राज्यपक्ष से धन अर्जित करने वाले व्यक्ति के जीवन में राजदण्ड का भी योग होता है। 41 से 55 वर्ष की आयु तक का समय अच्छा देखा गया है। बचपन की अपेक्षा युवावस्था श्रेष्ठ रहती है। मृत्यु अचानक देखी गयी है। पूर्ण आयु 70 वर्ष से अधिक का योग बनता है। अपनी क्षेत्रीय भाषा या हिंदी में हस्ताक्षर करने वाला यदि लाल स्याही का उपयोग करता है तो जातक प्रबल भाग्यशाली देखा गया है। समाज उसको मुफ्त में ही सब कुछ प्रदान करता है। उसका जीवन पूर्णरूप से अपने उद्देश्य में सफल होता है। यदि हरी स्याही के साथ हस्ताक्षर किया गया है तो कुछ पारिवारिक दोष बनते देखा गया है। इतने पर भी वह उŸाम पद का भोगने वाला होता है, किंतु वह कई उतार-चढ़ाव देखता है। मृत्यु अचानक देखी गयी है। धर्म के प्रति विशेष स्थान तथा अपने कुल से उŸाम जीवन यापन करता पाया गया है। नीली या किसी विशेष प्रकार की स्याही से हिंदी में हस्ताक्षर जातक मंे कुछ आत्म-विश्वास की कमी की ओम प्रकाश दार्शनिक ओर संकेत करता है। अपने काम से जातक को संतोष प्राप्त नहीं होता है। उसको अपने जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखने पड़ते हैं। इसी प्रकार जब कोई व्यक्ति अंग्रेजी के ही अपने हस्ताक्षर कई तरह से करते हैं, ऐसे व्यक्ति अपने काम के प्रति अधिक जागरुक देखे गये हैं, ये दिखावा पंसद करने वाले होते हंै तथा समाज के सामने दोहरा चरित्र रखने वाले होते हैं। ऐसे लोग अपनी योजनाएं दूसरों को तब तक नहीं बताते, जब तक कि वे अपनी योजनाओं में सफलता नहीं प्राप्त कर लेते। अपने निवास स्थल, वस्त्रों तथा सामानों को काफी उŸाम ढंग से रखने वाले तथा अपना कुछ सामान आदि अन्य जनों को उधार देने आदि में काफी सोच-विचार करते हैं। उŸाम ढंग से रहना, दिखावा करना, अधिक पसंद करते हैं। खाने-पीने के प्रति इन लोगों का विशेष लगाव होता है तथा स्वादिष्ट व चटपटे व्यंजन के शौकीन होते हैं। 22-24 वर्ष की आयु के दरम्यान इनका भाग्योदय होते देखा गया है। ऐसे लोग पैतृक संपŸिा के प्रति कम स्नेह रखने वाले तथ स्वयं द्वारा अर्जित धन पर विशेष भरौसा करते हैं। ऐसे जातक भाई- बहनों की तरफ से अल्प सहयोग प्राप्त करने वाले किंतु दूर रहने वाले लोगों से अपना काम निकलवाना भली-भांति जानते हैं। 37-38 वर्ष की अवस्था के मध्य कुछ शारीरिक बाधा व कष्ट पाते देखे गये हैं। उŸाम भवन तथा वाहन के शौकीन होते हैं किंतु इच्छा पूर्ण होने में संदेह पाया गया है। शिक्षा के प्रति विशेष लगाव, संतान की ओर से लाभ व सहरोग का योग बनता है। 39-50 तक का समय श्रेष्ठ जीवन यापन वाला रहता है। जीवन में राजयोग, रक्तचाप तथा कुछ दीर्घकालिक बीमारी का शिकार होना पड़ता है। एक-दो प्रेम संबंध या स्त्री-पक्ष से धोखा पाते हैं तथा शिक्षा में बाधा एक बार या शिक्षा के लिए घर से दूर जाना पड़ सकता है। दूसरों को मार्ग-निर्देशन देने वाला शिक्षा देने वाला, चालाक तथा अवसर का लाभ प्राप्त करने वाला, तथा तर्क-बितर्क करने वाला होता है। ऐसे व्यक्ति जन्म-भूमि से दूर रहने के पक्ष में अधिक विश्वास करने वाले, कई तरह से सफलता पाने के चक्कर में कभी-कभी धोखा खाते पाये गये हैं। इनके जीवन में अंग-भंग होता है। मुकदमों तथा वाद-विवादों में विजय पाने वाले, वृद्धावस्था में मौजमस्ती रहती है स्त्री का साथ पहले छूट जाता है, यदि ऐसे व्यक्ति कुछ जिम्मेदारी वाली कुर्सी पर होते हैं तो दूसरों के प्रति अपना रौब दिखा करके धन अर्जित करते हैं। धन संग्रह करने में आगे रहते हैं। अकस्मात कुछ सफलता प्राप्त करने वाले जातक को 74 वर्ष से अधिक की आयु का योग देखा गया है। ऐसे लोग अपने दायित्वों को पूर्ण करने के उपरांत ही अपना शरीर त्यागते हैं। जो लोग हिंदी तथा अंग्रेजी दोनों तरह के हस्ताक्षर कई तरह से करते हैं, ऐसे लोग कुछ संकोची स्वभाव के होते हैं, रहस्यवादी तथा दूसरों पर शीघ्र विश्वास नहीं करते हैं। अपनी सभी बातों को काफी सोच-समझकर दूसरों के सामने रखते हैं तथा अकस्मात धन को प्राप्त करते हैं। कुछ खोजी तथा खुफिया संबंधी कार्यों के प्रति, दलाली या कुछ ऐसा कार्य करने पर विशेष सफलता प्राप्त करने वाले, उच्च श्रेणी का वाहन, भवन का सुख स्वयं के सामथ्र्य से प्राप्त करते हैं। इनकी संतान कुल का नाम रोशन करने वाली तथा जातक को स्त्री-पक्ष से विशेष सहयोग प्राप्त होता है। सुंदर तथा दायित्व का निर्वाह करने वाली पत्नी पाते हैं। पारिवारिक जीवन में सामान्य सफलता पाने वाले एवं 26-28 वर्ष की आयु के मध्य/बाद में उŸाम ढंग से जीवन यापन करने वाले होते हैं। किंतु समाज से कुछ कटा रहता है। 41-44 वर्ष की अवस्था के मध्य कुछ शारीरिक दोष विशेष बनाता है, जबकि 30-40 का समय विशेष सफलताकारी से दूर होती है। धर्म के प्रति हठी, 45-55 का समय श्रेष्ठ रहता है। अस्त्र-शस्त्र के शौकीन तथा जन्म-भूमि से दूर रहने पर विशेष सफलता पाने वाले जातक का राज्यपक्ष से कुछ दण्ड का योग बनता है। जीवन रहस्यमय बना रहता है तथा कुछ विवाहित व्यक्ति इस श्रेणी में आते हैं। 68 वर्ष से अधिक आयु का योग बनता है किंतु अकस्मात घटना आदि भी हो सकती है।



स्वप्न, शकुन व् हस्ताक्षर विशेषांक  जून 2012

फ्यूचर समाचार पत्रिका के स्वप्न, शकुन व हस्ताक्षर विशेषांक में हस्ताक्षर विज्ञान, स्वप्न यात्रा का ज्योतिषीय दृष्टिकोण, स्वप्न की वैज्ञानिक व्याख्या, अवधारणाएं व दोष निवारण, स्वप्न का शुभाशुभ फल, जैन ज्योतिष में स्वप्न सिद्धांत, स्वप्न द्वारा भाव जगत में प्रवेश, शकुन शास्त्र में पाक तंत्र विचार. शकुन एवं स्वप्न का प्रभाव, शकुन एवं स्वप्न शास्त्र की वैज्ञानिकता, शकुन शास्त्र व तुलसीदास, हस्ताक्षर द्वारा व्यक्तित्व की पहचान, स्वप्नों द्वारा समस्या समाधान आदि रोचक, ज्ञानवर्द्धक आलेख शामिल किये गए हैं। इसके अतिरिक्त वास्तु परामर्श, वास्तु प्रश्नोतरी, विवादित वास्तु, यंत्र समीक्षा/मंत्र ज्ञान, हेल्थ कैप्सुल, लाल किताब, ज्योतिष सामग्री, सम्मोहन, सत्यकथा, स्वास्थ्य, पावन स्थल, क्या आप जानते हैं? आदि विषयों को भी शामिल किया गया है।

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