संपूर्ण नवग्रह शांति यंत्र

संपूर्ण नवग्रह शांति यंत्र  

व्यूस : 5351 | दिसम्बर 2007
संपूर्ण नव ग्रह शांति यंत्र आचार्य. रमेश शास्त्राी संपूर्ण साधना विधि यंत्र-मंत्र-तंत्र द्वारा की जाती है। यंत्र-मंत्र-तंत्र द्वारा साधक को सिद्धि सुगमतापूर्वक प्राप्त होती है। जो विधि-विधान से पूजन-अर्चन यंत्र-मंत्र-तंत्र द्वारा नहीं करेगा, उसके लिए सिद्धि प्राप्त करना असंभव है। प्राचीन काल से ही भारतीय ऋषि, य ं त्र ा े ं म े ं विश्वास रखते हुए, अपनी साधनाओं में लगे रहते थे। विशेष आकृति के कारण ये यंत्र स्वयं में ही संपूर्ण सिद्धि लिए हुए रहते हैं। यंत्र, रेखाओं से घिरी हुई आकृति के कारण, उन विशेष ग्रहों की शक्ति को अपने में समाहित किये हुए रहते हैं। ग्रहों के द्वारा यंत्रों की विशेष कृपा दृष्टि उन साधकों को प्राप्त होती रहती है। प्रत्येक मनुष्य के जीवन में हर प्रकार से ग्रहों का प्रत्यक्ष एवं परोक्ष असर पड़ता रहता है। मानव के जन्म से मृत्युपर्यंत वह ग्रहों के हाथों की कठपुतली बना नाचता रहता है। 9 ग्रहों में ही समाहित मानव जीवन सदैव ग्रहों के ही अधीन रहता है, गोचर फल, महादशेश फल पूर्णरूपेण मानव जीवन पर डालते रहते हैं। ऐसे में ही आवश्यकता पड़ती है एक विद्वान ज्योतिषी की, जो जातक को बता सके कि उसके जीवन में कब कौन सा ग्रह किस प्रकार का फल प्रदान करने वाला है। परंतु इस लालची संसार में मानव यदि विश्वास करें, तो करें किस पर? ज्योतिष एक व्यवसाय ही बनता जा रहा है। ग्रहों के बारे में डरा-धमका कर ज्योतिषीगण मात्र अपना स्वार्थ सिद्ध करने में प्रयत्नशील रहते हैं। भलाई तो उनके मन में रहती ही नहीं। ऐसे परिवेश में प्रस्तुत है ‘फ्यूचर पाॅइंट’ की अनुपम भेंट-‘संपूर्ण नव ग्रह शांति यंत्र।’ कोई भी साधक, या परेशान जातक, सभी ग्रहों की शुभता प्राप्त करने के लिए, इस यंत्र की स्थापना कर, पूजनोपरांत अपना अभीष्ट प्राप्त कर सकता है। इसे लेने हेतु किसी भी ज्योतिषी से कुछ पूछने-जानने की आवश्यकता नहीं है। किसी भी शुभ मुहूर्त में इसको स्थापित कर सकते हैं। नव ग्रहों का यंत्र होने के कारण इससे प्रत्येक ग्रह की शुभता सहज में ही प्राप्त हो जाती है। स्थापना विधि: आसन पर रोली द्वारा स्वस्तिक बनाएं एवं मध्य में अक्षत रख दें। तदुपरांत यंत्र को मध्य में स्थापित करें। पुष्प, अक्षत, गंगा जल, शहद, गौ मूत्र, घी, गोबर, दूध, दही (पंचगव्य) का बारी-बारी यंत्र पर छिड़काव करें। फिर यंत्र को पुष्पासन दें। फिर, धूप दिखा कर, दीपक प्रज्वलित करें। अब प्राण प्रतिष्ठा हेतु मंत्रोच्चारण करें। मंत्रोंच्चारण के पश्चात प्रत्येक ग्रह के तांत्रिक मंत्रों का, बारी-बारी से, एक माला का जाप करें। ग्रहों के तांत्रिक और बीज मंत्र, तालिका बना कर, लेख में दिये गये हैं। इस प्रकार अब नव ग्रह यंत्र, सिद्ध हो कर, अपनी दया दृष्टि बरसाने हेतु सदैव तत्पर रहेगा। लाभ: इस यंत्र के लाभ के बारे में जितना भी लिखा जाए, कम है। कारण स्पष्ट है। संपूर्ण ग्रहों का समावेश एक ही स्थान पर होने से सदैव प्रत्येक का आशीर्वाद प्राप्त होता रहेगा। जीवन के प्रत्येक अवसर पर, प्रत्येक उतार-चढ़ाव में, यह यंत्र सदैव साथ ही रहेगा। किसी भी विशेष कार्य हेतु जाने से पूर्व एक बार मात्र यंत्र का दर्शन ही अभीष्ट की सिद्धि करा देगा। बस, जातक विश्वास समर्पित करें। परहेज: यंत्र को रसोई एवं शयन कक्ष में कदापि स्थापित न करें। यदि एक ही कमरे में रह रहें हों, तो रात्रि को शयन से पूर्व, अथवा पूजनोपरांत, शुद्ध वस्त्र से यंत्र को ढकना न भूलंे। घर में मांस-मदिरा का उपयोग सर्वथा वर्जित है। भावना स्वच्छ रखें। ग्रह अपनी कृपा दृष्टि अवश्य देंगे। विशेष: किसी विशेष कार्य पर जाने से पूर्व निम्नांकित मंत्र की एक माला यंत्र के सम्मुख जप कर के निकलें, तो अवश्य ही अभीष्ट की प्राप्ति होती है। मंत्र: ब्रह्मा मुर्रारस्त्रिपुरान्तकारी भानुः राशिः भूमिसुतो बुधश्च।

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वास्तु विशेषांक   दिसम्बर 2007

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