प्रश्नः स्वप्नों का शास्त्रीय एवं वैज्ञानिक आधार क्या है? ‘स्वप्न फल विचार’ भविष्य में जातक के साथ घटने वाली घटना को बताता है या मात्र व्यक्ति के चिंतन व शारीरिक स्वास्थ्य का प्रभाव है। स्वप्न काल का, घटना घटने की अवधि से क्या संबंध हैं। साथ ही स्वप्न फल विचार की विस्तृत सूची दें। स्स्वप्न या सपना एक ऐसी घटना है जो प्रत्येक मनुष्य के जीवन में घटित होती .ही रहती है। निद्रावस्था में पहुंचकर शरीर स्थिर होने पर भी मन रूपी सूक्ष्म शरीर से हम एक ऐसी दुनिया में पहुंच जाते हैं जहां कभी हमारे जीवन से जुड़ी या जीवन में घटने वाली चीजों का हमे दृश्य-दर्शन होता है तो कभी ऐसे दृश्य सामने आते हैं जिन्हें न कभी देखा, न ही वे हमारे जीवन से संबंधित होते हंै। अधिकतर लोग सपने देखकर उन्हें भूल जाते हैं तथा कुछ उन्हें यादकर उनका अर्थ निकालना चाहते हैं। सपनों के विषय में भारतीय विद्वानों में या शास्त्रीय दृष्टि व वैज्ञानिक दृष्टि में स्वप्न-फल विचार को छोड़कर अन्य समानताएं मिलती है। स्वप्नों का शास्त्रीय एवं वैज्ञानिक आधार प्रत्येक मनुष्य या जीव की दो स्थितियां होती हैं- 1. पहली - जागृत या अनिद्रित स्थिति (अवस्था) तथा। 2. दूसरी - पूर्ण निद्रित (निद्रा) या सुषुप्त स्थिति (अवस्था)। इन दोनों अवस्थाओं में दो बार संधि काल आता है। प्रथम संधिकाल तब आता है जब सोने के लिये जाते हैं अर्थात् पूर्ण निद्रा में जाने से पहले तथा द्वितीय संधिकाल तब आता है जब प्रातः सोकर उठने से पहले का कुछ समय पूर्व का काल होता है। स्वप्न प्रायः जाग्रत और पूर्ण निद्रावस्था के बीच के समय में ही आते हैं। मनोवैज्ञनिकों के अनुसार, स्वप्न, मन के सोचने-विचारने की उपज है। ज्योतिषशास्त्रानुसार, मन का कारक चंद्र ग्रह है जो अन्य आठ ग्रहों (मुख्यतः छः) की तुलना में तेजी से गति करता है। अतः इसमें चंचलता के गुण हैं। यह (मन) चंद्रमा, एक सेकेंड में कितने ही किलोमीटर की दूरी तय कर लेता है। अतः यह मन भी दिन भर में अपने मस्तिष्क में अनेक विकारों को जन्म देता है। अतः चंद्रमा या मन ही सपनों (स्वप्नों) का दाता (जनक) हैं। अच्छे एवं बुरे, शुभ एवं अशुभ विचारों के अनुसार स्वप्न भी अच्छे, बुरे तथा शुभ, अशुभ आते हैं। प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक ‘‘सिगमंड फ्रांॅयड’’ के अनुसार मनुष्य के दो मस्तिष्क होते हैं। 1) चेतन 2) अवचेतन। जब चेतन मस्तिष्क सुप्तावस्था में होता है तो अचेतन मस्तिष्क सक्रिय (एक्टिव) होना आरंभ होता है और मनुष्य के जीवन में घटी धटनाओं के उन पहलुओं पर गौर करता है, जिन पर चेतन मस्तिष्क गौर नहीं कर पाता। मनोवैज्ञानिक ‘वैबस्टर’ के अनुसार सपने सोये हुये व्यक्ति के अचेतन मस्तिष्क में चेतनावस्था के दौरान घटित घटनाओं, देखी हुई आकृतियों, कल्पनाओं व विचारों का समेकित चित्रांकन होता है। भारतीय वैज्ञानिक ऋषि-मुनियों आदि के अनुसार स्वप्नों का आना ईश्वरीय शक्ति का वरदान है तथा निद्रा की चतुर्थ अवस्था या रात्रि के अंतिम प्रहर मंे आये स्वप्न व्यक्ति को भविष्य में घटित होने वाली घटनाओं का पूर्वाभास कराते हैं। स्वप्नों के बारे में सन् 1953 में ‘यूसिन सेरिन्सकी’ तथा 1976 में ‘ऐलेने हाबसन’ एवं ‘राबर्ट मैकार्ले ने अध्यन किया तथा इन्होंने फ्रायड की अवचेतन मस्तिष्क की अवधारणा को परिवर्तित रूप में प्रतिपादित किया। जिसके कारण इन्हें आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ा। इनके अनुसार, नींद की चार अवस्थायें (स्टेजेज) होती हैं। इनमें चैथी अवस्था ‘‘रेम’’ सिद्धांत पर कार्य करती हैं। इसमें चेतन मस्तिष्क द्वारा उपेक्षित घटनाओं का प्रतिकृति के रूप में सामने आता है जिसे स्वप्न कहते हैं। एक वैज्ञानिक विवेचनानुसार, निद्रावस्था के दौरान दबाव कम करने वाले हार्मोन ‘काॅर्टिसोल’ का स्राव अधिक होता है और मनुष्य मन की स्मृतियां धीरे-धीरे कम होती चली जाती हैं। ऐसी स्थिति में अवचेतन मस्तिष्क मंे शेष बची स्मृतियां ही स्वप्न के रूप में साकार होती है। इससे यह स्पष्ट होता है कि स्वप्नों का संबंध, घटित हुई या होने वाली घटनाओं से किसी ना किसी रूप में अवश्य ही होता है। इतना भी अवश्य है कि इनमें स्थान, पात्र एवं घटना की निरंतरता बीच-बीच में परिवर्तित होती रहती है। फ्राॅयड के अनुसार बुरे स्वप्न मनुष्य को भावनात्मक अवसाद से बचाकर मनोबल बढ़ाते हैं और इसके साथ ही भविष्य में घटित होने वाली घटनाओं का पूर्वाभास भी कराते हैं जिन्हें भविष्य बताने वाली ज्योतिष की एक शाखा -‘‘स्वप्न ज्योतिष’’ कहते हैं। मनुष्य एक ही रात में कई सपने देखता है। इनमें अधिकतर लोग केवल वे ही सपने याद रख पाते हैं जो वे सुबह के करीब देखते हैं। कुछ लोग यह भी दावा करते हैं कि वे स्वप्न देखते ही नहीं हैं, जबकि हकीकत यह है कि वे स्वप्नों को याद नहीं रख पाते हैं। अर्थात् भूल जाते हैं। इस संसार का हर मनुष्य स्वप्न देखता है। यह अलग बात है कि वह उन स्वप्नों को याद नहीं रख पाता यानी भूल जाता है। नींद की एक अन्य अवस्था, जिसे (नाॅन रेपिड आई मूवमेंट्स) कहते हैं इसमें व्यक्ति कच्ची नींद लेता है। इसमें शरीर की मांसपेशियां आरामदायक स्थिति में रहती हैं, तथा हृदय की धड़कन भी कम (धीमी) हो जाती हैं। रैम नींद की चार अवस्थाओं में प्रथम अवस्था है। इसकी अगली अर्थात द्वितीय एवं तृतीय अवस्थाओं में व्यक्ति गहरी नींद में पहुंच जाता है और शरीर का ताप गिरकर कम (न्यून) हो जाता है। चतुर्थ अवस्था अर्थात् रेम अवस्था में आंखे (आई) आगे-पीछे घूमती हैं। इसलिये इसे रैपिड आई मूवमेंट अर्थात् रेम स्टेज कहते हैं। यह अवस्था नींद लगने के 90-120 मिनट बाद आती है। ‘रेम’ स्टेज को ‘‘डेल्टा स्लीप’’ अवस्था भी कहते हैं और यह नींद की वह अवस्था है जिसमें स्वप्न सबसे अधिक आते हैं। इसी रेम अवस्था की नींद के दौरान पुनरावृत्ति होती रहती है। मनुष्य जब स्वप्न देखता है, तो शरीर में कई तरह के परिवर्तन आते हैं। जैसे-ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है, धड़कन तेज हो जाती है, श्वसन गति में भी कई परिवर्तन होते हैं। कमजोर हृदय वालों की स्वप्न देखने के दौरान मृत्यु भी हो सकती हैं, क्योंकि उनका दिल इस दौरान होने वाले असामान्य बदलावों को झेल नहीं पाता है। नींद लगने के 30-90 मिनट बाद स्वप्न देखना शुरू करते हैं। उससे पहले नहीं। इसमें आश्चर्य की बात यह है कि नींद के दौरान हम सभी हिलते हैं और करवटें भी बदलते हैं। लेकिन चतुर्थ अवस्था यानि रेम स्टेज के दौरान मांस पेशियां पूरी तरह आराम की स्थिति में रहती है तथा शरीर हिल-डुल भी नहीं सकता। इसलिये इसे ‘‘रेम पैरालिसिस’’ स्थिति भी कहते हैं। ‘‘स्वप्न फल विचार’’ भविष्य में जातक के साथ घटने वाली घटना तथा व्यक्ति के चिंतन का स्वास्थ्य (शारीरिक-मानसिक), दोनों ही पहलुओं को दर्शाता है। इनके पीछे तर्क निम्न हैं। हमारे बिंदु के पीछे तर्क यह है कि स्वप्न प्रायः प्रत्येक मनुष्य देखता है, कुछ याद रहते हैं और कुछ भूल जाते हैं। स्वप्न वे ही व्यक्ति देखते हैं, जो अपने विचारों को व्यक्त करते हैं तथा किसी भी कार्य को कुशलता से कर सकते हैं। स्वप्न, हमारे मानसिक संतुलन (चिंतन, स्वास्थ्य आदि) को बनाये रखने में सहायता करते हैं। यदि हम स्वप्न नहीं देखे तो हमारा मस्तिष्क इतने विचारों से भर जायेगा कि हम सोचने समझने की क्षमता खो देंगे जिससे हमारा चिंतन एवं स्वास्थ्य प्रभावित होगा और हम अस्वस्थ हो जायेंगे। अतः स्वप्न देखना अच्छे स्वास्थ्य के लिये अति आवश्यक है। अर्थात् जिन व्यक्तियों का स्वास्थ्य अच्छा रहता है वे स्वप्न (विशेषकर शुभ/अच्छे/मनमोहक) अवश्य देखते हैं। तथा वे व्यक्ति जिन्हें अशुभ, बुरे, डरावने स्वप्न आते हैं, वे स्वस्थ तो रहते हैं परंतु क्रोधी, गुस्सैल आदि प्रवृत्ति के होते हैं। पहले बिंदु के पीछे तर्क भारतीय वैज्ञानिकों अर्थात् ऋषि-मुनियों आदि के अलावा विश्व के अन्य देशों जैसे यूनान, मिस्र, चीन आदि ने इन सभ्यताओं के युग में स्वप्नों को भविष्य में जातक के साथ घटने वाली घटना को माना है। अर्थात् स्वप्न, भविष्य की घटनाओं का संकेत देते हैं। स्वप्न, मानव जाति को प्रकृति की अनूठी देन है। स्वप्नों के विषय में विश्व के तकरीबन हर हिस्से में अनेक मान्यतायें प्रचलित हैं। स्वप्नकाल का घटना घटने की अवधि से संबंध ये रात्रि के चारो प्रहरों से जुड़े रहते हैं। रात्रि के प्रथम प्रहर (अर्थात् 10 से 12 बजे तक (सामान्यतः एक स्वस्थ व्यक्ति रात्रि 10 बजे के आसपास सोता है) इस अवधि में देखे गये देखे गये स्वप्न के फल एक संवत्सर अर्थात् 1 वर्ष में मिलते हैं। द्वितीय प्रहर (12-2 बजे, जिसे मध्य रात्रि भी कहते हैं) में देखे गये स्वप्न फल 6 माह में मिलते हैं। तृतीय प्रहर (2-4 बजे) में देखे गये स्वप्नों के फल 3 माह में मिलते हैं तथा चतुर्थ यानि अंतिम प्रहर (4-6 बजे जिसे ब्रह्ममूहूर्त भी कहते हैं) में देखे गये स्वप्नों के फल एक माह में मिलते हैं। इसके अलावा पांचवा सूत्र यह भी है कि सूर्योदय के ठीक आसपास प्रातः 6 बजे के करीब) की बेला में देखे गये स्वप्नों के फल 7 से 10 दिन में प्राप्त होते हैं। इसके आधार पर यह भी निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि सूर्योदयकालीन स्वप्नों के फल जल्दी मिलते हैं तथा रात्रिकालीन के फल देरी से मिलते हैं। दिन के स्वप्न महत्वहीन होते हैं अर्थात् फलित नहीं होते हैं। एक रात में एक से अधिक स्वप्न आये तो अंतिम स्वप्न ही फलित होता है। अतः अंतिम स्वप्न यदि शुभ आ जाये, फिर यदि जग जाये तो इसके बाद सोना नहीं चाहिए। यदि इसके बाद सोने पर नींद में पुनः स्वप्न (यदि अशुभ) आये तो इसके फलित होने की संभावना अत्यधिक होती है। उपरोक्त विवेचन स्वप्न काल का घटना घटने की अवधि से महत्वपूर्ण संबंध दर्शाता है। स्वप्नों के प्रकार: स्वप्न कई प्रकार के होते हैं। इनमें सात प्रकार के स्वप्न निम्न हैं। 1. दृष्ट स्वप्न 2. कल्पित स्वप्न 3. श्रुत स्वप्न 4. भाविक स्वप्न 5. अनुभूत स्वप्न 6. दोषज स्वप्न 7. प्रार्थित स्वप्न उपरोक्त सात प्रकार के स्वप्नों के अलावा भी व्यक्ति कई तरह के निम्न स्वप्न देखता है। 8. ‘डे’ ड्रीम्स - दिन के स्वप्न 9. नाइटमेयर्स ड्रीम्स - डरावने सपने 10. रेकरिंग ड्रीम्स - प्रतिदिन वही सपना 11. ल्यूसिड ड्रीम्स - शांत स्वप्न 12. प्रोफेटिक ड्रीम्स - भविष्यवक्ता स्वप्न 13. नेकेड ड्रीम्स - नग्न स्वप्न स्वप्न द्वारा दाम्पत्य (वैवाहिक, प्रणय या जीवन की सुखद एवं दुखद स्थिति: 1. सुखद दाम्पत्य स्थिति: 1. यदि कोई पुरुष स्वप्न में अपनी दाढ़ी बनाता हो अथवा दूसरे से बनवाता हो तो उसके जीवन की समस्त कठिनाईयां दूर होने वाली है। 2. स्वप्न में इंद्रधनुष देखना शुभ होता है। इससे जीवन की सारी अभिलाषायें पूर्ण हो जाती हैं तथा वास्तविक, वैवाहिक जीवन सुख से बीतता है। 3. यदि कोई स्त्री स्वप्न में छोटे बच्चे के स्वेटर या जुराब बुनती हैं तो उसे दांपत्य का सारा सुख प्राप्त होने के साथ-साथ संतान सुख भी प्राप्त होता है। 4. यदि स्वप्न में अंगूठी उपहार के रूप में प्राप्त हो तो उसका जीवनसाथी उससे बहुत ही प्रेम करता है। 5. यदि मेले में घूमने का स्वप्न आता है तो यह श्ुाभ रहता है तथा इससे योग्य जीवन साथी की प्राप्ति होती है। 6. यदि स्वप्न में किसी सजी-धजी दुल्हन के दर्शन हो तो जीवन में अनुकूलता प्राप्त होती है। 7. यदि स्वप्न में उपहार के रूप में सोने के आभूषण प्राप्त हो तो उसका विवाह किसी धनी व्यक्ति से होता है। 8. स्वप्न में यदि प्रेमीजन का वियोग देखने को मिले तो विरासत में अतुल धन संपदा की प्राप्ति होती है। 9. स्वप्न में यदि शहद का सेवन हो तो यह शीघ्र ही विवाह संपन्न होने का संकेत है। 10. यदि स्वप्न में स्वयं का प्रसन्न होकर नाचना दिखे तो उसका विवाह शीघ्र ही हो जाता है और उसका वैवाहिक जीवन सुखद बीतता है। 11. यदि स्वप्न में किसी नववधू को जो व्यक्ति आलिंगन करके चूमता है तो भविष्य में शत्रु भी उसके मित्र बन जाते हें। 12. यदि स्वप्न में कटे हुए कपड़े देखने को मिले तो इससे सुंदर एवं सुशील पत्नी की प्राप्ति होती है। 13. स्वप्न में यदि नाव पर बैठे हुए दिखे तो दांपत्य जीवन सुखद बीतता है। 14. स्वप्न में यदि कोई स्त्री किसी रत्न जड़ित अंगूठी या नैकलेस देखती है तो उसका वैवाहिक जीवन सुख से बीतता है। 15. स्वप्न में यदि अविवाहित स्त्री अपने प्रेमी को किसी अन्य युवती से विवाह करता देखे तो उसका विवाह शीघ्र हो जाता हे। 16. स्वप्न में यदि कोई पुरूष अपनी खोई हुई वस्तु पुनः प्राप्त करता है तो उसे आगामी जीवन में सुख मिलता है। 17. स्वप्न में यदि कोई स्त्री किसी मित्र के दिये हुये कंगन पहनती हैं तो उसका विवाह शीघ्र हो जाता है। 18. स्वप्न में यदि कोई पुरुष, स्त्री को घूंघट निकालते देखे तो उसका दांपत्य जीवन सुख से बीतता है। 19. यदि स्वप्न में पुरूष, किसी सुंदर कपड़े को देखता है तो उसे मधुर स्वभाव वाली विदुषी स्त्री (पत्नी) की प्राप्ति होती है। 20. यदि स्वप्न में विभिन्न पक्षी जैसे-तोता, सारस, कबूतर, तीतर, गौरैया, नीलकंठ आदि दिखे तो गृहस्थ जीवन खुशनुमा रहता है। 21. यदि स्वप्न में जेब्रा दिखे तो यह शुभ रहता है। जीवन में संतुलन होता है। शादी शुदा जोड़ा खुशी से जीवन बिताता है। दुखद दाम्पत्य जीवन स्थिति: 1. यदि स्वप्न में विवाहित व्यक्ति यह देखे कि उसका विवाह हो रहा है तो उसे पारिवारिक जीवन की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। 2. यदि स्वप्न में कोई, किसी की शव यात्रा देखे तो उसका दांपत्य जीवन कलहपूर्ण बीतता है। 3. यदि स्वप्न में बहुत बड़ा चाकू या छुरा दिखे तो दांपत्य जीवन में क्लेश उत्पन्न होता है। 4. यदि स्वप्न में विवाहित पुरुष या स्त्री किसी दूसरे से संबंध स्थापित करते हुये अपने आपको देखते हैं तो उनका दांपत्य जीवन नरक तुल्य बन जाता है। 5. स्वप्न में तेल खरीदना शुभ नहीं होता है, इससे पारिवारिक जीवन में परेशानियां आती हैं। 6. यदि स्वप्न में स्वयं को हीरा या हीरे जड़ित आभूषण उपहार के रूप में मिला दिखे तो यह अशुभ होता है तथा भविष्य में उसका दांपत्य जीवन दुखी रहता है। 7. यदि स्वप्न में आभूषण का गुम हो जाना दिखे तो इससे दांपत्य जीवन में कमी आती है। 8. यदि स्वप्न में किसी सुरंग में से गुजरना दिखे तो दांपत्य सुख में कमी आती है। 9. यदि स्वप्न में कोई पुरोहित, मौलवी या पादरी दिखे तो स्वयं जनित कारणों से दांपत्य जीवन में विघटन की स्थितियां पैदा होने लगती है।


अंको का जीवन मे स्थान  जुलाई 2011

इस विशेषांक में ज्योतिष से संबंधित सारी जिज्ञासाओं का जीवन पर प्रभाव जैसे-नामांक, मूलांक, भाग्यांक का जीवन पर प्रभाव अंकों द्वारा विवाह मेलापक, मकान, वाहन, लॉटरी, कंपनी नाम का चयन कैसे करें के समाधान की कोशिश की गई हैं

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