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दक्षिण-पश्चिम के दोष काम में देरी व रुकावट का कारण होते हैं

दक्षिण-पश्चिम के दोष काम में देरी व रुकावट का कारण होते हैं  

पिछले माह पंडित जी मस्कट में रह रहे एक भारतीय परिवार के घर का वास्तु परीक्षण करने जम्मू गए। उन्होंने पंडित जी को बताया कि यह प्लाॅट उन्होंने काफी समय से खरीदा हुआ था और एक वर्ष पहले यहां घर का निर्माण शुरू किया था जिससे कि वह जब भी भारत आएं वहां ठहर सकें। परंतु उनके घर का निर्माण कार्य काफी धीमी गति से चल रहा था और इसमें काफी रुकावटें भी आ रही थी और खर्चा भी अधिक हो रहा था। इस वजह से वे आर्थिक व मानसिक परेषानियों से गुजर रहे थे। उन्होंने बताया कि काफी समय से उनका स्वास्थ्य भी ठीक नहीं चल रहा था। वास्तु परीक्षण करने पर पाए गए वास्तु दोष: Û उनके प्लाॅट के दक्षिण पष्चिम में द्वार था जो मालिक को घर से दूर रखता है और अनचाहे खर्च व स्वास्थ्य हानि करता है। Û दक्षिण पष्चिम में सेप्टिक टैंक था जो भारी खर्च, काम में रुकावट और देरी का कारण होता है। Û घर का दक्षिण-पष्चिम बढ़ा हुआ था जो आर्थिक समस्याओं एवं सभी ओर से परेषानी का कारण होता है। Û भूमितल जल स्रोत तो उत्तर पूर्व में बना था जो कि उत्तम है पर वह मुख्य द्वार के बिल्कुल सामने बना था एवं विकर्ण रेखा पर भी आ रहा था जो कि सकारात्मक ऊर्जा को आने में बाधा उत्पन्न करता है और विकास में अवरोधक होता है। सुझाव: Û दक्षिण पष्चिम में बने द्वार को हटाकर पष्चिम में बनाने को कहा गया। Û सेप्टिक टैंक को भी दक्षिण पष्चिम से पष्चिम में करने को कहा गया। जब तक यह बदल न पाएं तब तक उसके कवर को ऊपर एवं नीचे दोनों तरफ से लाल रंग का पेंट करने को कहा गया। Û उन्हें सलाह दी गई कि दक्षिण पष्चिम में कमरा बना दें चाहे वह टैम्परैरी शेड ही क्यूं न हो और उसे बिल्डिंग से जोड़ दें। दोनों के बीच में परगोला देकर भी जोड़ा जा सकता है। इससे बिल्डिंग के बढे़ होने का दोष खत्म हो जायेगा और दक्षिण पष्चिम के बंद होने से उनकी आर्थिक समस्याएं काफी हद तक कम हो जाएंगी। Û भूमिगत जल स्त्रोत को गेट के दूसरी तरफ पूर्व की ओर बनाने की सलाह दी या पहले बने हुए टैंक को विकर्ण रेखा से हटाकर उत्तर की ओर बढ़ाने को कहा गया। पंडित जी ने उन्हें आष्वासन दिया कि सभी सुझावों को कार्यान्वित करने के बाद उन्हें अवष्य लाभ मिलेगा।

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