धन लाभ का टोटका शनिवार को सायंकाल उड़द के दो दाने साबुत लेकर उन पर थोड़ी दही व सिंदूर छिड़ककर पीपल के पŸो पर इन्हें रखकर पीपल की जड़ में रख दें व ब्रह्मा जी से प्रार्थना करें कि मेरे घर से गरीबी हटा दो। यह क्रिया 21 दिन लगातार करनी है। आपकी मनोकामना अवश्य पूरी होगी। - घर में पूजा पाठ से धन में वृद्धि जो महानुभाव स्त्री-पुरुष नित्य प्रति ब्रह्म मुहूर्Ÿा में स्नान आदि करके अपनी प्रतिदिन की दिनचर्या पाठ से अथवा भजन से ईश्वर की भक्ति द्वारा शुरु करते हैं वे सदा सुखी हैं। जो ब्रह्म मुहूर्Ÿा में अपने घर में झाड़ू लगाता है उसके यहां पर दरिद्रता नहीं रह जाती है लक्ष्मी जी का वास हो जाता है। विष नाशक टोटके - सांप के काटने से मनुष्य का पूरा शरीर विष युक्त हो जाय तो उस समय गाय के दूध में हल्दी का काढ़ा सेवन करने से लाभ हो जाता है। - ऐसा महसूस होने लगे कि हमें कोई जहर खाने में दे रहा है जिसके कारण शरीर में बेचैनी, नींद का न आना और घबराहट रहती है तो कटुगी जामुन वृक्ष की जड़, छाछ के अम्ल में पीसकर पानी से सेवन करने पर सारा विष वमन (उल्टी) के द्वारा शरीर से बाहर निकल जाता है। - अपराजिता की जड़ को घी में मिलाकर सेवन करने से चर्म संबंधी विषों का प्रभाव नष्ट हो जाता है और हल्दी के साथ सेवन किया जाय तो हड्डियों में विष का प्रभाव नहीं होता है। बिच्छू विष नाशक टोटका - पुत्रजीवा के फल की मज्जा, पलाश व करंज को पानी में पीसकर प्रभावित अंग पर लेप करने से बिच्छू का विष नष्ट हो जाता है। - बकुल (मौलसिरी) के बीज का छिलका पीसकर विष प्रभावित अंग पर लेप करने से विष का प्रभाव दूर हो जाता है। कुŸाा काटने का टोटका - गुड़-तेल को आक के दूध में मिलाकर कुŸो के काटे के स्थान पर लेप करने से विष समाप्त हो जाता है। - पागल कुŸो के काटने पर घृतकुमारी का पŸाा, सैंधा नमक पीसकर आंच पर गरम कर तीन दिन तक बांधने से विष का प्रभाव दूर हो जाता है। - करंज बीज व सरसों को तिलों के साथ पीसकर लेप करने से किसी भी विषैले कीट के काटने पर होने वाला विष का प्रभाव नष्ट हो जाता है व ऐरंड के तेल का लेप करने से भी विष का प्रभाव दूर हो जाता है।


मंगल दोष विशेषांक  जुलाई 2015

फ्यूचर समाचार के इस विशेषांक में मंगल दोष की विस्तृत चर्चा की गई है। कुण्डली में यदि लग्न, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम भाव एवं द्वादश भाव में यदि मंगल हो तो ऐसे जातक को मंगलीक कहा जाता है। विवाह एक ऐसी पवित्र संस्था जिसके द्वारा पुरुष एवं स्त्री को एक साथ रहने की सामाजिक मान्यता प्राप्त होती है ताकि सृष्टि की निरन्तरता बनी रहे तथा दोनों मिलकर पारिवारिक एवं सामाजिक दायित्व का निर्वहन कर सकें। विवाह सुखी एवं सफल हो इसके लिए हमारे देश में वर एवं कन्या के कुण्डली मिलान की प्रथा रही है। कुण्डली मिलान में वर अथवा कन्या में से किसी एक को मंगल दोष नहीं होना चाहिए। यदि दोनों को दोष हैं तो अधिकांश परिस्थितियों में विवाह को मान्यता प्रदान की गई है। इस विशेषांक में मंगल दोष से जुड़ी हर सम्भव पहलू पर चर्चा की गई है। इसके अतिरिक्त स्थायी स्तम्भ में भी विभिन्न विषयों को समाविष्ट कर अच्छी सामग्री देने की कोशिश की गई है।

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