भूत प्रेत दूर करने के उपाय

  • शनिवार के दिन दोपहर को सवा दो किलो बाजरे का दलिया तैयार करके उसमें गुड़ मिला दें। इस दलिया को मिट्टी की एक हांडी में डालकर सूर्यास्त के समय उस हांडी को रोग ग्रस्त पुरूष अथवा स्त्री उसके पूरे शरीर पर बाएं से दायें सात बार घुमाकर किसी चैराहे पर रख दें। आते समय पीछे मुड़ के न देखें। यदि कोई मिल जाय व पूछना चाहे तो उससे बात न करें। यह क्रिया करते समय किसी को सामने नहीं आना चाहिए, जो भूत-प्रेत से ग्रस्त होगा वह तुरंत ठीक हो जाएगा।
  • कच्चे लकड़ी के सात छोटे टुकड़े, एक अंडा व एक दोना में हलुआ, पीपल की टहनी लेकर एक मिट्टी का सकोरा लें, उसी में हलुआ को रख दें तथा उसके ऊपर कच्चे चावल डाल दें। फिर इस सकोरे को भुक्त भोगी के ऊपर से सात बार घुमाकर उतारा कर दें। इसे भी रात में किसी चैराहे पर उल्टा रख कर अंडे को उस सकोरे को मारकर फोड़ दें और इसके ऊपर पीपल की टहनियों को रखकर बिना पीछे देखे यह मंत्र बोलते हुए घर वापस आ जायें। ‘‘मंत्र: ऊँ शाकिनी डाकिनी यक्ष रक्षो भूत प्रमन्जकाय नमः। कपड़े बदल कर उक्त मंत्र को जप कर सो जायें।
  • इतवार के दिन प्रातः पवित्र होकर तुलसी जी के आठ पत्ते, आठ काली मिर्च तथा सहपोई की जड़ लेकर इन्हें काले कपड़े की एक पोटली में बांधकर इससे गले में पहनने का गंडा तैयार करें तथा उसे गले में बांध दें या किसी हनुमान जी को बड़े ताबीज में रख कर गले में बांध दें। ऊपरी बाधा से मुक्ति मिल जाएगी। उक्त मंत्र को भी ताबीज में भोजपत्र पर लिखकर साथ रख दें। मंत्र: शाकिनी डाकिनी यक्ष रक्षो भूत प्रमन्जकाय नमः। रोग मुक्त हो जाएगा।
  • सफेद सूत को और काले धतूरे को मिलाकर गंडा बना दें। इसे दाईं भुजा में बांध दें। इसे इतवार को ही बांधना है। यह मंत्र बोलते हुए गंडा बनायें। ऊँ हं हनुमते नमः। धूप देकर बांधना है।
  • काले सूत तथा सफेद घुंघची की जड़ व काले धतूरे की जड़ को मिला करके धूप देकर सीधे हाथ में बांध दें। ऊँ हं हनुमते नमः मंत्र से जाप करने से ऊपरी बाधा से मुक्ति मिल जाएगी।
  • मंत्र: ऊँ नमो भगवते रुद्राय नमः कोशेश्वरस्य नमो ज्योति पतंगाय नमो रुद्राय नमः सिद्धि स्वाहा। उपरोक्त मंत्र का स्नान करके शुद्ध कपड़े पहन कर 1 माला का जाप प्रातः सायं करने से प्रेतबाधा से मुक्ति मिल जाती है।


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