• मोर का पंख घर में रखने से घर में सभी तरह से शांति स्थापित रहती है तथा बिगड़े काम बनने लग जाते हैं व घर में भूत-प्रेत आत्माओं का समावेश भी पंख रखने से रूक जाता है।
  • लोहे की एक अंगूठी कृत्तिका नक्षत्र में पहनने से जिसके घर में प्रेत बाधा हो तो वह समाप्त होती है।
  • बिल्व पत्र- अश्विनी नक्षत्र में लाल रंग की गाय के दूध में, यदि लाल न मिले तो किसी अन्य रंग की गाय के दूध में बिल्व पत्र डाल कर उसे निःसंतान स्त्री को पिला दें तो उसको गर्भ ठहर जाएगा। यह क्रिया अश्विनी नक्षत्र में होगी।
  • प्रवक्ता अथवा उपदेशक अथवा नेतागण यदि अश्विनी नक्षत्र में अपामार्ग की जड़ किसी ताबीज में डालकर भाषण दें या उपदेश करें तो सुनने वाला जन समूह वशीभूत होकर आपके विचारों से सहमत हो जायेगा।
  • जिन्हें भूत-प्रेत नजर दोष का कष्ट है वे हनुमान मंदिर से हनुमान जी का सिंदूर लगाकर उसे एक सूखी लाल मिर्च, एक लोहे की कील, थोड़े साबुत उड़द इन सब सामान को लाल कपड़े में बांधकर घर में रख देने से यह पीड़ा तंग नहीं करेगी। इसे लाल कपड़े में अपने साथ में भी रख सकते हैं।

सभी कामनाओं की सिद्धि हेतु

  • दूध वाली समिधाओं से एक हजार बार गायत्री मंत्र का जप तथा इसके पश्चात हवन करने से घर में शांति हो जाती है। किंतु समिधाएं शमी की होनी चाहिए। क्योंकि यह भौतिक रोगों से निजात दिला देती है। गायत्री मंत्र के जाप से सभी अनिष्ट ग्रह शांत हो जाते हैं।
  • आक की जड़ को आद्र्रा नक्षत्र में ताबीज में भरकर पहनें तो कोर्ट कचहरी के कामों में सफलता मिलती है।
  • शंख पुष्पी को पुष्य नक्षत्र में लाकर एक चांदी की डिबिया में रखकर श्री लक्ष्मी जी के मंत्र श्री महालक्ष्म्यै नमः से प्रतिदिन 21 बार जप करके पूजा के स्थान पर दुकान व व्यापारिक संस्थान में रखने से कार्य अथवा बिक्री में बढ़ोत्तरी होती रहती है।
  • काले एरंड की जड़ को श्रवण नक्षत्र में किसी ताबीज में भरकर उसे कमर या गले में डालकर रहें तो संतान की प्राप्ति अवश्य होती है।
  • धतूरे की जड़ को अश्लेशा नक्षत्र में लाकर घर में पूजा गृह में धूप, दीप से पूजन करके रखने से घर में सर्प नहीं आता है न उससे भय लगेगा।
  • बहेड़ा का पत्ता पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में घर में रखने से ऊपरी भूत-प्रेत आत्माओं का आवागमन रूक जाता है।


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