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हस्ताक्षर द्वारा व्यक्ति की पहचान

हस्ताक्षर द्वारा व्यक्ति की पहचान  

हस्ताक्षर द्वारा व्यक्ति की पहचान डाॅ. दलीप कुमार दुनिया में दो ही चीजें किन्ही दो व्यक्तियों की एक जैसी नहीं हो सकती। पहली, हाथ की लकीरें व दूसरी उसकी लिखावट। व्यक्ति की लिखावट उसकी अपनी असलियत है। हस्ताक्षर विश्लेषण के सूत्र यदि हस्ताक्षर स्पष्ट हो तथा उनसे हस्ताक्षर करने वाले व्यक्ति का पूरा नाम पता चलता हो तो व्यक्ति स्पष्टवादी, खुले मन का और अधिक विश्वसनीय होता है। उसके सभी कार्यों में पारदर्शिता होती है और यदि हस्ताक्षर अस्पष्ट हो व उनसे नाम पढ़ने में कठिनाई हो और उनसे हस्ताक्षर करने वाले के बारे में पता नहीं चलता तो व्यक्ति रहस्यमयी प्रकृति का होता है जो अपने विषय में अधिक जानकारी नहीं देना चाहता तथा अपनी असली पहचान अज्ञात रखना चाहता है। यदि हस्ताक्षर बहुत छोटे हो या शब्दों को तोड़-मरोड़कर किये गये हांे, और पढ़ने में न आये तो व्यक्ति चालाक होता है तथा दूसरों को नुकसान पहुचानें में अग्रसर रहता है। यदि हस्ताक्षर कलात्मक ढंग से किये गये हांे तो व्यक्ति कलाप्रिय, कवि, गायक, उमंगशील तथा अति उत्साही होता है। यदि हस्ताक्षर सरल रेखा में सीधे-सीधे हो तो व्यक्ति साफ दिल तथा सरल स्वभाव का होता है तथा हर हाल में खुश रहने वाला होता है। यदि हस्ताक्षर नीचे से ऊपर की ओर जा रहे हैं तो व्यक्ति अधिक महत्वाकांक्षी, प्रत्येक कार्य में ईश्वर में पूरी आस्था रखने वाला तथा आशावादी होता है। इसकी विपरीत दिशा में जाने से व्यक्ति के स्वभाव में नकारात्मकता अधिक होती है तथा व्यक्ति अव्यवहारिक होता है। यदि हस्ताक्षर स्पष्ट हो तथा अंतिम अक्षर के बाद एक लंबी रेखा हो तो व्यक्ति ज्ञानी, विद्वान, समाजसेवी, परोपकारी, शिक्षक व लेखक होता हैं और हमेशा दूसरों की सहायता के लिए तत्पर रहता है। यदि हस्ताक्षर के अंत में एक बिंदु हो तो व्यक्ति अपना शुरू किया हुआ कार्य पूरा जरूर करता है और यदि हस्ताक्षर के नीचे दो लाइने हों तो भावुकता और जीवन में असुरक्षा की भावना अधिक होती है। वहीं हस्ताक्षर के अंतिम अक्षर के नीचे बिंदु होने से व्यक्ति बहुत विद्वान व अपने क्षेत्र में प्रसिद्ध होता है। हस्ताक्षर में लूप होने पर व्यक्ति भाग्यशाली व धनी होता है तथा हस्ताक्षर में अक्षरों के बीच दूरी होने से व्यक्ति खर्चीला होता है और धन संचय नहीं कर पाता है। हस्ताक्षर में अक्षरों को एक साथ जोड़कर लिखा गया हो तो व्यक्ति कंजूंस व धनी होता है तथा एक समय में एक से अधिक कार्य करता है। यदि हस्ताक्षर के नीचे पूरी लाइन हो तो व्यक्ति आत्मनिर्भर होता है तथा सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश करता है। हस्ताक्षर बहुत बड़े हों तो व्यक्ति में आत्म-विश्वास अधिक होता है तथा वह चाहता है कि अन्य सभी उसकी ओर विशेष ध्यान दें। हस्ताक्षर के अक्षरों में कांट-छांट होने से व्यक्ति के मन में ज्यादा उथल-पुथल तथा मानसिक तनाव रहता है। हस्ताक्षर का पहला अक्षर बड़ा हो तो व्यक्ति व्यवहार कुशल, मृदुभाषी तथा समाज में मान-सम्मान प्राप्त करता है। यदि हस्ताक्षर के अंतिम अक्षर के बाद सिर्फ लाइन हो तो व्यक्ति बदले की भावना रखता है। यदि हस्ताक्षर शीघ्रता से लिखे गये हो तो व्यक्ति चुस्त, फुर्तीला व तीव्र बुद्धि वाला होता है। कलम पर जोर दे कर हस्ताक्षर करने वाला व्यक्ति हठी, उत्तेजक तथा भावुक होता है। हस्ताक्षर में नाम तथा उपनाम पूरा लिखा हो तो व्यक्ति अपने साथ-साथ परिवार का भी ध्यान अधिक रखता है तथा भाग्य का धनी होता है। यदि हस्ताक्षर में केवल एक नाम हो तो व्यक्ति परिवार से अधिक अपना महत्व अधिक मानता है।


स्वप्न, शकुन व् हस्ताक्षर विशेषांक  जून 2012

फ्यूचर समाचार पत्रिका के स्वप्न, शकुन व हस्ताक्षर विशेषांक में हस्ताक्षर विज्ञान, स्वप्न यात्रा का ज्योतिषीय दृष्टिकोण, स्वप्न की वैज्ञानिक व्याख्या, अवधारणाएं व दोष निवारण, स्वप्न का शुभाशुभ फल, जैन ज्योतिष में स्वप्न सिद्धांत, स्वप्न द्वारा भाव जगत में प्रवेश, शकुन शास्त्र में पाक तंत्र विचार. शकुन एवं स्वप्न का प्रभाव, शकुन एवं स्वप्न शास्त्र की वैज्ञानिकता, शकुन शास्त्र व तुलसीदास, हस्ताक्षर द्वारा व्यक्तित्व की पहचान, स्वप्नों द्वारा समस्या समाधान आदि रोचक, ज्ञानवर्द्धक आलेख शामिल किये गए हैं। इसके अतिरिक्त वास्तु परामर्श, वास्तु प्रश्नोतरी, विवादित वास्तु, यंत्र समीक्षा/मंत्र ज्ञान, हेल्थ कैप्सुल, लाल किताब, ज्योतिष सामग्री, सम्मोहन, सत्यकथा, स्वास्थ्य, पावन स्थल, क्या आप जानते हैं? आदि विषयों को भी शामिल किया गया है।

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