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शेयर बाजार और आपकी कुंडली

शेयर बाजार और आपकी कुंडली  

शेयर बाजार में निवेश के फलस्वरूप कुछेक लोग वाकई संपन्नता के शिखर पर पहुंच जाते हैं किंतु अधिकांश लोगों को मुंहकी खानी पड़ती है और वे कंगाली एवं दिवालियेपन का भी शिकार हो जाते हैं। किंतु यह भी सही है कि शेयर बाजार अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है तथा यहां किए गए निवेश पर ही किसी कंपनी अथवा उद्योग का भविष्य निर्भर करता है। अतः यह तो जाहिर है कि किसी देश की उन्नति के लिए समग्र रूप से शेयर बाजार में निवेश अति आवश्यक है। इसमें यह सावधानी बरतनी अनिवार्य है कि हमारा निवेश इस प्रकार से हो कि यदि हम अत्यधिक मुनाफा न भी अर्जित कर सकें तो नुकसान भी इतना अधिक न हो जिसको झेलना हमारे लिए कठिन हो जाय। यहां हम शेयर बाजार में निवेश के लिए उत्तरदायी ज्योतिषीय तत्वों का विश्लेषण करेंगे कि कुंडली में कौन से भाव, ग्रह अथवा बली योग होना चाहिए जिससे कि हर हाल में मुनाफा ही प्राप्त हो। लग्न किसी भी कुंडली की जान होती है। अतः कुंडली में लग्न एवं लग्नेश का काफी बली होना किसी भी उद्यम में सफलता प्राप्त करने के उद्देश्य से आवश्यक है। यदि लग्न एवं लग्नेश बली हों, शुभ ग्रहों से दृष्ट अथवा युत हों, राजयोग के निर्माण में शामिल हों तो ऐसे लग्न को बली कहा जा सकता है। लग्न के अतिरिक्त कुंडली में एकादश भाव जो कि आय भाव है, द्वितीय भाव जिसे धन भाव की संज्ञा दी गयी है, नवम भाव जिसका बल जातक के समानुपातिक भाग्य का निर्धारण करता है तथा पंचम भाव जो पूर्वानुमान के लिए महत्वपूर्ण है, इन सभी का परीक्षण करना नितांत आवश्यक है। इसके अतिरिक्त अष्टम भाव अचानक धन प्राप्ति में सहायक है। यदि हम ग्रहों की बात करें तो शेयर बाजार में प्रत्युत्पन्नमतित्व एवं शीघ्र निर्णय क्षमता के लिए बुध एवं गुरु की भूमिका अति महत्वपूर्ण है। शेयर बाजार में तुरंत सोचकर तुरंत निर्णय लेने की आवश्यकता होती है। किस समय शेयर खरीदें तथा किस समय इसे बेचें इसका शीघ्र निर्णय लेना तथा उसे कार्यरूप में परिणत करना अति आवश्यक है। बुध और गुरु बुद्धिमत्ता को निर्दिष्ट करने वाले ग्रह हैं। अतः कुंडली में इनकी सही स्थिति होनी शेयर बाजार में निवेश के लिए अति आवश्यक है। इसके अतिरिक्त मंगल, सूर्य एवं राहु उत्प्रेरक की भूमिका निभाते हैं तथा इसके प्रभावस्वरूप शेयर बाजार में अचानक तेजी अथवा मंदी आती है। कुंडली में दशम भाव मनुष्य के कर्म का स्थान माना गया है। अतः शेयर बाजार में लाभ-हानि के दृष्टिकोण से दशम भाव भी अति महत्वपूर्ण है। इन सब बातों के अतिरिक्त वर्तमान में ग्रहों के गोचर तथा किसी जातक की चल रही दशा की भी अपनी भूमिका होती है। यदि जन्मकुंडली में लग्न से 2, 5, 9, 11 भावों में शुभ ग्रह हों साथ ही लग्नेश केंद्र अथवा त्रिकोण में हो तो शेयर बाजार में मुनाफे की अत्यधिक संभावना होती है। शेयर बाजार में मुनाफे के लिए पंचम भाव अति महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भाव सट्टा, लाॅटरी अथवा शेयर के माध्यम से अचानक प्राप्त होने वाले धन तथा इनके लिए लगाये जाने वाले पूर्वानुमान का द्योतक है। यदि पंचमेश शुभ होकर नवम, एकादश अथवा द्वितीय भाव में स्थित हो, साथ ही पंचम भाव एवं पंचमेश पर शुभ प्रभाव हो तो ऐसे जातक को निवेश कर कम अवधि में अत्यधिक लाभ कमाने का अवसर प्राप्त होता है। यदि स्थिति इसके विपरीत हो तो जातक को निःसंदेह नुकसान उठाना पड़ता है। लग्न, द्वितीय, पंचम, नवम, दशम या एकादश भाव में धनेश और लग्नेश अथवा धनेश और लाभेश अथवा भाग्येश और दशमेश अथवा धनेश और पंचमेश की युति हो तो जातक को लाॅटरी, शेयर, सट्टे से अचानक लाभ प्राप्त होता है। यदि लग्न, चतुर्थ, सप्तम और दशम भाव में शुभ ग्रह बली होकर स्थित हों तो शेयर मार्केट से धन प्राप्ति के योग बनते हैं। पंचम भाव में गुरु और लग्नेश की युति से अचानक धन प्राप्ति के योग का निर्माण होता है। यदि जातक की कुंडली के पंचम भाव में चंद्रमा हो तथा एकादश भाव में बैठकर शुक्र एक-दूसरे को दृष्टि प्रदान करें तो शेयर मार्केट से अनायास लाभ प्राप्त होता है। यदि कुंडली में कहीं भी लग्नेश और पंचमेश की युति हो और ये शुभ होकर शुभ प्रभाव में हों तो निश्चित रूप से शेयर मार्केट से लाभ की प्राप्ति होती है। यदि धनेश और लाभेश चतुर्थ भाव में हों और चतुर्थ भाव का स्वामी शुभ ग्रहों से दृष्ट या युत हो तो शेयर मार्केट से अकस्मात् धन की प्राप्ति होती है। किसी तरह का अचानक लाभ प्राप्त होने के लिए नवम भाव की भूमिका अहम होती है। अतः इस पर विचार करने के लिए उक्त भाव का विश्लेषण करना आवश्यक है क्योंकि अचानक लाभ में भाग्य का बराबर का हाथ होता है। नवम भाव पर शुभ ग्रह की दृष्टि व शुभ योग नवम भाव को बल प्रदान करते हैं। लग्न में बलवान बुध पर चंद्र या अष्टमेश दृष्टि दे तो अचानक लाभ होता है। इसके अलावा शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव जानने के लिए ग्रहों के गुण-धर्म, कारकत्व, उदय-अस्त, वक्री और मार्गी आदि गति भी आवश्यक होती है। गुरु, शुक्र, बलवान चंद्र और अकेला बुध सब गोचर में मंदी के कारक हैं, गुरु ग्रह से लंबी मंदी का संकेत मिलता है। शुक्र और बुध अल्प समय के लिए मंदी लाते हैं। सूर्य, मंगल, शनि, राहु और केतु तेजी कारक ग्रह माने जाते हैं। क्षीण चंद्र एवं अशुभ बुध तेजीकारक होते हैं। चंद्र की तेजी-मंदी अल्पकालीन होती है और उसका विभिन्न नक्षत्रों में गोचर भ्रमण दैनिक तेजी मंदी पर विशेष प्रभाव डालता है। चंद्र की तरह बुध भी अल्प समय के लिए तेजी या मंदी दर्शाता है। सूर्य से बुध की युति में अस्त और उदय होने की स्थिति शेयर बाजार के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। जब बुध पूर्व दिशा में अस्त होता है तो शेयर के भाव में तेजी आती है किंतु जब बुध पश्चिम दिशा में अस्त होता है तब बाजार में मंदी का असर होता है। इसी तरह जब बुध पूर्व दिशा में उदित होता है तो बाजार में तेजी आती है तथा जब बुध का उदय पश्चिम दिशा में होता है तब मंदी का माहौल बनता है। सूर्य का गोचर भ्रमण जब विभिन्न नक्षत्रों से होता है तो नक्षत्र की प्रकृति के अनुसार शेयर बाजार में तेजी अथवा मंदी होती है। सट्टे से लाभ कब मिलेगा ? 1. जिस व्यक्ति की जन्मकुण्डली में धनेश लाभ स्थान में हो या खासतौर पर लाभ स्थान में नीच-राशि का बुध हो अथवा नीच-राशि का कोई अन्य ग्रह हो, तो अच्छा धन-योग बनता है। 2. लग्नेश, धनेश तथा अष्टमेश (तीनों) लाभ स्थान में हों और वृषभ या मीन राशि का चन्द्रमा आठवें स्थान में हो, तो वह व्यक्ति सट्टे के व्यापार में करोड़पति होता है। 3. गुरु मीन राशि में हो या सूर्य, बुध एवं गुरु मिथुन राशि के लाभ स्थान में हो, व केवल मंगल वृष राशि का केन्द्र में हो, तो वह मनुष्य रूई तथा शेयरों के व्यापार से करोड़पति होता है। 4. लग्न में धनु राशि का गुरु, अष्टम स्थान में कर्क राशि का चन्द्रमा, लाभ स्थान में तुला राशि का शुक्र हो तो चांदी-सोने के व्यापार से करोड़पति होता है। 5. पूर्वोक्त ग्रहयोग के साथ-साथ यदि दशम स्थान में कन्या राशि का बुध भी हो, तो अपार सम्पत्ति का स्वामी बनाता है। ऐसा व्यक्ति सोना-चांदी के व्यापारियों में अग्रगण्य होता है। 6. मेष राशि का सूर्य और सिंह राशि का चन्द्रमा हो, तो उस व्यक्ति को सट्टे के व्यापार से धन लाभ होता है। 7. मेष का उच्चस्थ सूर्य हो और वृश्चिक का नीचस्थ चन्द्र हो, तो उसे सोना, चांदी, रूई, शेयर्स के वायदा-व्यापार से विशेष धनलाभ होता है। 8. मिथुन राशि का सूर्य और सिंह राशि का चन्द्रमा हो, तो उस व्यक्ति को सट्टा-व्यापार से अच्छा लाभ होता है। शेयर-मार्केट की घटी-बढ़ी: प्रश्नलग्न अथवा वस्तु की राशि को लग्न मानकर, उसके प्रथम तथा दूसरे भाव और चन्द्रमा द्वारा शेयरों की घटा-बढ़ी का विचार किया जाता है। चन्द्रमा यदि अष्टमेश के साथ किसी शुभ दृष्टियोग में हो दूसरे भाव पर कोई शुभ दृष्टि-सम्बन्ध करने वाला ग्रह हो, तो उस समय स्टाॅक या शेयर जरूर खरीद लेना चाहिए। द्वितीय भाव का स्वामी जब अष्टमेश की उच्चराशि में पहुंच और वह द्वितीयेश चन्द्र गुरु या शुक्र की किसी शुभ-दृष्टि में हो, तो उस समय शेयरों का खरीदना या बेचना लाभदायक होता है। लग्न, द्वितीय, सप्तम और अष्टम भाव में यदि पापग्रह स्थित हों, तो कदापि शेयर नहीं खरीदने चाहिए। कदाचित् वे पापग्रह लग्न व द्वितीय भाव के स्वामी हों, तब तो बड़ी ही सतर्कता से काम लेना चाहिए। सप्तमेश की यदि लग्नेश व द्वितीयेश पर कोई अशुभ दृष्टि पड़ रही हो, तो ऐसी दशा में भी शेयरों का न खरीदना ही अच्छा होता है। लग्न व द्वितीय स्थान में बैठा हुआ ग्रह यदि अष्टमेश को किसी पापदृष्टि से देख रहा हो, तब खरीदना या बेचना (दोनों ही) लाभदायक होता है। सप्तेश यदि दूसरे स्थान में जा बैठे, तो निस्सन्देह शेयरों का भाव गिर जाता है। जिस समय द्वितीयेश अष्टमेश के साथ शुभ-दृष्टि में हो, अथवा द्वितीयेश अष्टमेश की उच्चराशि में पहुंचे, अथवा चन्द्रमा अष्टमेश से संयोग करके अलग होता हुआ द्वितीयेश से जा मिले, उस समय (उस दिन) शेयर खरीदना चाहिए। ‘‘किस समय या कितने बजे खरीदना चाहिए।’’ इसके लिए द्वितीयेश जिस समय स्थानीय समय के अनुसार अष्टम भाव के प्रवेशांश पर पहुंचे उस समय खरीदना चाहिए। शेयरों की खरीद के लिए यह समय अत्युत्तम होता है और जिस समय चन्द्रमा अष्टमेश से अलग हो रहा हो, उस समय शेयरों का खरीदना भी लाभदायक हुआ करता है अथवा चन्द्रमा जिस समय अष्टमेश से संयोग करके आगे बढ़े और द्वितीयेश से जा मिले तब खरीदना विशेष अच्छा है। शेयर कब बेचें ? जिस समय द्वितीय स्थान में कोई शुभ ग्रह पहुंचे, तब बेच देना चाहिए अथवा लग्नेश जिस समय सप्तम स्थान में पहुंचे, तब बेचना अच्छा है और चन्द्रमा जब द्वितीयेश की शुभ दृष्टि में से निकलकर सप्तमेश या अष्टमेश के साथ किसी पाप दृष्टि में पहुंचे, तब बेचने से लाभ होता है। जिस दिन ऊपर लिखे नियमों के अनुसार ग्रहों के दृष्टि-सम्बन्ध जिस समय पर हों, उस समय शेयर बेच देना चाहिए। वायदे के सौदे पर लाभ-हानि कब होगी? लग्नेश, द्वितीयेश और पंचमेश यदि लग्न से दशम स्थान में स्थित हों, तो सभी वस्तु के वायदे के सौदे में हो तो अवश्य लाभ होता है। पंचमेश यदि पंचम स्थान में ही स्थित होकर लग्नेश या द्वितीयेश के साथ कोई शुभ-दृष्टि कर रहा हो, तो यह एक महान् सुयोग होता है। गुरु पंचम या द्वितीय स्थान में बलवान् होकर बैठा हो, पंचमेश केन्द्र में हो और वह किसी पाप-दृष्टि में न हो, तो वह समय लाभदायक होता है। यदि इस प्रकार के योग न हों, तो कदापि किसी भी वस्तु के वायदे के सौदे न करने चाहिए। यदि ग्यारहवां भाव बलवान् हो, अथवा ग्यारहवें भाव का स्वामी बलवान् हो, तो वायदे के काम में हानि होगी-लाभ नहीं होगा। यह सब विचार प्रश्न-लग्न से करना चाहिए। दशमेश जिस समय द्वितीयेश के साथ शुभ दृष्टि कर रहा हो, सूर्य द्वितीयेश के साथ शुभ-दृष्टि सम्बन्ध कर रहा हो, लग्नेश यदि ग्यारहवें स्थान में हो, गुरु, शुक्र, सूर्य अथवा चन्द्रमा दशम स्थान में बलवान होकर बैठे हों और उन पर कोई पाप-दृष्टि न पड़ रही हो तो उस समय किसी भी काम के लिए किये गए काॅन्ट्रेक्ट या वायदे में लाभ ही होता है। किन्तु दशमेश और द्वितीयेश जब किसी पाप-दृष्टि में फंसे हों या लग्न से पणफर स्थानों (2-5-8-11वें स्थानों) में हों अथवा इन स्थानों में पाप-ग्रह बैठे हों, तब मान-प्रतिष्ठा और धन (दोनों ही) चले जाते हैं-भारी हानि होती है। दैनिक लग्नों से तेजी-मंदी का ज्ञान: जिस तरह ग्रहों के वेध, राशि-संक्रांति, नक्षत्र-भ्रमण, चन्द्र-दर्शन एवं ग्रहों तथा भावों के पारस्परिक दृष्टि-सम्बन्ध आदि का सहारा लेकर विभिन्न पदार्थों की तेजी-मंदी जानने की अनेक पद्धतियों का वर्णन हमारे पूर्वाचार्यों ने अपने प्राचीनतम संहिता आदि ग्रन्थों में किया है, उसी तरह दिन-भर में लगभग दो-दो घंटे में बदल जाने वाले लग्नों के द्वारा भी उतने समय की प्रायः सभी पदार्थों की तेजी-मंदी जानने के लिए ‘‘लग्न-पद्धति’’ का एक सुन्दर और सरल प्रकार भी उनके ग्रन्थों में पाया जाता है, जिसे हम अपने पाठकों की जानकारी के लिए यहां प्रस्तुत कर रहे हैं। यद्यपि संसार के सभी प्रमुख व्यापारी केन्द्रों के स्थानीय (लोकल) समय के अनुसार प्रत्येक लग्न का शास्त्र-सम्मत आरम्भ और समाप्तिकाल हुआ करता है, तब भी निर्णयकर्ता की सुविधा के लिए भारतीय कुछ प्रसिद्ध पंचांगों में प्रत्येक लग्न का स्टैण्डर्ड टाइम के अनुसार भी आरम्भ तथा समाप्ति का समय लिखा रहता है। क्योंकि, इस समय भूमण्डल पर सर्वत्र स्टैण्डर्ड टाइम के आधार पर ही समस्त व्यापार-कार्यों का संचालन हो रहा है अतएव निर्णयकर्ता को चाहिए कि, वह किसी सर्वशुद्ध गणितवाले स्थानीय पंचांग के अनुसार बाजार खुलने के समय से लेकर बाजार के बंद होने के समय तक की लग्नकुण्डलियां भाव तथा ग्रह-स्पष्ट सहित तैयार कर लें। फिर प्रत्येक लग्न में भावाधिपतियों के अनुसार ग्रहों का शुभाशुभत्व निश्चित कर लें। कारण यह है कि, प्रत्येक लग्न के बदलते रहते हैं-उनका शुभाशुभत्व भी बदलता रहता है और पहले लग्न में ग्रहों और भावों में जो परस्पर दृष्टि-सम्बन्ध रहता है, वह भी बदल जाता है। ग्रहों का सामान्य शुभाशुभत्व: शुभ ग्रह-गुरु, शुक्र, पूर्णचन्द्र और शुभ ग्रह से सम्बन्ध करने वाला बुध, ये शुभ ग्रह माने गये हैं। पाप ग्रह- सूर्य, मंगल, शनि, राहु, केतु, क्षीण चन्द्रमा और पाप ग्रहों से सम्बन्ध करने वाला बुध, ये पाप ग्रह हैं। भारतीय पद्धति के अनुसार ग्रहों की पूर्ण दृष्टियां: 1. सूर्य, चन्द्र, बुध, शुक्र, राहु और केतु जिस स्थान में स्थिर होते हैं, उस स्थान से सप्तम स्थान को पूर्ण दृष्टि से देखते हैं। 2. मंगल 4-7-8 इन स्थानों को पूर्ण दृष्टि से देखता है। 3. गुरु 5-7-9 इन स्थानों को पूर्ण दृष्टि से देखता है। 4. शनि 3-7-10 इन स्थानों को पूर्ण दृष्टि से देखता है। ग्रहों के शुभाशुभत्व के विषय में शास्त्रीय विशेष मन्तव्यः 1. सभी लग्नों में त्रिकोण के स्वामी ग्रह सर्वदा शुभ फल ही करते हैं। भले ही वे सामान्य शास्त्र में क्रूर संज्ञा वाले क्यों न हों। 2. शुभ ग्रह केन्द्रेश होकर अशुभ फल किया करता है। 3. पाप ग्रह केन्द्रेश होकर शुभ फल किया करता है। 4. तीसरे, छठे और ग्यारहवें स्थानों के स्वामी शुभ फल नहीं करते। 5. आठवें घर का मालिक यदि लग्न का भी स्वामी हो, तो शुभ फल करता है। यदि ऐसा नहीं है, तो वह अष्टमेश सर्वदा अशुभ फल किया करता है। 6. यदि पंचमेश सप्तम स्थान में हो अथवा इसी तरह शुभ सप्तमेश पंचम स्थान में हो, तो वह अत्यन्त शुभदायक होता है। 7. जिस लग्न में पंचमेश या सप्तम स्थान का स्वामी ग्रह 6-8-12 इन स्थानों में से किसी स्थान में हो, तब भी वह ग्रह अशुभ फल किया करता है। लग्न से तेजी-मंदी जानने की युक्ति: शास्त्रकारों ने व्यापार-सम्बन्धी शुभाशुभ फल के विचार के लिए सप्तम स्थान को मुख्यता दी है और लग्न से पंचम स्थान को व्यापार का लाभ स्थान माना है, इससे निर्विवाद सिद्ध है कि व्यापार-सम्बन्धी विचारों के लिए ये ही दो मुख्य स्थान हैं। सबसे पहले यह विचार करना चाहिए कि कौन-कौन ग्रह पंचम तथा सप्तम स्थान को पूर्ण दृष्टि से देख रहे हैं और कौन-कौन ग्रह पंचम और सप्तम स्थान में विद्यमान हैं। जिस लग्न में ऊपर बतलाई हुई रीति से निश्चित किये हुए किसी शुभ ग्रह की पंचम या सप्तम स्थान पर पूर्ण दृष्टि पड़ रही हो तो उतने समय में बाजार का भाव गिर जाएगा। पंचम या सप्तम स्थान पर पड़ने वाली पूर्ण दृष्टियां शुभ हों, और उनके शुभत्व की मात्रा जिस परिमाण में अधिकाधिक हो, उसी हिसाब से अनुमान लगाइये कि इस वस्तु का भाव यहां तक ऊँचा जाएगा और इन दोनों स्थानों पर पाप ग्रहों की पूर्ण दृष्टियों की जितनी मात्रा होगी, तदनुसार भाव गिर जाएगा। यही बात शुभ या पाप ग्रहों की पंचम या सप्तम स्थान में स्थिति के आधार पर भी विचार करके फल का निश्चय करें। त किस सेक्टर में निवेश करें यदि आपकी कुंडली में हर प्रकार के शुभत्व मौजूद हैं तथा आकस्मिक धन प्राप्ति के योग वर्तमान हैं तब भी आपको उन सेक्टर के शेयरों में ही निवेश करना चाहिए जिस सेक्टर को नियंत्रित करने वाले ग्रह आपकी कुंडली में सर्वाधिक बली हैं। सबसे पहले आपके ज्योतिषी को आपकी कुंडली के सर्वाधिक बली ग्रह/ग्रहों का निर्धारण करना चाहिए। उस ग्रह के द्वारा नियंत्रित सेक्टर में निवेश करने से आप अत्यधिक मुनाफा कमा पाएंगे। यदि आपकी कुंडली में बृहस्पति अत्यधिक बली है तो आपको फार्मा एवं एजुकेशन सेक्टर में निवेश करने से अत्यधिक लाभ की प्राप्ति होगी। यदि आपकी कुंडली में शुक्र बली हो तो आपको सौंदर्य प्रसाधन, जवाहरात तथा आॅटो इन्डस्ट्री में निवेश करना चाहिए। यदि बुध बली हो तो टेलीकम्युनिकेशन में निवेश करें। यदि शनि बली हो तो मेटल सेक्टर खासकर आयरन एण्ड स्टील, एग्रो सेक्टर आदि में निवेश कर मुनाफा कमा सकते हैं। यदि आपकी कुंडली में मंगल सर्वाधिक बली हो तो आप पावर सेक्टर में निवेश कर मुनाफा कमा सकते हैं। यदि कुंडली में राहु मजबूत स्थिति में हो तो आईटी सेक्टर में निवेश कर मुनाफा कमाया जा सकता है। सूर्य सरकार से संबंधित सेक्टर के नियंत्रक हैं अतः यदि आपकी कुंडली में सूर्य मजबूत स्थिति में हैं तो सरकारी उपक्रमों से संबंधित शेयरों में निवेश करना मुनाफे का सौदा साबित होगा। उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के अतिरिक्त आपकी वर्तमान दशा आपके हानि-लाभ का निर्धारण करने में सहायक है। यदि आपकी वर्तमान दशा एवं अंतर्दशा शुभ ग्रहों की चल रही है तो इस समय का निवेश आपके लिए लाभदायक साबित होगा। दशा, अंतर्दशा के अतिरिक्त अपनी कुंडली पर गोचरीय प्रभावों की समीक्षा करना भी न भूलें। यदि इन सभी बातों का आंकलन समग्र रूप से करके शेयर बाजार में निवेश किया जाय तो अचानक धन लाभ प्राप्त किये जा सकते हैं तथा अत्यधिक नुकसान अथवा गंभीर आर्थिक संकट से बचा जा सकता है।

मुद्रा और शेयर मार्केट  जनवरी 2016

रिसर्च जर्नल का यह वर्तमान अंक 24 जनवरी 2016 को मुम्बई में आयोजित ज्योतिषीय संगोष्ठी पर आधारित है जिसका विषय था मुद्रा एवं शेयर बाजार। इस अंक का प्रमुख विषय मुद्रा, वायदा एवं शेयर बाजार से सम्बन्धित ज्योतिषीय सिद्धान्त हैं। इस विषय पर अनेक उल्लेखनीय आलेख समाविष्ट किये गये हैं जिनके लेखक प्रख्यात ज्योतिर्विद हैं। चूंकि रिसर्च जर्नल द्विभाषीय है इसलिए इस अंक में भी उपर्युक्त विषय पर अंग्रेजी एवं हिन्दी दोनों के आलेखों को सम्मिलित किया गया है। महत्वपूर्ण आलेखों में शामिल हैंः शेयर बाजार और आपकी कुंडली, 2016 में गोचर, बाजार एवं भारतीय अर्थ व्यवस्था, प्रत्येक ग्रह से उद्योगों के बारे में जानकारी, अंकों से जानिए शेयर में निवेश का शुभ समय, शेयर बाजार में उन्नति-अवनति के ज्योतिषीय योग।

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