सुख-समृद्धि हेतु शाबर मंत्र प्रयोग

सुख-समृद्धि हेतु शाबर मंत्र प्रयोग  

वर्तमान में ज्यादातर मनुष्य रोजगार से चिंतित रहते हैं। उच्च शिक्षा प्राप्त करने पर भी कार्य नहीं मिल पाता। क्या करें? क्या न करें? यही विचार मस्तिष्क में चलता रहता है। लोग व्यापार करते हैं, लाभ प्राप्त नहीं हो पाता, होता भी है, तो नाम-मात्र का। घर का खर्च कैसे चले? आवश्यकतायें कैसे पूर्ण हों? इन्हीं तथ्यों को ध्यान में रखकर शाबर मंत्र दिए जा रहे हैं, लाभ प्राप्त करें। याद रखें-सभी मंत्रों में पूर्व साधना पूर्ण करने का विधान पूर्ववत ही है। रोजगार प्राप्ति व धन वृद्धि मंत्र: ऊँ नमो भगवती पदुम पदमावी। ऊँ ह्रीं श्रीं श्रीं पूर्वाय दक्षिणाय उत्तराय आग पूरय, सर्वजन वश्य कुरू कुरू स्वाहा। विधि: प्रातः काल बात करने से पहले 108 बार जप पूर्ण कर लें। बाद में दस-दस बार मंत्र पढ़कर चारों कोनों में फूंके, तो चारों दिशाओं से रोजगार व धन वृद्धि में निश्चय ही लाभ प्राप्त होगा। यह प्रक्रिया नित्यप्रति करते रहें। 2. शीघ्र धन प्राप्ति हेतु मंत्र: ऊँ नमः कर घोर-रूपिणी स्वाहा। विधि: उपरोक्त मंत्र का जप प्रातःकाल देवी के किसी सिद्धि स्थान या नित्य पूजन स्थान पर 11 माला करें। रात्रिकाल में 108 मिट्टी के दाने लेकर कुएं पर जायंे और वहां दायीं पैर कुएं में लटकाकर व बाएं पैर को दाएं पैर पर रखकर इस तरह बैठें कि मुख सिद्ध देवी स्थान या नित्य देवी पूजन स्थान की तरफ हो। प्रति जप के साथ एक-एक करके 108 मिट्टी के दाने कुएं में डाल दें। ग्यारह दिन तक अनवरत इसी प्रकार करें। यह प्रयोग अतिशीघ्र आर्थिक सहायता प्राप्त करने के लिए है। अधिक करने पर दिन दूना रात चैगुना लाभ प्राप्त होगा। मंत्र: ऊँ अैं ह्रीं श्रीं श्रिये नमो भनवलि। मम समृध्यौ जवल जवल, मा सर्व सम्पद देहि, ममालक्ष्मी नाशय नाशय, हुं फट् स्वाहा। विधि: उक्त मंत्र की 21 माला 21 दिनों तक नित्य जपें। 21 वें दिन मंत्र जप के बाद घृत (घी) की 108 आहुतियां दे। फिर नित्य एक माला जप करने से धन-धान्य की वृद्धि होती रहेगी। दरिद्रता विनाशक साधना मंत्र: कुबेर ! त्वं धनाधीश, गृहे ते कमला स्थिता, ता देवी प्रशयाशुं, त्वं मद गृहे ते नमो नमः। विधि - उपरोक्त मंत्र का 21 दिनों तक नित्य 9 माला जप करें। इसके बाद मंत्र जपकर 9वें दिन गोघृत, दूर्वा (दूबघास) और पुष्प से 108 आहुतियां दें। पुनः हर रोज एक माला का जप करते रहें तो दरिद्रता दोष समाप्त हो जायेगा। अनायास धन प्राप्ति योग मंत्र: ऊँ तारत्रि नमः। ऋद्धि वृद्धि कुरू-कुरू स्वाहा। विधि - रात्रि 12 बजे के बाद ही धूप दीप जलाकर उपरोक्त मंत्र का 1188 बार जप करें। यह कार्य 21 दिनों तक लगातार करें। 21वें दिन 108 मंत्रों से कमल पुष्प की गोघृत के साथ आहुति दें, तो निश्चय ही इस मंत्र से अनायास धन प्राप्त होगा और धन वृद्धि भी होगी। ग्रहण काल में घृत-दूर्वा-काली मिर्च-जटामांसी स्त्री मिलाकर 108 आहुतियां अवश्य देते रहें व एक माला जप नित्य करें। ऋण मुक्ति साधना मंत्र: ऊँ अैं ह्रीं श्रीं सं सिद्धिदा। साधय साधय स्वाहा। विधि: अनायास धन प्राप्ति योग वाली विधि का प्रयोग करें। धन-संपदा प्राप्ति व स्थिरता एवं ऋण निवृत्ति प्रयोग मंत्र: आं ह्रीं क्रौं श्रीं श्रियै नमः। मामालक्ष्मी नाशय नाशय। माम ऋणौतीर्ण कुरू कुरू, सम्पदं वर्धय वर्धय स्वाहा। विधि: उक्त मंत्र का नित्यप्रति 43 दिनों तक 228 बार जप करें तथा 44वें दिन 196 बार जप करें तथा इसी दिन 228 कमलगट्टा लेकर गोघृत के साथ एक-एक मंत्र पढ़ते हुए हवन करें। बाद में नित्य प्रति 10 बार मंत्र जपते रहंे तो धन-संपदा प्राप्ति व स्थिरता एवं ऋण निवृत्ति होती है। ऋद्धि-सिद्धि अथवा बरक्कत हेतु चमत्कारी प्रयोग मंत्र: खुद काश ना, मोहम्मद का नूर। ख्वाजा की तस्बीह, कुल आजम हजूर। भेजो मोवक्कील, ल आए हजूर। बिस्मिल्लाह। विधि: प्रातः काल पवित्र होकर पश्चिम दिशा की ओर मुख करके उक्त मंत्र का एक माला जप करें। यह कार्य प्रतिदिन करें। समय हो तो अधिक 3, 7, 9, 11 माला का जप करें। अधिक जप का अधिक फल प्राप्त होगा। जीवन में शांति, प्रगति या उन्नति, व्यापार में वृद्धि और ग्राहकों का आकर्षण इस मंत्र के सुपरिणाम हैं। रोजगार प्राप्ति एवं अभीष्ट कामना सिद्धि साधन मंत्र: ऊँ जागु जागु, जेहि काजे लगावौं, तेहि काजे लागु। धूप करावौं, धनिद्रा धावै, सेंधा नोन चढ़ा पट लावै। आंगद वीर बौवसै कुंवारी वेदना करै, उपकारौ। जागु-जागु-जागु, जेहि काजै लगावैं, तेहि काजे लागु। इकइस इस्त्री मेरे पास आवैं। अनखि आएं, मेरे वोस्ताद को न मानैं, तो धोबी के कुंड में परैं, मेरी भक्ति, गुरु की शक्ति। फुरो मंत्र, ईश्वरो वाचा। विधि: उक्त मंत्र का जप मंगलवार को आरंभ करें। एक लाख जप। 15वें दिन मंगलवार को बेर की लकड़ी जलाकर राई, धनिया और सेंधा नमक व घृत गाय का लेकर होम 1 माला का करें। इस मंत्र के प्रयोग से आशातीत सफलता प्राप्त होती है। व्यापार- वृद्धि व दुकान बंधन खोलने की अचूक साधना मंत्र: भंवर वीर तू चेला मेरा, खोल दुकान वाहा कर मेरा। उठै जो डण्डी बिकै जो माल, भंवरवीर सोखे नहिं जाय। विधि: पहले किसी शुभ मुहूर्त में घृत, गुग्गुल की धूप देते हुए 108 जप कर लें। दुकान खोलकर साफ-सफाई करने के बाद काली साबुत उड़द के दानों पर 108 बार मंत्र पढ़कर दुकान में बिखेर दें तथा कुछ दाने बैठने वाली गद्दी के नीचे अवश्य ही डालें। प्रयोग रविवार के दिन से प्रारंभ कर आवश्यकतानुसार 3, 5 या 7 रविवार तक लगातार करें। प्रारंभ व समापन रविवार को ही करने से लाभ होगा। इससे व्यापार में वृद्धि तथा दुकान बंधी हो तो खुल जाना स्वाभाविक है। 11. व्यापार वृद्धि महालक्ष्मी मंत्र मंत्र: श्री महालक्ष्मी नमो नमः लक्ष्मी माई, संत की सवाई। आओ करो भलाई। भलाई न करौ, तो सात समुद्र की रिधि-सिधि रवै। ओ नव-नाथ, चैरासी सिधों की दोहाई। श्री महा लक्ष्मी नमो नमः।। विधि: दूकान खोलने के पहले, लक्ष्मी का ध्यान कर, उक्त मंत्र को 108 बार नित्य जप करने से व्यापार अधिक चलता है।


पितृ ऋण एवं संतान विशेषांक  सितम्बर 2014

फ्यूचर समाचार के पितृ ऋण एवं संतान विषेषांक में अत्यधिक ज्ञानवर्धक व जनहितकारी लेख जैसे- पितृ दोष अथवा पितृ ऋण परिचय, श्राद्ध कर्मः कब, क्यों और कैसे?, पितृदोष सम्बन्धी अषुभ योग एवं उनके निवारण के उपाय, संतान हीनताः कारण और निवारण, टेस्ट ट्यूब बेबीः एक ज्योतिषीय अध्ययन तथा ज्योतिष एवं महिलाएं आदि सम्मलित किये गये हैं। इसके अतिरिक्त पाठकों व कर्मकाण्ड के विद्वानों के लिए संक्षिप्त तर्पण तथा श्राद्ध विधि की सटीक व्याख्या की गई है। फलकथन के अन्तर्गत कुण्डली व संतान संख्या, इन्फर्टिलिटी, करियर परिचर्चा, सत्य कथा, पंचपक्षी के रहस्य, आदि लेख पत्रिका की शोभा बढ़ा रहे हैं। संतान प्राप्ति के अचूक उपाय, हिमालय की संतानोत्पादक जड़ीबूटियां, शाबर मंत्र, भागवत कथा, नक्षत्र एवं सम्बन्धित दान, पिरामिड के स्वास्थ्य उपचार, हैल्थ कैप्सूल, वास्तु परामर्ष, वास्तु प्रष्नोत्तरी, कर्मकाण्ड, पिरामिड वास्तु व अन्य मासिक स्तम्भ भी विषेष रोचक हैं।

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